दुनिया भर में चीनी की कीमतों में भारी वृद्धि देखी जा रही है, जिसके पीछे ब्राजील का इथेनॉल की ओर झुकाव और प्रतिकूल मौसम प्रमुख कारण हैं। भारत में भी गन्ने की फसल को बीमारियों और भारी बारिश ने नुकसान पहुंचाया है।
- ब्राजील में चीनी उत्पादन में 43 मिलियन टन की कमी आने का अनुमान है।
- भारत में गन्ने की फसल रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों से प्रभावित है।
- कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण ब्राजील चीनी के बजाय इथेनॉल बनाने पर ध्यान दे रहा है।
- एल नीनो के प्रभाव से थाईलैंड और भारत जैसे देशों में उत्पादन पर संकट मंडरा रहा है।
दुनियाभर के बाजारों में चीनी की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है, जिससे न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर चीनी का संकट गहराता जा रहा है। इस संकट के पीछे सबसे बड़ा कारण दुनिया के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक देश, ब्राजील की बदलती नीतियां और प्रतिकूल मौसम है। ब्राजील अपनी गन्ने की फसल को चीनी के बजाय इथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ रहा है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है।
क्यों बढ़ रही हैं चीनी की कीमतें?
विशेषज्ञों के अनुसार, चीनी की कीमतों में इस बढ़ोतरी के पीछे कई जटिल कारक काम कर रहे हैं। भारत में, गन्ने की फसल को 'रेड रॉट' (लाल सड़न) और 'टॉप बोरर' जैसे रोगों ने काफी नुकसान पहुंचाया है। इसके अलावा, समय से पहले हुई अत्यधिक बारिश और जलभराव ने भी पैदावार को प्रभावित किया है। सरकार का अनुमान है कि इस सीजन में उत्पादन लगभग 306 लाख मीट्रिक टन (LMT) रहने की उम्मीद है, जो शुरुआती अनुमान 343 LMT से काफी कम है।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और इथेनॉल मिश्रण की अनिवार्य दरों में वृद्धि, चीनी उत्पादन को ईंधन उत्पादन की ओर धकेल रही है।
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि ब्राजील ने जुलाई के अंत में अनिवार्य इथेनॉल मिश्रण की दर को बढ़ाकर 32% कर दिया है। इससे चीनी की उपलब्धता में और कमी आएगी। ब्राजील दुनिया का 24% गन्ना उत्पादन करता है, और वहां उत्पादन में 3% की संभावित कटौती पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है।
एल नीनो का वैश्विक प्रभाव
मौसम का मिजाज भी इस संकट को और गंभीर बना रहा है। एल नीनो के कारण ब्राजील के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में तापमान में वृद्धि और बारिश में देरी देखी जा रही है। वहीं, थाईलैंड, जो दुनिया के कुल गन्ना उत्पादन का 6% हिस्सा बनाता है, वहां भी मौसम की मार पड़ने की आशंका है। अमेरिकी कमोडिटी बाजार में चीनी वायदा कीमतें पहले ही 17 सेंट प्रति पाउंड के स्तर को पार कर चुकी हैं।
| देश | गन्ना उत्पादन हिस्सेदारी | मुख्य संकट का कारण |
|---|---|---|
| ब्राजील | 24% | इथेनॉल उत्पादन और एल नीनो |
| भारत | 16% | रोग (Red Rot) और भारी बारिश |
| थाईलैंड | 6% | एल नीनो और कम बारिश |
आने वाले समय में 2026/27 और 2027/28 के लिए वैश्विक चीनी की कमी के अनुमानों को बढ़ा दिया गया है। गन्ने और चुकंदर की कम बुवाई के कारण यह संकट लंबे समय तक बना रह सकता है।
Frequently Asked Questions
1. भारत में चीनी महंगी होने का मुख्य कारण क्या है?
भारत में गन्ने की फसल में बीमारियां और अत्यधिक बारिश के कारण उत्पादन में कमी आई है, जिससे कीमतें बढ़ रही हैं।
2. ब्राजील चीनी के बजाय इथेनॉल क्यों बना रहा है?
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण इथेनॉल उत्पादन अधिक लाभदायक हो गया है, जिससे ब्राजील अपनी नीति बदल रहा है।