तिरुपुर के गारमेंट उद्योग में बढ़ते धागा मूल्यों के कारण संकट गहरा रहा है, जिसे सुलझाने के लिए 9 सितंबर को मिलों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। तमिलनाडु में धागे की कीमतें गुजरात की तुलना में काफी अधिक हैं, जिससे निर्यात प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो रही है।

  • 9 सितंबर को तिरुपुर टेक्सटाइल क्लस्टर और मिल संघों के बीच उच्च स्तरीय बैठक।
  • तमिलनाडु में सूती धागे की कीमतें गुजरात की तुलना में ₹18-₹20 प्रति किलोग्राम अधिक हैं।
  • भारत से चीन और वियतनाम को होने वाले धागे के निर्यात में भारी उछाल आया है।
  • कपास पर आयात शुल्क हटाने के लाभ का गारमेंट इकाइयों को नहीं मिल रहा है।

तिरुपुर, तमिलनाडु: भारत के प्रमुख गारमेंट हब, तिरुपुर में कपड़ा उद्योग एक बड़े संकट की ओर बढ़ रहा है। सूती धागे (Cotton Yarn) की आसमान छूती कीमतों ने गारमेंट निर्माताओं की नींद उड़ा दी है। इस मुद्दे के समाधान के लिए, तिरुपुर की नौ प्रमुख गारमेंट और जॉब वर्किंग एसोसिएशनों ने मिलकर 9 सितंबर को टेक्सटाइल मिल संघों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया है।

साउथ इंडिया होजरी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के सचिव, आर. धमाोधरन ने बताया कि गारमेंट उद्योग के लिए बढ़ता हुआ धागे का मूल्य एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है। हालांकि सरकार ने अक्टूबर तक कपास पर आयात शुल्क हटाने का निर्णय लिया है, लेकिन गारमेंट निर्माताओं का आरोप है कि इस राहत का लाभ उन्हें जमीनी स्तर पर नहीं मिल रहा है।

क्षेत्रीय कीमतों में भारी अंतर

बाजार के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर एक चौंकाने वाला अंतर सामने आया है। तमिलनाडु में निर्मित सूती धागे की कीमतें गुजरात की मिलों की तुलना में ₹18 से ₹20 प्रति किलोग्राम तक अधिक हैं। चूंकि तिरुपुर के गारमेंट निर्माता और फैब्रिक निर्माता मुख्य रूप से तमिलनाडु की मिलों से धागा खरीदते हैं, इसलिए उनकी उत्पादन लागत बढ़ जाती है। इसके विपरीत, गुजरात की मिलें मुख्य रूप से निर्यात पर ध्यान केंद्रित करती हैं, जिससे वहां प्रतिस्पर्धात्मक लाभ बना रहता है।

बढ़ती लागत और निर्यात में उछाल के बीच, भारतीय गारमेंट उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता खतरे में है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल स्थानीय समस्या नहीं है, बल्कि इसका वैश्विक प्रभाव है। भारत से चीन और वियतनाम को होने वाले धागे के निर्यात में जबरदस्त वृद्धि देखी गई है। पिछले वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में चीन को ₹348 करोड़ का निर्यात हुआ था, जो इस वर्ष बढ़कर ₹1,668 करोड़ हो गया है। इसी तरह, वियतनाम को होने वाला निर्यात भी ₹263 करोड़ से बढ़कर ₹500 करोड़ तक पहुंच गया है।

जब घरेलू गारमेंट इकाइयां महंगे कच्चे माल से जूझ रही होती हैं और धागा निर्यात में भारी वृद्धि हो रही होती है, तो यह भारतीय तैयार कपड़ों (Ready-made garments) के निर्यात को सीधे नुकसान पहुंचाता है।

क्षेत्रधागे की कीमत का अंतर (प्रति किग्रा)मुख्य फोकस
तमिलनाडु (तिरुपुर क्लस्टर)₹18 - ₹20 अधिकघरेलू गारमेंट निर्माण
गुजरात (मिल क्लस्टर)कम लागत / प्रतिस्पर्धीवैश्विक निर्यात
Did You Know?: तिरुपुर को अक्सर 'भारत का गारमेंट हब' कहा जाता है, जो दुनिया भर में कपड़ों के निर्यात में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

Frequently Asked Questions

1. तिरुपुर के गारमेंट निर्माता किस बात से परेशान हैं?
वे मुख्य रूप से सूती धागे की बढ़ती कीमतों और स्थानीय मिलों द्वारा दी जाने वाली उच्च दरों से परेशान हैं।

2. मिलों के साथ बैठक का उद्देश्य क्या है?
बैठक का उद्देश्य धागे की कीमतों पर चर्चा करना और केंद्र व राज्य सरकारों को साझा समाधान के लिए प्रतिनिधित्व करना है।