तमिलनाडु सरकार ने वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में संपत्ति की कुर्की और निवेशकों को मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए एक नई SOP पेश की है। इस कदम का उद्देश्य जिला राजस्व अधिकारियों के बोझ को कम करना और नीलामी प्रक्रिया में तेजी लाना है।
- वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में संपत्ति की कुर्की के लिए नई SOP लागू।
- 10 करोड़ रुपये से अधिक के मामलों के लिए आर्थिक अपराध शाखा के पुलिस अधीक्षक को अधिकार दिए गए।
- प्रभावित निवेशकों को मुआवजा वितरण प्रक्रिया में तेजी आएगी।
तमिलनाडु सरकार ने वित्तीय धोखाधड़ी और जमाकर्ताओं के हितों से जुड़े मामलों में संपत्ति की कुर्की (property attachment) को सुव्यवस्थित और मानकीकृत करने के लिए एक नया मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) पेश किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य अंतरिम कुर्की की कार्यवाही में दक्षता लाना और निवेशकों के हितों की रक्षा करना है।
प्रक्रिया का सुदृढ़ीकरण
तमिलनाडु संरक्षण के हित जमाकर्ता अधिनियम (TNPID), 1997 के तहत दर्ज मामलों के त्वरित निपटान के लिए, सरकार ने सभी जिलों में जिला राजस्व अधिकारियों (DROs) को सक्षम प्राधिकारी के रूप में नामित किया है। इसके अतिरिक्त, एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि जिन मामलों में डिफॉल्ट राशि ₹10 करोड़ से अधिक है, वहां आर्थिक अपराध शाखा (EoW) के ज़ोनल पुलिस अधीक्षक को सक्षम प्राधिकारी नियुक्त किया गया है।
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह प्रशासनिक बदलाव न केवल DROs के कार्यभार को कम करेगा, बल्कि संपत्ति की कुर्की, नीलामी और अंततः प्रभावित निवेशकों को मुआवजे के वितरण की प्रक्रिया को भी काफी गति प्रदान करेगा।
यह नई SOP वित्तीय अपराधियों के खिलाफ राज्य की जीरो-टोलरेंस नीति को मजबूत करती है और पीड़ितों के लिए न्याय को सुलभ बनाती है।
हालिया आंकड़े और कार्रवाई
गृह विभाग के नीति नोट के अनुसार, समीक्षा अवधि (1 जनवरी से 31 जुलाई) के दौरान TNPID अधिनियम और अनियंत्रित जमा योजना प्रतिबंध अधिनियम, 2019 के तहत 26 नए मामले दर्ज किए गए। इस दौरान ₹67.54 करोड़ से जुड़ी 1,177 शिकायतें प्राप्त हुईं। पुलिस ने इस संबंध में 54 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ₹136.71 करोड़ की संपत्ति की पहचान की गई थी, जबकि ₹99.95 करोड़ की संपत्ति की कुर्की के लिए सरकारी आदेश जारी किए गए। सरकार ने अब तक अदालतों और DROs के माध्यम से 2,224 प्रभावित निवेशकों को ₹23.53 करोड़ का मुआवजा वितरित किया है।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग और जांच
फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए सरकार ने 25 लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी किए हैं। उल्लेखनीय है कि इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के माध्यम से एक आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता मिली है। इससे पता चलता है कि राज्य सरकार अब वित्तीय अपराधियों को पकड़ने के लिए वैश्विक नेटवर्क का उपयोग कर रही है।
Frequently Asked Questions
1. नई SOP का मुख्य लाभ क्या है?
इसका मुख्य लाभ संपत्ति की कुर्की और नीलामी की प्रक्रिया में तेजी लाना है, जिससे निवेशकों को उनका पैसा जल्दी वापस मिल सके।
2. ₹10 करोड़ से अधिक के मामलों को कौन संभालेगा?
इन बड़े मामलों में आर्थिक अपराध शाखा (EoW) के ज़ोनल पुलिस अधीक्षक को सक्षम प्राधिकारी बनाया गया है।