सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश और राजस्थान में सरकारी स्कूलों में पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के प्रवेश और फोटोग्राफी पर लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली याचिका को सुनने से इनकार कर दिया है। यह मामला 'स्कूल ठीक करो' अभियान के संदर्भ में आया है।
- सुप्रीम कोर्ट ने यूपी और राजस्थान के स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया।
- याचिका में पत्रकारों और कार्यकर्ताओं द्वारा स्कूल के बुनियादी ढांचे (पानी, बिजली, मिड-डे मील) के दस्तावेजीकरण पर रोक का आरोप लगाया गया था।
- यह मामला 'स्कूल ठीक करो' अभियान के दौरान राजस्थान में कार्यकर्ताओं के साथ हुई हिंसा के बाद आया है।
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकारों द्वारा सरकारी स्कूलों में पत्रकारों, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं के प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंधों के खिलाफ दायर याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस रिट याचिका पर विचार करने की अनिच्छा व्यक्त की।
प्रतिबंधों का विवरण
याचिकाकर्ता प्रिया मिश्रा द्वारा अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस याचिका में राजस्थान के माध्यमिक शिक्षा निदेशक और उत्तर प्रदेश के अयोध्या सहित कई जिलों (आजमगढ़, बलिया, बस्ती, बलरामपुर, शामली और आगरा) के शिक्षा अधिकारियों द्वारा जारी आदेशों को चुनौती दी गई थी। इन आदेशों के तहत स्कूलों के भीतर फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, साक्षात्कार और लाइव स्ट्रीमिंग पर कड़ा प्रतिबंध लगाया गया है।
याचिका में तर्क दिया गया कि ये प्रतिबंध जनता को सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और गरिमा के बारे में जानकारी देने के अधिकार का उल्लंघन करते हैं। याचिका के अनुसार, इन आदेशों के कारण क्लासरूम, शौचालय, पीने के पानी की सुविधा, बिजली और मिड-डे मील जैसी बुनियादी सुविधाओं का दस्तावेजीकरण करना असंभव हो गया है।
'स्कूल ठीक करो' अभियान और संघर्ष
यह कानूनी लड़ाई 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के 'स्कूल ठीक करो' अभियान के ठीक बाद शुरू हुई है। इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीण भारत के सरकारी स्कूलों के जर्जर बुनियादी ढांचे का ऑडिट करना और सुधार लाना है। हाल ही में राजस्थान के जयपुर के पास रामपुरा-कनवरपुरा गांव में CJP के सदस्यों को एक जर्जर स्कूल का दौरा करने के दौरान भीड़ द्वारा पीटा गया और खदेड़ दिया गया था।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला शिक्षा के अधिकार और सूचना के अधिकार के बीच के संघर्ष को उजागर करता है। जब सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता की मांग की जाती है, तो प्रशासनिक आदेश अक्सर 'सुरक्षा' का हवाला देकर मीडिया की पहुंच को सीमित करने का प्रयास करते हैं। यह निर्णय भविष्य में सरकारी स्कूलों के ऑडिट और जवाबदेही के लिए एक मिसाल बन सकता है।
सरकारी स्कूलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र मीडिया की पहुंच अनिवार्य है, लेकिन कानूनी बाधाएं इस प्रक्रिया को जटिल बना रही हैं।
Frequently Asked Questions
1. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका क्यों खारिज की?
कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करने के लिए इच्छुक नहीं है, हालांकि विस्तृत कानूनी आधार साझा नहीं किए गए।
2. 'स्कूल ठीक करो' अभियान क्या है?
यह CJP द्वारा शुरू किया गया एक अभियान है जो ग्रामीण स्कूलों के बुनियादी ढांचे की स्थिति की जांच और सुधार पर केंद्रित है।