इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा प्रदर्शन के मामले में अकृति चौधरी के खिलाफ लगाए गए एनएसए (NSA) को मनमाना और अस्पष्ट बताते हुए उनकी हिरासत रद्द कर दी है। अदालत ने राज्य सरकार पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अकृति चौधरी की एनएसए (NSA) के तहत हिरासत को अवैध घोषित किया।
- अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
- जुर्माने की राशि संबंधित अधिकारियों (जिला मजिस्ट्रेट से लेकर एसएचओ तक) से वसूली जाएगी।
- अकृति पर 11 अलग-अलग एफआईआर दर्ज हैं, जिनमें से कुछ में जमानत मिल चुकी है।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बुधवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 25 वर्षीय छात्रा अकृति चौधरी के खिलाफ लगाए गए कठोर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) को 'मनमाना और अस्पष्ट' करार दिया है। अकृति को इस वर्ष अप्रैल में नोएडा में हुए श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में हिरासत में लिया गया था।
न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की पीठ ने अकृति की बंदी प्रत्यक्षीकरण (habeas corpus) याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। अकृति, जो पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर की रहने वाली हैं और दिल्ली विश्वविद्यालय की स्नातक हैं, 11 अप्रैल से हिरासत में थीं। मई में उनके खिलाफ एनएसए लगाया गया था और वे गौतम बुद्ध नगर की कसना जेल में बंद थीं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला व्यक्तिगत स्वतंत्रता और राज्य की दमनकारी शक्तियों के बीच संघर्ष का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। जब कानून का उपयोग विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए किया जाता है, तो न्यायपालिका की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
अदालत का यह निर्णय उन अधिकारियों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो बिना ठोस आधार के कठोर कानूनों का दुरुपयोग करते हैं।
अकृति के वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोंसाल्वेस ने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट ने इस अवैध हिरासत के लिए राज्य सरकार पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। एक अन्य वकील, माणिक गुप्ता ने स्पष्ट किया कि अदालत ने संकेत दिया है कि यह जुर्माना उन अधिकारियों से वसूला जाएगा जिन्होंने इस हिरासत को मंजूरी दी थी, जिसमें जिला मजिस्ट्रेट (DM) से लेकर थाना प्रभारी (SHO) तक शामिल हैं।
पुलिस का आरोप था कि अकृति एक ऐसी विचारधारा का समर्थन कर रही थीं जो हिंसा के माध्यम से लक्ष्य प्राप्त करने में विश्वास करती है। सरकार ने दावा किया था कि उन्होंने दिल्ली के करावल नगर में एक पुस्तकालय के माध्यम से हिंसक आंदोलन की रणनीति बनाई थी। हालांकि, बचाव पक्ष का तर्क था कि यह केवल गरीब श्रमिकों के लिए एक बच्चों की लाइब्रेरी का उद्घाटन था।
अकृति पर हत्या के प्रयास और आपराधिक साजिश सहित 11 प्राथमिकी (FIR) दर्ज हैं। हालांकि उन्हें पांच मामलों में जमानत मिल चुकी है, लेकिन अन्य छह मामलों में सुनवाई अभी लंबित है। अकृति के पिता अरुण चौधरी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था।
Frequently Asked Questions
1. अदालत ने जुर्माना क्यों लगाया?
अदालत ने अकृति की हिरासत को 'मनमाना' और 'अवैध' पाया, इसलिए राज्य सरकार पर दंड लगाया गया।
2. जुर्माना कौन भरेगा?
अदालत के अनुसार, यह राशि उन सरकारी अधिकारियों से वसूली जाएगी जिन्होंने इस अवैध हिरासत को मंजूरी दी थी।