दिल्ली जेल विभाग में पहचान संबंधी विसंगतियों के कारण 49 कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त करने का आदेश दिया गया है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले में सीएटी (CAT) के स्थगन आदेश को रद्द कर दिया है।
- दिल्ली जेल विभाग के 49 कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त किया जाएगा।
- पहचान सत्यापन (ID Verification) और बायोमेट्रिक्स में गंभीर विसंगतियां पाई गईं।
- दिल्ली उच्च न्यायालय ने सीएटी के स्थगन आदेश को पलट दिया है।
- बर्खास्त किए जाने वालों में सहायक अधीक्षक, वार्डर और मेट्रॉन शामिल हैं।
नई दिल्ली: दिल्ली के जेल प्रशासन में एक बड़ा प्रशासनिक झटका लगा है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने पिछले सप्ताह केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसने 49 जेल अधिकारियों की बर्खास्तगी पर रोक लगा दी थी। अब इन अधिकारियों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी जाएंगी।
भर्ती प्रक्रिया में बड़ी खामी
यह पूरी कार्रवाई दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (DSSSB) की सिफारिश के बाद की गई है। DSSSB ने पाया कि 2020 में भर्ती किए गए कर्मियों के पहचान सत्यापन रिकॉर्ड में भारी विसंगतियां थीं। जांच के दौरान यह सामने आया कि 477 कर्मियों के रिकॉर्ड की जांच की गई, जिसमें से 50 कर्मियों के बायोमेट्रिक डेटा और तस्वीरों में संदिग्ध अंतर पाया गया।
बर्खास्त किए जाने वाले कर्मचारियों में 9 सहायक अधीक्षक, 39 वार्डर और 2 मेट्रॉन शामिल हैं। ये सभी कर्मचारी तिहार, मंडोली और रोहिणी जेल परिसरों में तैनात थे।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और पहचान का फर्जीवाड़ा संस्थागत भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जेल जैसे संवेदनशील संस्थानों में गलत पहचान वाले कर्मियों का होना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा हो सकता है। यदि भर्ती प्रक्रिया के दौरान ही पहचान के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है, तो यह पूरे चयन तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
यह मामला 2020 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। उस समय से ही चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही थी। 2021 में DSSSB ने भौतिक सत्यापन की मांग की थी, लेकिन प्रक्रिया में देरी और कुछ उम्मीदवारों द्वारा सत्यापन के लिए उपस्थित न होने के कारण यह मामला लंबा खिंच गया।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: किन जेलों में ये विसंगतियां पाई गईं?
उत्तर: ये विसंगतियां मुख्य रूप से तिहार, मंडोली और रोहिणी जेल परिसरों में तैनात कर्मियों में पाई गईं।
प्रश्न 2: क्या उच्च न्यायालय ने सीएटी के आदेश को बदल दिया है?
उत्तर: हाँ, दिल्ली उच्च न्यायालय ने सीएटी के स्थगन आदेश को रद्द करते हुए नियुक्तियों को रद्द करने की घोषणा की है।