तमिलनाडु राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण (TNSWA) ने मद्रास उच्च न्यायालय को सूचित किया है कि पल्लिकरनई आर्द्रभूमि के आसपास निर्माण कार्यों को पूरी तरह से प्रतिबंधित करने के बजाय उन्हें विनियमित किया जा सकता है।

  • TNSWA ने अदालत में कहा कि निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध के बजाय 'प्रभाव क्षेत्र' (ZoI) के माध्यम से नियमन संभव है।
  • NCSCM ने एक अंतरिम 'ज़ोन ऑफ इन्फ्लुएंस' (ZoI) मानचित्र प्रस्तावित किया है।
  • यह प्रस्ताव CREDAI द्वारा NGT के 1 किमी के व्यापक प्रतिबंध को चुनौती देने के बाद आया है।

चेन्नई की महत्वपूर्ण पल्लिकरनई आर्द्रभूमि (Pallikaranai marshland) के आसपास संपत्ति मालिकों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। तमिलनाडु राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण (TNSWA) ने मद्रास उच्च न्यायालय में तर्क दिया है कि आर्द्रभूमि के आसपास निर्माण गतिविधियों को पूरी तरह से प्रतिबंधित करने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि उन्हें वैज्ञानिक आधार पर विनियमित किया जा सकता है।

न्यायमूर्ति सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ के समक्ष यह दलील दी गई कि नेशनल सेंटर फॉर सस्टेनेबल कोस्टल मैनेजमेंट (NCSCM) ने एक अंतरिम 'ज़ोन ऑफ इन्फ्लुएंस' (ZoI) का खाका तैयार किया है। यह योजना तब तक लागू रहेगी जब तक कि विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन के बाद अंतिम ज़ोन निर्धारित नहीं हो जाता।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला शहरी विकास और पारिस्थितिक संरक्षण के बीच के संघर्ष का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यदि अदालत इस प्रस्ताव को स्वीकार करती है, तो यह चेन्नई के रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए एक बड़ा मोड़ साबित होगा, क्योंकि वर्तमान में NGT द्वारा लगाए गए 1 किमी के प्रतिबंध ने हजारों परियोजनाओं को अधर में लटका रखा है।

NCSCM की रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित अंतरिम ZoI की चौड़ाई आर्द्रभूमि की सीमा के आधार पर अलग-अलग होगी। रिपोर्ट में बताया गया है कि लगभग 46.30 किमी की सीमा के लिए ZoI की चौड़ाई 0-20 मीटर के बीच रखी जा सकती है, जबकि 24.55 किमी के हिस्से के लिए यह 100 मीटर से अधिक हो सकती है। यह दर्शाता है कि आर्द्रभूमि और शहरी क्षेत्र का मिलन बिंदु एक समान नहीं है।वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, एक समान दूरी के बजाय स्थल-विशिष्ट (site-specific) नियमन पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचाए बिना विकास की अनुमति दे सकता है।

यह मामला मुख्य रूप से CREDAI-चेन्नई और अन्य पक्षों द्वारा दायर याचिकाओं के जवाब में आया है। इन याचिकाओं में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें आर्द्रभूमि की सीमा से 1 किमी के दायरे में किसी भी नए निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पल्लिकरनई आर्द्रभूमि चेन्नई के सबसे महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्रों में से एक है। पिछले कुछ दशकों में, अनियंत्रित शहरीकरण और जल निकासी प्रणालियों में व्यवधान के कारण इस क्षेत्र में जलभराव और जैव विविधता के नुकसान की गंभीर समस्याएँ देखी गई हैं, जिसके कारण NGT को कड़े कदम उठाने पड़े थे।

Did You Know?: पल्लिकरनई आर्द्रभूमि चेन्नई के प्राकृतिक जल निकासी तंत्र के रूप में कार्य करती है और शहर को बाढ़ से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

Frequently Asked Questions

1. NGT का वर्तमान प्रतिबंध क्या है?
NGT ने पल्लिकरनई आर्द्रभूमि की सीमा से 1 किमी के दायरे में नए निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है।

2. TNSWA का नया प्रस्ताव क्या है?
TNSWA का प्रस्ताव है कि निर्माण को पूरी तरह रोकने के बजाय, वैज्ञानिक डेटा के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नियम (ZoI) लागू किए जाएं।