गुजरात हाई कोर्ट ने ₹51.22 लाख मूल्य की मेफेड्रोन तस्करी के आरोपी की जमानत याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि मुकदमे में देरी का लाभ नहीं उठाया जा सकता। अदालत ने कहा कि NDPS अधिनियम के तहत व्यावसायिक मात्रा के मामलों में जमानत एक अपवाद है।
- गुजरात हाई कोर्ट ने ₹51.22 लाख के ड्रग्स मामले में आरोपी बदरुद्दीन बांगडीवाला की जमानत याचिका खारिज की।
- अदालत ने कहा कि आरोपी मुकदमे में होने वाली देरी के लिए खुद जिम्मेदार हैं, इसलिए वे इसका लाभ नहीं उठा सकते।
- NDPS अधिनियम की धारा 37 के तहत व्यावसायिक मात्रा के मामलों में जमानत मिलना कठिन है।
- कोर्ट ने सूरत की ट्रायल कोर्ट को 10 सप्ताह के भीतर कार्यवाही पूरी करने का निर्देश दिया है।
गुजरात हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कानूनी टिप्पणी करते हुए कहा है कि मुकदमे में देरी को किसी भी आरोपी के लिए 'रामबाण' (panacea) नहीं माना जा सकता। अदालत ने ₹51.22 लाख मूल्य की मेफेड्रोन (Mephedrone) तस्करी के आरोपी बदरुद्दीन बांगडीवाला की चौथी जमानत याचिका को खारिज कर दिया है।
न्यायमूर्ति हसमुख डी. सुथार ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आरोपी उन देरी का लाभ नहीं उठा सकते हैं जिसमें उन्होंने स्वयं योगदान दिया है। बदरुद्दीन, जो मार्च 2024 से हिरासत में है, ने तर्क दिया था कि मुकदमे में हो रही देरी के कारण उसे जेल में रहना पड़ रहा है, लेकिन अदालत ने पाया कि आरोपी और उसके सह-आरोपियों ने ही कानूनी प्रक्रियाओं को लंबा खींचने के लिए विभिन्न आवेदन दायर किए थे।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला सूरत के भाटिया चेक पोस्ट से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, एक गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी के दौरान एक सिल्वर वर्ना कार को रोका गया था। पुलिस ने कार से 512.2 ग्राम मेफेड्रोन बरामद की थी, जिसकी बाजार में कीमत लगभग ₹51.22 लाख आंकी गई थी। आरोपी बदरुद्दीन बांगडीवाला इस तस्करी में मुख्य भूमिका में माना जा रहा है, जबकि मुख्य आपूर्तिकर्ता अभी भी फरार है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह निर्णय NDPS अधिनियम के तहत सख्त कानूनी मानदंडों को और मजबूत करता है। यह मामला इस बात की पुष्टि करता है कि गंभीर अपराधों में 'त्वरित सुनवाई' का अधिकार, धारा 37 के तहत निर्धारित 'दोहरी शर्तों' (twin conditions) को दरकिनार नहीं कर सकता। यह निर्णय भविष्य के उन मामलों के लिए एक मिसाल बनेगा जहां आरोपी मुकदमे की प्रक्रिया को बाधित करके जमानत प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
"मुकदमे में देरी का उपयोग गंभीर अपराधों में सजा से बचने के हथियार के रूप में नहीं किया जा सकता है।"
अदालत ने यह भी नोट किया कि आरोपी केवल तभी जमानत का दावा कर सकता था यदि वह नशीले पदार्थों के 'सचेत कब्जे' (conscious possession) में नहीं था, लेकिन कार का मालिक होना और तस्करी के लिए यात्रा करना उसके विरुद्ध एक मजबूत साक्ष्य है।
Frequently Asked Questions
1. अदालत ने जमानत क्यों खारिज की?
क्योंकि आरोपी ने स्वयं मुकदमे में देरी की और NDPS अधिनियम की धारा 37 के तहत आवश्यक शर्तें पूरी नहीं कीं।
2. कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को क्या निर्देश दिया?
कोर्ट ने सूरत की ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह 10 सप्ताह के भीतर इस मामले की कार्यवाही पूरी करे।