अल नीनो के कारण सूखे और निजी डेयरी कंपनियों द्वारा दी जाने वाली अधिक कीमतों के चलते आविन (Aavin) के दूध उत्पादन में भारी गिरावट आई है। किसानों के लिए पानी की कमी और कम मुनाफा दोनों बड़ी चुनौतियां बन गए हैं।
- अल नीनो के कारण सूखे की स्थिति ने पशुओं के लिए पानी की उपलब्धता को कम कर दिया है।
- आविन ₹38 प्रति लीटर दे रहा है, जबकि निजी कंपनियां ₹43 प्रति लीटर का भुगतान कर रही हैं।
- निजी डेयरी कंपनियां सख्त गुणवत्ता मानकों के बिना भी दूध स्वीकार कर रही हैं।
- तमिलनाडु सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ की दैनिक खरीद 38 लाख लीटर से गिरकर 28 लाख लीटर रह गई है।
तमिलनाडु सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड, जो 'आविन' (Aavin) ब्रांड के तहत दूध का विपणन करता है, वर्तमान में दूध की खरीद में भारी गिरावट के कारण एक कठिन दौर से गुजर रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, संघ की दैनिक औसत खरीद जो पहले 38 लाख लीटर थी, फरवरी तक गिरकर 32 लाख लीटर और अब मात्र 28 लाख लीटर रह गई है। इस कमी के कारण संघ को दैनिक बिक्री के लिए एजेंटों को दी जाने वाली आपूर्ति में कटौती करनी पड़ी है।
सूखे और अल नीनो का दोहरा संकट
दूध की इस कमी का एक प्रमुख कारण अल नीनो (El Nino) का प्रभाव है। तिरुचि, अरियालुर और पेराम्बालुर जिलों में पिछले पांच महीनों से जल निकायों के सूखने के कारण किसान अपने दुधारू पशुओं को पानी पिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। भीषण गर्मी और सूखे ने न केवल पशुओं के स्वास्थ्य को प्रभावित किया है, बल्कि दूध उत्पादन को भी सीधे तौर पर कम कर दिया है।
क्यों यह महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह संकट केवल आपूर्ति की कमी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सहकारी मॉडल बनाम निजी मॉडल के बीच के संघर्ष को भी दर्शाता है। जब सरकारी संस्थाएं गुणवत्ता के कड़े मानकों का पालन करती हैं, तो वे अक्सर बाजार की प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाती हैं, जिससे भविष्य में खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ताओं के लिए दूध की कीमतों पर असर पड़ सकता है।
बढ़ती गर्मी और कम मुनाफे के कारण किसान अब सहकारी समितियों के बजाय निजी कंपनियों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो गुणवत्ता मानकों की अनदेखी करती हैं।
बाजार में प्रतिस्पर्धा का एक अन्य पहलू मूल्य निर्धारण है। जहाँ आविन उच्च गुणवत्ता वाला दूध ₹38 प्रति लीटर की दर से उपलब्ध कराता है, वहीं निजी खिलाड़ी ₹43 प्रति लीटर तक का भुगतान कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, निजी कंपनियां बिना किसी सख्त गुणवत्ता जांच के दूध स्वीकार कर लेती हैं, जो किसानों के लिए एक आसान और अधिक लाभदायक विकल्प बन जाता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
सहकारी दुग्ध आंदोलन का उद्देश्य किसानों को उचित मूल्य दिलाना और उपभोक्ताओं को शुद्ध दूध उपलब्ध कराना था। हालांकि, हाल के वर्षों में निजी क्षेत्र के आक्रामक विस्तार और जलवायु परिवर्तन (जैसे अल नीनो) ने इन सहकारी ढांचों की स्थिरता को गंभीर चुनौती दी है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: आविन की दूध आपूर्ति क्यों कम हो रही है?
उत्तर: अल नीनो के कारण सूखे और निजी कंपनियों द्वारा दी जाने वाली अधिक कीमतों के कारण दूध की आपूर्ति कम हो रही है।
प्रश्न 2: निजी डेयरी कंपनियां आविन से अलग कैसे हैं?
उत्तर: निजी कंपनियां आविन की तुलना में प्रति लीटर ₹5 अधिक देती हैं और वे दूध की गुणवत्ता के सख्त मानकों का पालन नहीं करती हैं।