IIT मद्रास ने स्पार्क मिन्डा फाउंडेशन के साथ ‘कदम’ नामक नवीन प्रोस्थेटिक घुटने की तकनीक को लाइसेंस करने के लिए समझौता किया। यह साझेदारी 2030 तक 50,000 से अधिक प्रोस्थेटिक लिंब फिटमेंट का लक्ष्य रखती है।

  • IIT मद्रास‑स्पार्क मिन्डा ने ‘कदम’ प्रोस्थेटिक घुटना लाइसेंस किया
  • असमतल सतह पर चलने के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया
  • 2030 तक 50,000 लिंब फिटमेंट का लक्ष्य

IIT मद्रास और स्पार्क मिन्डा फाउंडेशन ने एक गैर‑विशेषाधिकार तकनीकी लाइसेंस समझौता किया है, जिससे ‘कदम’ नामक अभिनव प्रोस्थेटिक घुटना व्यापक रूप से उपलब्ध होगा। यह घुटना असमान भूभाग पर चलने की क्षमता को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है, जिससे अंगविक्षत लोगों की गतिशीलता में उल्लेखनीय सुधार होगा।

समझौते की औपचारिक घोषणा 12 सितंबर 2026 को चेन्नई में हुई, जहाँ स्पार्क मिन्डा की चेयरपर्सन सरिका मिन्डा, समूह के सीटीओ डी. सुरेश और IIT मद्रास के राष्ट्रीय सहायक स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी केंद्र की प्रमुख सुजाता श्रीनिवासन मौजूद थे। दोनों पक्ष इस तकनीक को शोध‑विकास से व्यावहारिक उपयोग तक ले जाने के लिए सहयोग करेंगे।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में प्रोस्थेटिक तकनीक का विकास पिछले दो दशकों में तेज़ी से हुआ है। 2000 के दशक में आयातित प्रोस्थेटिक उपकरणों पर निर्भरता अधिक थी, जबकि पिछले पाँच वर्षों में कई विश्वविद्यालय‑उद्यमी साझेदारियों ने स्वदेशी समाधान प्रस्तुत किए हैं। IIT मद्रास ने पहले भी ‘स्मार्ट‑लीग’ और ‘अडैप्टिव‑आर्म’ जैसे प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक लागू किया है, जो इस नई पहल की नींव बनाते हैं।

साझेदारी के मुख्य बिंदु

स्पार्क मिन्डा फाउंडेशन 2030 तक 50,000 प्रोस्थेटिक लिंब फिट करने का लक्ष्य रखता है। यह लक्ष्य न केवल भारतीय बाजार में बल्कि एशिया‑प्रशांत क्षेत्र में भी प्रतिस्पर्धी बने रहने की रणनीति का हिस्सा है। लाइसेंस समझौता दोनों संस्थाओं को तकनीकी सहयोग, उत्पादन स्केल‑अप और उपयोगकर्ता प्रशिक्षण में सहयोग प्रदान करेगा।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that indigenous prosthetic solutions like ‘Kadam’ can reduce dependence on costly imports, creating a ripple effect on healthcare affordability and local manufacturing jobs across South India.

"‘कदम’ का सफलतापूर्ण स्केल‑अप भारत को विश्व प्रोस्थेटिक मार्केट में एक प्रमुख खिलाड़ी बना सकता है," प्रोस्थेटिक विशेषज्ञ डॉ. अजय वर्मा ने कहा।
Did You Know?: भारत में केवल 10 % प्रोस्थेटिक उपयोगकर्ताओं को ही उचित फिटमेंट मिल पाती है, जबकि विश्व स्तर पर यह दर 70 % से अधिक है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: ‘कदम’ घुटना अन्य प्रोस्थेटिक घुटनों से कैसे अलग है?
**उत्तर:** यह असमान सतह पर स्थिरता और ऊर्जा वापसी के लिए विशेष मैकेनिज़्म का उपयोग करता है, जिससे चलना अधिक सहज होता है।

प्रश्न 2: इस तकनीक का लागत प्रभाव क्या है?
**उत्तर:** स्थानीय उत्पादन और लाइसेंसिंग मॉडल के कारण, आयातित विकल्पों की तुलना में 30 % तक लागत घटाने की उम्मीद है।