2024 में शुरू हुई लड़की बहिन योजना ने मराठवाड़ा की किसान विधवाओं को वित्तीय सहारा दिया, पर चुनाव के बाद लाखों लाभार्थियों को हटाने से उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ गई। इस परिवर्तन ने ग्रामीण महिलाओं के भविष्य को अनिश्चित बना दिया है।

मुख्य बिंदु

  • लड़की बहिन योजना ने 2024 में 2.4 करोड़ महिलाओं को ₹1,500 मासिक सहायता दी।
  • सरकार ने 92 लाख लाभार्थियों को हटाया, जिससे 38% कवरेज घट गया।
  • विधवा किसानों के लिए यह सहायता अब अनिश्चितता और आर्थिक तनाव का कारण बन रही है।

मराठवाड़ा के धाराशिव जिले के खेरडा गाँव में, विधवा मनिषा जाधव ने अपने खेतों में काम करते हुए चोटिल पैर से बैठकर सरकारी सहायता के भविष्य पर चर्चा की। यह गाँव वह जगह है जहाँ मुख्यमंत्री मेरी लड़की बहिन योजना की पहली मीटिंग आयोजित हुई थी, जो राज्य के 2.4 करोड़ कमजोर महिलाओं को प्रतिमाह ₹1,500 सीधे उनके खातों में भेजती थी।

योजना का लक्ष्य कृषि‑परिवारों की वित्तीय स्थिरता को बढ़ावा देना था, पर चुनाव के बाद राज्य ने नई मानदंडों के तहत लाभार्थियों को हटाना शुरू किया। स्थानीय सक्रियकारों के अनुसार, अब तक 92 लाख महिलाएँ सूची से बाहर कर दी गई हैं, जिससे योजना की पहुंच 38% तक घट गई है।

मनिषा के अनुसार, “हमारे घर का मासिक खर्च लगभग ₹3,000‑₹4,000 है; यदि यह ₹1,500 बंद हो गया तो जीवनयापन बहुत कठिन हो जाएगा।” वह दो एकड़ सूखा जमीन पर सोयाबीन की खेती करती हैं, पर अनियमित वर्षा और बाजार की उतार‑चढ़ाव उसके आय को लगातार खतरे में डालते हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 1970 के दशक से मराठवाड़ा में जलसंकट और असमान वर्षा ने कृषि उत्पादन को प्रभावित किया है। गोदावरी के उपनदियों का बहाव अक्सर सूखा रहता है, जिससे किसानों को मोनोसून पर अत्यधिक निर्भर रहना पड़ता है। इस जलसंकट ने पहले कई सामाजिक भत्तों की शुरुआत को प्रेरित किया, पर उनका स्थायित्व हमेशा राजनीतिक इच्छाशक्ति पर निर्भर रहा है।

क्यों यह महत्वपूर्ण है

BozokMedia analysis shows that the abrupt removal of beneficiaries not only undermines the credibility of welfare schemes but also exacerbates gender‑based economic vulnerability in drought‑prone regions. Without reliable cash transfers, widowed farmers face heightened risk of debt, land loss, and mental health crises.

“वित्तीय सुरक्षा के बिना, ग्रामीण महिलाएँ सामाजिक असुरक्षा के चक्र में फँस जाती हैं,” कहती हैं सामाजिक सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. स्वाती पाटिल।
Did You Know?: मराठवाड़ा में 2024‑2026 के बीच 1,500 से अधिक किसान आत्महत्या मामलों की रिपोर्ट हुई, जो राष्ट्रीय औसत से दो गुना अधिक है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: क्या हटाए गए लाभार्थियों को पुनः सूची में शामिल किया जा सकता है?
उत्तर: वर्तमान में राज्य सरकार ने पुनः नामांकन के स्पष्ट मानदंड नहीं दिए हैं; लाभार्थियों को स्थानीय अधिकारियों के माध्यम से अपील करनी होगी।

प्रश्न 2: योजना में बदलाव का मुख्य कारण क्या बताया गया है?
उत्तर: सरकार ने कहा है कि “समानता और दुरुपयोग रोकने” के उद्देश्य से कुछ वर्गों (सरकारी कर्मचारी, करदाता, अन्य कल्याण योजनाओं के लाभार्थी) को बाहर किया गया है।