केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि सरकार उपयोग‑आधारित बीमा मॉडल पर काम कर रही है, जिससे अच्छी ड्राइविंग करने वाले वाहन मालिकों को कम प्रीमियम मिलेगा। इस कदम से दुर्घटना दर घटाने और डिजिटल इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने की उम्मीद है।

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  • उपयोग‑आधारित बीमा से सुरक्षित ड्राइवरों को कम प्रीमियम मिलेगा
  • रैश ड्राइविंग पर सख्त पेनल्टी की संभावना
  • डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ एक कनेक्टेड इकोसिस्टम तैयार हो रहा है

सरकार की नई दिशा

नई दिल्ली – 12 सितंबर 2026 को मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने उपयोग‑आधारित बीमा (Usage‑Based Insurance) पर सरकार की कार्यवाही का खुलासा किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सुरक्षित ड्राइविंग को प्रोत्साहित करना और बीमा प्रीमियम को ड्राइवर के व्यवहार के आधार पर तय करना है।

उपयोग‑आधारित बीमा क्या है?

इस मॉडल में बीमा कंपनी वाहन के टेलीमैटिक्स डेटा (जैसे गति, ब्रेकिंग, कोना लेना) को रीयल‑टाइम में मॉनिटर करती है। जो चालक नियमों का पालन करता है और रैश ड्राइविंग नहीं करता, उन्हें कम प्रीमियम दिया जाएगा, जबकि उल्लंघन करने वालों पर अतिरिक्त पेनल्टी लगेगी। यह प्रणाली भारत के मौजूदा डिजिटल बुनियादी ढाँचे – यूपीआई, आधार, फास्टैग – के साथ सहज रूप से जुड़ने के लिए डिज़ाइन की गई है।

दुर्घटनाओं में कमी की आशा

गडकरी ने बताया कि हर साल लगभग 5 लाख सड़क दुर्घटनाएँ होती हैं, जिनमें 1.8 लाख मौतें होती हैं। इन आंकड़ों में 66% मौतें 18‑36 वर्ष के युवा वर्ग की हैं। उपयोग‑आधारित बीमा के माध्यम से ड्राइवरों को सुरक्षित व्यवहार अपनाने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन मिल सकता है, जिससे भविष्य में दुर्घटनाओं की संख्या घटने की उम्मीद है।

डिजिटल इकोसिस्टम का विस्तार

मंत्री ने कहा, भारत के पास मजबूत डिजिटल फाउंडेशन है – यूपीआई भुगतान, आधार पहचान, फास्टैग टोलिंग, और वाहन रजिस्ट्री। अगला कदम इन सभी को एक साथ जोड़कर एक "इंटेलिजेंट मोबिलिटी" प्लेटफ़ॉर्म बनाना है। इस दिशा में "वनटैग" सेवा की शुरुआत की गई है, जिससे फास्टैग को मोबाइल नंबर की तरह एक बैंक से दूसरे में पोर्ट किया जा सकेगा।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में बीमा प्रीमियम का निर्धारण पारंपरिक तौर पर वाहन के मॉडल, उम्र और पॉलिसी की अवधि पर आधारित रहा है। 2000 के दशक में टेलीमैटिक्स‑आधारित बीमा का प्रयोग कुछ प्रीमियम‑सेंसिटिव शहरों में सीमित रूप से हुआ, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर इसका कोई व्यापक कार्यान्वयन नहीं हुआ। गडकरी की नई योजना इस अंतर को पाटने का प्रयास है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that tying insurance costs to driver behavior not only incentivizes safer roads but also creates a massive data pool for insurers and policymakers, potentially reshaping India’s automotive risk landscape for the next decade.

"डेटा‑ड्रिवेन बीमा मॉडल से न केवल बीमा लागत घटेगी, बल्कि रोड सुरक्षा में भी क्रांतिकारी बदलाव आएगा," कहा गया है एक मोटर इंश्योरेंस विशेषज्ञ ने।
Did You Know?: विश्व में पहले टेलीमैटिक्स‑आधारित बीमा 1990 के दशक में यूरोप में शुरू हुआ था, लेकिन भारत में इसका व्यापक प्रयोग अभी शुरू ही हुआ है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: उपयोग‑आधारित बीमा के लिए कौन‑से डेटा को ट्रैक किया जाएगा?

उत्तर: गति, ब्रेकिंग, तेज़ी से कोना लेना, और कुल चलाए गए किलोमीटर जैसे टेलीमैटिक्स पैरामीटर।

प्रश्न 2: क्या मौजूदा बीमा पॉलिसी को इस नई प्रणाली में स्विच करना आसान होगा?

उत्तर: सरकार ने बताया है कि मौजूदा पॉलिसीधारकों को स्विच करने के लिए एक सरल ऑनलाइन पोर्टल उपलब्ध कराया जाएगा।