तिरुवरूर जिले के विष्णुपुरम में IIT मद्रास के पूर्व छात्रों ने एक अभिनव फ्लोटिंग सोलर पंपिंग सिस्टम स्थापित किया है। यह तकनीक भूजल के अति-दोहन को रोककर मिट्टी की लवणता को कम करने और सिंचाई को टिकाऊ बनाने में मदद करेगी।
- 20 kWp क्षमता का फ्लोटिंग सोलर पंपिंग सिस्टम स्थापित, जो 20 एकड़ भूमि की सिंचाई करेगा।
- भूजल के बजाय सतह के पानी का उपयोग कर एक्विफर्स (aquifers) को बचाने और खारेपन को रोकने का लक्ष्य।
- IIT मद्रास एलुमनाई एसोसिएशन के SIAG और WHEELS ग्लोबल फाउंडेशन द्वारा समर्थित पहल।
तमिलनाडु के तिरुवरूर जिले के विष्णुपुरम में कृषि क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत हुई है। IIT मद्रास के पूर्व छात्रों के एक समूह ने मिलकर धर्मकुलम तालाब में 20 kWp क्षमता का एक फ्लोटिंग सोलर वॉटर पंपिंग सिस्टम चालू किया है। यह परियोजना न केवल सिंचाई की समस्या को हल करती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।
इस प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पूरी तरह से तालाब के सतही जल पर निर्भर है, जिससे किसानों को बोरवेल और महंगी बिजली की आवश्यकता नहीं होगी। यह सिस्टम लगभग 20 एकड़ भूमि को सिंचित करने में सक्षम है। इस पहल का नेतृत्व Societal Impact Action Group (SIAG) द्वारा किया जा रहा है, जिसे WHEELS ग्लोबल फाउंडेशन द्वारा वित्तपोषित किया गया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह परियोजना 'सीड मल्टीप्लायर कैपिटल' मॉडल पर आधारित है। इसका अर्थ है कि एक बार का परोपकारी निवेश संपत्ति का निर्माण करता है, और उससे होने वाली बचत का उपयोग अगले गांवों में इस मॉडल को दोहराने के लिए किया जाता है। विष्णुपुरम 2030 तक स्थापित किए जाने वाले पांच मॉडल गांवों में से पहला है।
कावेरी डेल्टा क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से भूजल के अत्यधिक दोहन के कारण पानी खारा (saline) होता जा रहा है। जब मेट्टूर बांध से पानी छोड़ा जाता है, तो यह सोलर पंप सतही जल का उपयोग करेगा, जिससे जमीन के नीचे के जल स्रोतों पर दबाव कम होगा और मिट्टी की उर्वरता बनी रहेगी।
सतही जल के उपयोग और सौर ऊर्जा के एकीकरण से हम कृषि को जलवायु-लचीला बना सकते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।
इस परियोजना के साथ-साथ, गांव में अमृतेश्वरी गो-सेवा और रिसर्च फाउंडेशन द्वारा एक गोबर-गैस और जैविक उर्वरक संयंत्र भी लगाया गया है। यह संयंत्र प्रतिदिन 2,000 लीटर प्राकृतिक तरल उर्वरक का उत्पादन करता है, जिससे किसानों की लागत आधी हो जाती है और पैदावार में 20-25% की वृद्धि होती है।
| विशेषता | पारंपरिक सिंचाई (बोरवेल) | फ्लोटिंग सोलर पंपिंग |
|---|---|---|
| ऊर्जा स्रोत | ग्रिड बिजली/डीजल | सौर ऊर्जा (मुफ्त) |
| जल स्रोत | भूजल (Groundwater) | सतही जल (Surface Water) |
| पर्यावरणीय प्रभाव | जल स्तर में गिरावट/खारापन | एक्विफर संरक्षण/वाष्पीकरण में कमी |
Frequently Asked Questions
1. फ्लोटिंग सोलर पंप कैसे काम करता है?
यह तालाब की सतह पर तैरते सोलर पैनलों का उपयोग करता है जो सूर्य की रोशनी को बिजली में बदलते हैं, जिससे पंप चलता है और पानी खेतों तक पहुँचता है।
2. इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य भूजल के अति-दोहन को रोकना, मिट्टी के खारेपन को कम करना और किसानों के लिए सिंचाई की लागत को शून्य करना है।