सुप्रीम कोर्ट ने 2016 के सुरजागढ़ आगजनी मामले से जुड़े कार्यकर्ता सुरेंद्र गडलिंग की जमानत याचिका पर 14 अक्टूबर को सुनवाई करने का निर्णय लिया है। गडलिंग पिछले कई वर्षों से जेल में बंद हैं।
- सुप्रीम कोर्ट 14 अक्टूबर को सुरेंद्र गडलिंग की जमानत याचिका पर सुनवाई करेगा।
- गडलिंग 2016 के सुरजागढ़ लोहे की खदान आगजनी मामले में आरोपी हैं।
- गडलिंग को एलगार परिषद मामले में पहले ही जमानत मिल चुकी है।
- गडलिंग 2018 से जेल में बंद हैं।
नई दिल्ली: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को यह स्पष्ट किया कि वह 14 अक्टूबर को अधिवक्ता और कार्यकर्ता सुरेंद्र गडलिंग द्वारा दायर की गई जमानत याचिका पर सुनवाई करेगा। यह मामला 2016 के चर्चित सुरजागढ़ लोहे की खदान आगजनी मामले से संबंधित है, जिसमें महाराष्ट्र के गडचिरोली जिले में लोहे के अयस्क का परिवहन करने वाले वाहनों को जलाने का आरोप है।
मामले की पृष्ठभूमि
सुरजागढ़ मामला 2016 का है, जब महाराष्ट्र के गडचिरोली जिले में स्थित सुरजागढ़ खदानों से लोहा ले जा रहे कई वाहनों को कथित तौर पर प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से जुड़े व्यक्तियों द्वारा आग के हवाले कर दिया गया था। सुरेंद्र गडलिंग को फरवरी 2019 में इस मामले में गिरफ्तार किया गया था और वे तब से न्यायिक हिरासत में हैं।
गडलिंग के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और संदीप मेहता की पीठ के समक्ष तर्क दिया कि उनके मुवक्किल पिछले सात वर्षों से अधिक समय से जेल में बंद हैं। सिब्बल ने यह भी रेखांकित किया कि गडलिंग एलगार परिषद-माओवादी लिंक मामले में भी आरोपी थे, लेकिन उस मामले में उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला न केवल व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा है, बल्कि यह सुरक्षा एजेंसियों और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं के बीच चल रहे लंबे कानूनी संघर्ष का प्रतीक भी है। बार-बार होने वाली स्थगनें और जजों का खुद को मामले से अलग करना (recusal) न्यायिक प्रक्रिया की जटिलताओं को दर्शाता है।
लंबे समय तक बिना सुनवाई के जेल में रहना व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने अदालत से आग्रह किया कि इस मामले को एक विस्तृत सुनवाई के लिए गैर-विविध (non-miscellaneous) दिन पर सूचीबद्ध किया जाए, ताकि वे आरोपी के खिलाफ सबूतों को विस्तार से प्रस्तुत कर सकें।
ऐतिहासिक संदर्भ
सुरेंद्र गडलिंग की गिरफ्तारी की श्रृंखला 2018 में शुरू हुई थी जब उन्हें एलगार परिषद मामले में हिरासत में लिया गया था। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में एलगार परिषद सम्मेलन में दिए गए उकसावे वाले भाषणों के कारण अगले दिन हिंसा भड़की थी।
Frequently Asked Questions
1. सुरेंद्र गडलिंग कौन हैं?
सुरेंद्र गडलिंग एक अधिवक्ता और कार्यकर्ता हैं, जो भीम कोरगांव और सुरजागढ़ मामलों में आरोपी हैं।
2. मामला क्या है?
यह मामला 2016 में गडचिरोली की खदानों में वाहनों को आग लगाने से संबंधित है।