पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जेल इंटरव्यू मामले में बर्खास्त किए गए डीएसपी गुरशेर सिंह संधू को बहाल करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि सरकार बिना विभागीय जांच किए उन्हें बर्खास्त नहीं कर सकती थी।

  • पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने डीएसपी गुरशेर सिंह संधू की बर्खास्तगी को रद्द कर दिया है।
  • अदालत ने कहा कि सरकार ने अनुच्छेद 311(2)(b) का गलत इस्तेमाल किया और नियमित जांच की प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
  • संधू को सभी पिछले लाभों के साथ सेवा में बहाल करने का आदेश दिया गया है।
  • हालांकि, सरकार उनके खिलाफ चल रही विभागीय जांच को जारी रख सकती है।

चंडीगढ़: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में, गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जेल से दिए गए विवादास्पद इंटरव्यू मामले में पंजाब पुलिस के उप पुलिस अधीक्षक (DSP) गुरशेर सिंह संधू की बर्खास्तगी को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति नमित कुमार की पीठ ने पंजाब सरकार के जनवरी 2025 के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसके तहत संधू को सेवा से हटा दिया गया था।

यह मामला साल 2023 का है, जब एक निजी समाचार चैनल ने पुलिस हिरासत में मौजूद लॉरेंस बिश्नोई के दो इंटरव्यू प्रसारित किए थे। आरोप था कि डीएसपी संधू ने इन इंटरव्यूओं की रिकॉर्डिंग में सहायता की थी। इस मामले में सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 311(2)(b) का उपयोग करते हुए संधू को बिना किसी नियमित विभागीय जांच के सीधे बर्खास्त कर दिया था।

कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन

अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार यह साबित करने में विफल रही कि एक नियमित विभागीय जांच करना क्यों संभव नहीं था। संधू के वकीलों ने तर्क दिया कि सरकार ने उन्हें अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया और जांच प्रक्रिया को दरकिनार करने के लिए संवैधानिक प्रावधानों का गलत इस्तेमाल किया।

अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल कर्मचारी की गैर-सहयोगिता या अनुपस्थिति को विभागीय जांच को टालने का आधार नहीं बनाया जा सकता।

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह फैसला प्रशासनिक कानून के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि कोई कर्मचारी जांच में भाग नहीं लेता है, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि जांच को संवैधानिक रूप से अव्यावहारिक मान लिया जाए। सरकार को यह दिखाना आवश्यक है कि कोई वास्तविक बाधा थी जो जांच को रोक रही थी।

ऐतिहासिक संदर्भ और मामला

लॉरेंस बिश्नोई भारत का एक कुख्यात गैंगस्टर है, जिसके खिलाफ कई हत्या और संगठित अपराध के मामले दर्ज हैं। 2023 में उसके जेल से दिए गए इंटरव्यू ने सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। संधू, जो उस समय SAS नगर में तैनात थे, ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उनका बिश्नोई की हिरासत या जांच में कोई सीधा हस्तक्षेप नहीं था।

Did You Know?: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 311 सरकारी कर्मचारियों को मनमानी बर्खास्तगी के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है।

Frequently Asked Questions

1. डीएसपी संधू को क्यों बर्खास्त किया गया था?
उन पर आरोप था कि उन्होंने जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के इंटरव्यू की रिकॉर्डिंग में मदद की थी।

2. क्या संधू पर जांच अभी भी जारी रहेगी?
हाँ, हाईकोर्ट ने कहा है कि बर्खास्तगी रद्द होने के बावजूद राज्य सरकार उनके खिलाफ चल रही विभागीय जांच को जारी रख सकती है।