केरल उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए एक दंपत्ति को तब तक सरोगेसी प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति दी है जब तक कि पति 56 वर्ष का नहीं हो जाता। अदालत ने कहा कि कानूनी व्याख्या इतनी सख्त नहीं होनी चाहिए कि किसी के माता-पिता बनने के अधिकार को स्थायी रूप से छीन लिया जाए।

  • केरल उच्च न्यायालय ने सरोगेसी के लिए आयु सीमा की व्याख्या में मानवीय दृष्टिकोण अपनाया।
  • अदालत ने निर्णय दिया कि पति 56 वर्ष की आयु होने तक प्रक्रिया जारी रख सकता है।
  • कोर्ट ने कहा कि 'क्रायोप्रिजर्व्ड' भ्रूण के मामले में प्रक्रिया को रोकना अनुचित होगा।

केरल उच्च न्यायालय ने सरोगेसी के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मिसाल कायम करते हुए एक दंपत्ति को अपनी सरोगेसी प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति दी है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि पति की आयु 55 वर्ष हो चुकी है, तो भी वह 56 वर्ष की आयु होने तक सरोगेसी सेवाओं का लाभ उठा सकता है। यह निर्णय विशेष रूप से उन दंपत्तियों के लिए आशा की किरण है जो उम्र की सीमाओं के कारण कानूनी बाधाओं का सामना कर रहे हैं।

कानूनी व्याख्या और मानवीय संवेदना

न्यायमूर्ति हरिसंकर वी मेनन मामले की सुनवाई करते हुए उन्होंने कहा कि मातृत्व जीवन का एक गहरा व्यक्तिगत और मौलिक पहलू है। अदालत ने तर्क दिया कि कानून की ऐसी व्याख्या जो किसी व्यक्ति को माता-पिता बनने के अवसर से स्थायी रूप से वंचित कर दे, उसे बहुत सावधानी से देखा जाना चाहिए। यदि किसी कानूनी व्याख्या का परिणाम 'अपूरणीय क्षति' (irreversible loss) है, तो अदालत को उस पर गहन जांच करनी चाहिए।

BozokMedia विश्लेषण: क्यों यह निर्णय महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि यह फैसला सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 की व्याख्या को मानवीय आधार प्रदान करता है। अक्सर तकनीकी आयु सीमाएं उन लोगों के लिए बाधा बन जाती हैं जो चिकित्सा विज्ञान की मदद से परिवार शुरू करना चाहते हैं। न्यायालय ने 'राजिता पी वी' मामले के पिछले फैसले का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि आयु की सीमा का लाभ उस वर्ष के अंत तक मिलना चाहिए जब तक वह आयु प्राप्त न हो जाए।

कानूनी व्याख्या केवल एक अमूर्त अभ्यास नहीं है; इसके परिणाम सीधे लोगों के अधिकारों और जीवन को प्रभावित करते हैं।

मामले की पृष्ठभूमि में, कोल्लम के एक दंपत्ति ने याचिका दायर की थी। उनका भ्रूण 2022 में ही क्रायोप्रिजर्व (Cryopreserved) किया जा चुका था। जब पति 55 वर्ष का हो गया, तो सेवाओं को रोक दिया गया, जिसे चुनौती देते हुए दंपत्ति अदालत पहुंचे।

आयु सीमा का गणित: एक तुलना

श्रेणीअधिनियम की व्याख्यान्यायालय का आदेश
इच्छुक महिला23 से 50 वर्ष51 वर्ष होने तक पात्र
इच्छुक पुरुष55 वर्ष की सीमा56 वर्ष होने तक पात्र

अदालत ने यह भी माना कि चूंकि भ्रूण पहले से ही सुरक्षित है, इसलिए केवल आयु के आधार पर प्रक्रिया को रोकना न्यायसंगत नहीं है। न्यायालय ने याचिका को निपटाते हुए आदेश दिया कि दंपत्ति को 56 वर्ष की आयु तक सेवाएं प्रदान की जानी चाहिए।

Did You Know?: क्रायोप्रिजर्वेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें भ्रूण को अत्यधिक कम तापमान पर सुरक्षित रखा जाता है ताकि भविष्य में उसका उपयोग किया जा सके।

Frequently Asked Questions

1. क्या यह फैसला केवल इस दंपत्ति के लिए है?
यह फैसला इस विशिष्ट मामले के कानूनी सिद्धांतों पर आधारित है, जो भविष्य के समान मामलों के लिए एक मिसाल बन सकता है।

2. सरोगेसी अधिनियम 2021 क्या है?
यह भारत में सरोगेसी प्रक्रियाओं को विनियमित करने वाला कानून है, जो इच्छुक माता-पिता और सरोगेट मां के अधिकारों को निर्धारित करता है।