संयुक्त राज्य में नई इमीग्रेशन नियम के तहत, H‑1B और L‑1 वीज़ा के विस्तार की फीस 9 सितंबर से बढ़ेगी। यह बदलाव नियोक्ताओं और भारतीय पेशेवरों दोनों पर वित्तीय दबाव डाल सकता है।
मुख्य बिंदु
- नई फीस 9 सितंबर से लागू
- नियोक्ता अतिरिक्त शुल्क उठाएगा
- भारतीय पेशेवरों को उच्च लागत का सामना
संयुक्त राज्य सरकार ने H‑1B और L‑1 वीज़ा विस्तार के लिए नई शुल्क संरचना घोषित की है, जो 9 सितंबर, 2024 से प्रभावी होगी। इस परिवर्तन में मौजूदा फीस में लगभग 30 % की वृद्धि शामिल है, जिससे कंपनियों और विदेशी कार्यकर्ताओं दोनों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा।
नए नियम के अनुसार, बेस फ़ीस $2,500 से बढ़कर $3,500 हो जाएगी, जबकि प्रीमियम फ़ीस $1,500 से $2,200 तक बढ़ेगी। यह परिवर्तन नियोक्ताओं को अतिरिक्त लागत उठाने के लिए मजबूर करेगा, जबकि कई भारतीय पेशेवर उच्च वेतन या कम लाभ के साथ समझौता करने को दबाव में रह सकते हैं।
| फीस प्रकार | पहले | नया |
|---|---|---|
| बेस फ़ीस | $2,500 | $3,500 |
| प्रीमियम फ़ीस | $1,500 | $2,200 |
| सुरक्षा फ़ीस | $500 | $800 |
ऐतिहासिक रूप से, 60‑दिन की नौकरी खोज अवधि को भारतीय पेशेवरों को नौकरी खोने के बाद एक सुरक्षा जाल माना जाता था। इस अवधि को समाप्त करने की चर्चा पहले भी हुई थी, लेकिन नई लागत संरचना के साथ यह मुद्दा फिर से उभरा है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that increased visa costs could deter U.S. firms from hiring Indian talent, potentially shifting the global tech talent pipeline toward regions with lower immigration barriers.
"यह बदलाव भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मकता को कमजोर कर सकता है," कहा immigration विशेषज्ञ डॉ. अनीता शर्मा।
Frequently Asked Questions
- क्या नियोक्ता नई फीस का पूरा भुगतान करेगा?
- क्या यह परिवर्तन 60‑दिन की नौकरी खोज अवधि को प्रभावित करेगा?