कर्नाटक उच्च न्यायालय ने यौन उत्पीड़न के आरोपी प्रोफेसर का निलंबन वापस लेने के मामले में वरिष्ठ IAS अधिकारी और SIMS निदेशक के खिलाफ विभागीय जांच का आदेश दिया है। अदालत ने आरोपी प्रोफेसर को 'सफेद कोट में भेड़िया' करार देते हुए सख्त टिप्पणी की है।

मुख्य बिंदु

  • कर्नाटक हाईकोर्ट ने IAS अधिकारी मोहम्मद मोहसिन और SIMS निदेशक विरुपाक्षप्पा वी. के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं।
  • आरोपी एसोसिएट प्रोफेसर अश्विन हेब्बार के निलंबन को संदिग्ध तरीके से वापस लिया गया था।
  • अदालत ने आरोपी को 'सफेद कोट में भेड़िया' (Wolf in white coat) कहा है।
  • प्रोफेसर के खिलाफ यह यौन उत्पीड़न का दूसरा मामला है।

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए, यौन उत्पीड़न के आरोपी एसोसिएट प्रोफेसर के निलंबन को समय से पहले समाप्त करने के लिए जिम्मेदार IAS अधिकारी मोहम्मद मोहसिन (अतिरिक्त मुख्य सचिव, चिकित्सा शिक्षा विभाग) और SIMS निदेशक विरुपाक्षप्पा वी. के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। यह मामला शिवमोगा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SIMS) के एक प्रोफेसर, अश्विन हेब्बार के खिलाफ लगे गंभीर आरोपों से जुड़ा है।

अदालत की सख्त टिप्पणी: 'सफेद कोट में भेड़िया'

न्यायमूर्ति डी.के. सिंह और न्यायमूर्ति टी.एम. नादफ की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी प्रोफेसर अश्विन हेब्बार के लिए बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। अदालत ने उन्हें "सफेद कोट में भेड़िया" (Wolf in white coat) करार दिया। अदालत ने यह भी कहा कि अधिकारी और निदेशक ने पीड़िता द्वारा झेले गए अपमान, उत्पीड़न और यौन शोषण के प्रति घोर संवेदनहीनता दिखाई है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला जून 2025 का है, जब एक पीजी मेडिकल छात्रा ने आरोप लगाया था कि प्रोफेसर हेब्बार ने एक डिनर पार्टी के दौरान उसके साथ अनुचित व्यवहार किया। आरोपी को गिरफ्तार किया गया था और जुलाई 2025 में निलंबित कर दिया गया था। हालांकि, नवंबर 2025 में, बिना किसी ठोस विभागीय जांच या चार्जशीट के, उनका निलंबन वापस ले लिया गया और उन्हें दूसरे संस्थान में स्थानांतरित कर दिया गया।

BozokMedia विश्लेषण: सत्ता का दुरुपयोग?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल एक व्यक्तिगत अपराध नहीं है, बल्कि प्रशासनिक तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार और राजनीतिक दबाव की ओर इशारा करता है। अदालत ने नोट किया कि राजनेताओं और एनजीओ के दबाव में आकर अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर आरोपी को राहत देने की कोशिश की।

"प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा आरोपी को बचाने का प्रयास न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह पीड़ित के प्रति व्यवस्था की संवेदनहीनता को भी दर्शाता है।"
क्या आप जानते हैं?: कर्नाटक सिविल सेवा नियम, 1957 के तहत, बिना चार्जशीट के निलंबन की समीक्षा के लिए एक निश्चित समय सीमा निर्धारित है, जिसका इस मामले में उल्लंघन किया गया।

Frequently Asked Questions

1. अदालत ने IAS अधिकारी पर क्या कार्रवाई की है?
अदालत ने उनके निर्णय की जांच के लिए विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।

2. आरोपी प्रोफेसर का पिछला रिकॉर्ड क्या है?
2022 में भी उन पर एक जूनियर रेजिडेंट के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप लगा था।