सुप्रीम कोर्ट ने अरावली विवाद पर रिपोर्ट सौंपने के लिए उच्चाधिकार प्राप्त समिति (HPC) की छह महीने की मोहलत मांग को खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सख्त लहजे में समिति को 30 नवंबर तक रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने अरावली विवाद पर उच्चाधिकार प्राप्त समिति (HPC) की 6 महीने की विस्तार याचिका खारिज कर दी।
  • CJI सूर्यकांत ने समिति को 30 नवंबर, 2026 तक रिपोर्ट सौंपने का सख्त निर्देश दिया।
  • अदालत ने समिति को 'दिन-रात काम करने' और यदि अक्षम हो तो नई समिति बनाने की चेतावनी दी।
  • समिति को राजस्थान और गुजरात के आदिवासी समुदायों के हितों को ध्यान में रखते हुए व्यापक परामर्श करने को कहा गया है।

नई दिल्ली: अरावली पर्वत श्रृंखलाओं के संरक्षण और उनकी परिभाषा को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सोमवार को सुनवाई के दौरान, मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने अरावली उच्चाधिकार प्राप्त समिति (HPC) द्वारा मांगी गई छह महीने की अतिरिक्त मोहलत को सिरे से खारिज कर दिया।

सुनवाई के दौरान एक तीखी टिप्पणी करते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा, "क्या वे मेरे रिटायर होने का इंतज़ार कर रहे हैं? उन्हें सीधे कहना चाहिए था कि मेरी सेवानिवृत्ति के बाद की तारीख दें।" अदालत ने स्पष्ट किया कि छह महीने का विस्तार देने का अर्थ यह होता कि रिपोर्ट फरवरी के अंत तक आती, जबकि CJI सूर्यकांत 9 फरवरी, 2027 को पदमुक्त होने जा रहे हैं।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि यह मामला केवल एक भौगोलिक परिभाषा का नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और बड़े पैमाने पर भूमि विकास के बीच के संघर्ष का है। अरावली की परिभाषा में बदलाव का सीधा असर दिल्ली-एनसीआर के पारिस्थितिकी तंत्र और राजस्थान एवं गुजरात के आदिवासी क्षेत्रों पर पड़ेगा। यदि रिपोर्ट में देरी होती है, तो अवैध निर्माण और खनन को रोकने के कानूनी प्रयास बाधित हो सकते हैं।

"समिति को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जो अनुमति योग्य है उसे अनुमति दी जाए और जो अनुमेय नहीं है उसे रोका जाए, ताकि पर्यावरण की सुरक्षा हो सके।" - CJI सूर्यकांत

अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी को निर्देश दिया कि समिति को अब दिन-रात काम करना होगा। बेंच ने चेतावनी दी कि यदि समिति रिपोर्ट सौंपने में असमर्थ है, तो अदालत नई समिति का गठन करने में संकोच नहीं करेगी। अदालत ने यह भी सुझाव दिया कि समिति विशिष्ट मुद्दों को अलग करते हुए एक अंतरिम रिपोर्ट जल्द से जल्द पेश करे।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

25 मई को सुप्रीम कोर्ट ने पांच सदस्यीय HPC का गठन किया था। इस समिति का मुख्य कार्य अरावली की परिभाषा की पुन: जांच करना है। विवाद तब शुरू हुआ जब एक पिछली बेंच ने सरकार द्वारा प्रस्तावित 100-मीटर ऊंचाई वाली परिभाषा को स्वीकार कर लिया था, जिससे विशेषज्ञों ने चिंता जताई कि इससे अरावली का संरक्षित क्षेत्र काफी छोटा हो जाएगा।

Did You Know?: अरावली पर्वत श्रृंखला दुनिया की सबसे पुरानी वलित पर्वत श्रृंखलाओं (Fold Mountains) में से एक है, जो उत्तर-पश्चिम भारत के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण 'ग्रीन वॉल' का कार्य करती है।

Frequently Asked Questions

1. HPC का मुख्य कार्य क्या है?
HPC का कार्य अरावली पहाड़ियों और श्रेणियों की भौगोलिक परिभाषा की समीक्षा करना है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि संरक्षण के दायरे को गलत तरीके से सीमित नहीं किया गया है।

2. अगली सुनवाई कब है?
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर को निर्धारित की है।