अम्मा मक्कल मुन्नेत्रा कज़हग (एएमएमके) के महासचिव टी.टी.वी. डिहनकारन ने एआईएडीएमके के वरिष्ठ विद्रोही नेताओं से पार्टी के आंतरिक मामलों पर सार्वजनिक टिप्पणी न करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, यदि ऐसा हुआ तो यह उनके ख़िलाफ़ बूमरैंग हो सकता है।
- डिहनकारन ने एआईएडीएमके के विद्रोही नेताओं को सार्वजनिक टिप्पणी से रोकने को कहा
- पार्टी के आंतरिक मतभेदों को बाहर लाने से बूमरैंग प्रभाव का जोखिम
- पार्टी के भीतर पदस्थापना और भविष्य की रणनीति पर तनाव जारी
टी.टी.वी. डिहनकारन, अम्मा मक्कल मुन्नेत्रा कज़हग (एएमएमके) के महासचिव, ने थंजावूर में पत्रकारों से कहा कि एआईएडीएमके के वरिष्ठ विद्रोही कार्यकारियों—एस.पी. वेलुमनी, सी.वे. शन्मुग़म और नाथम आर. विश्वनाथन—को पार्टी के आंतरिक मामलों पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी, “नहीं तो यह उनके ऊपर बूमरैंग होगा।”
यह मांग उन नेताओं से उत्पन्न हुई है जिन्होंने मध्य‑मई में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा प्रस्तावित ट्रस्ट मोशन के दौरान पार्टी की पंक्ति के विरुद्ध वोट किया था, जिससे उन्हें पदों से हटाया गया। डिहनकारन ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर एआईएडीएमके के महासचिव एडप्पाड़ी के. पालयनस्वामी से चर्चा की, जिन्होंने कहा कि विद्रोहियों को उनके पुराने पदों पर पुनर्स्थापित करना उचित नहीं होगा, क्योंकि इससे नये पदधारियों में असंतोष बढ़ेगा।
डिहनकारन ने यह स्पष्ट किया कि उनका पालयनस्वामी के पक्ष में समर्थन कोई राजनीतिक मोटीव नहीं रखता। उन्होंने राजस्व मंत्री के.ए. सेंघोट्टययन की भी आलोचना की, जो पिछले नवंबर तक एआईएडीएमके के साथ थे, और द्रविड़ प्रमुख के भविष्य को लेकर नकारात्मक टिप्पणी करने का आरोप लगाया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने तमिलगा वेत्री कज़हग (टीवीके) के शासन को भी निशाना बनाया, जिसने मुफ्त गैस सिलिंडर योजना के लिए वार्षिक आय सीमा निर्धारित की।
डिहनकारन ने कहा, “मुख्य मंत्री और टीवीके के नेता सी. जोसेफ विजय को चुनावी प्रचार के दौरान ही पात्रता शर्तें स्पष्ट करनी चाहिए थी।” यह टिप्पणी तमिलनाडु की राजनीति में चल रहे गठबंधन और संघर्ष की जटिलताओं को उजागर करती है।
Historical Background
एआईएडीएमके 1972 में एम. जी. रामचंद्रन द्वारा स्थापित एक प्रमुख द्रविड़ पार्टी है। 2017 में पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के निधन के बाद, पार्टी के भीतर शक्ति संघर्ष तेज़ हो गया, जिससे दो प्रमुख धड़े—एडप्पाड़ी क. पालयनस्वामी और वी.के. स्त्रीकनन—के बीच विभाजन हुआ। इस विभाजन से एएमएमके जैसी नई राजनीतिक इकाइयों की उभरत हुई, जो अब एआईएडीएमके के भीतर विद्रोहियों को संगठित कर रही हैं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the public sparring between former allies could destabilize the ruling coalition in Tamil Nadu, potentially influencing upcoming legislative elections and reshaping the Dravidian political landscape.
"यदि विद्रोही नेताओं की सार्वजनिक टिप्पणियां जारी रहती हैं, तो यह एआईएडीएमके की वैधता को गंभीर रूप से क्षति पहुँचा सकती है," राजनीतिक विश्लेषक डॉ. रवींद्रन ने कहा।
Frequently Asked Questions
Q1: क्या एआईएडीएमके के विद्रोही नेता अब भी पार्टी में मौजूद हैं?
यहाँ तक कि वे आधिकारिक तौर पर हटाए जा चुके हैं, लेकिन वे अभी भी अपने समर्थकों के साथ पार्टी के भीतर प्रभाव बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।
Q2: डिहनकारन का इस मुद्दे पर क्या लक्ष्य है?
डिहनकारन का लक्ष्य एआईएडीएमके के भीतर सार्वजनिक विभाजन को रोकना और अपनी पार्टी (एएमएमके) की राजनैतिक स्थिति को सुदृढ़ करना है।