महाराष्ट्र की एक विशेष अदालत ने अपहरण और दुष्कर्म के आरोपी व्यक्ति को बरी कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि महिला और आरोपी के बीच संबंध सहमति से थे और वह नाबालिग नहीं थी।
- ठाणे की विशेष POCSO कोर्ट ने 26 वर्षीय व्यक्ति को अपहरण और बलात्कार के आरोपों से बरी किया।
- अदालत ने माना कि महिला और आरोपी के बीच रोमांटिक संबंध थे और वह अपनी मर्जी से उत्तर प्रदेश गई थी।
- अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि घटना के समय लड़की नाबालिग थी।
महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक विशेष अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए एक 26 वर्षीय व्यक्ति को अपहरण और दुष्कर्म के आरोपों से मुक्त कर दिया है। यह मामला 2019 का है, जिसमें आरोप था कि आरोपी ने एक 17 वर्षीय लड़की का अपहरण कर उसे उत्तर प्रदेश ले गया और वहां उसका यौन शोषण किया। हालांकि, लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद, अदालत ने पाया कि कथित पीड़िता और आरोपी के बीच संबंध पूरी तरह से सहमति पर आधारित थे।
विशेष POCSO कोर्ट के न्यायाधीश प्रेमल एस विठलानी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा कि अपराध के समय लड़की नाबालिग थी। अदालत ने पाया कि साक्ष्यों से यह स्पष्ट होता है कि दोनों के बीच एक प्रेम संबंध था और महिला अपनी इच्छा से आरोपी के साथ उत्तर प्रदेश गई थी।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला भारतीय कानूनी प्रणाली में 'सहमति' और 'आयु प्रमाण' की जटिलताओं को उजागर करता है। जब पारिवारिक विरोध के कारण सहमति वाले रिश्तों को आपराधिक रंग दिया जाता है, तो यह न केवल न्यायपालिका पर बोझ बढ़ाता है, बल्कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और कानूनी परिभाषाओं के बीच टकराव भी पैदा करता है।
"POCSO जैसे सख्त कानूनों में आयु का निर्धारण सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है; यदि अभियोजन पक्ष आयु साबित नहीं कर पाता, तो पूरा मामला ढह जाता है।"
मामले की पृष्ठभूमि पर गौर करें तो, अभियोजन पक्ष का दावा था कि 14 जून 2019 को लड़की का अपहरण किया गया था। इसके बाद महिला गर्भवती हुई और फरवरी 2021 में उसने एक बच्चे को जन्म दिया। आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) और POCSO अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था।
बचाव पक्ष ने इन आरोपों को चुनौती दी और अदालत के समक्ष यह तर्क रखा कि यह एक प्रेम विवाह का मामला था। अदालत ने पाया कि लड़की के माता-पिता इस रिश्ते के खिलाफ थे और उसके लिए अन्य जगह रिश्ता ढूंढ रहे थे, जिसके कारण उसने आरोपी के साथ जाने का फैसला किया।
अदालत ने आगे उल्लेख किया कि बहुमत प्राप्त करने के बाद, महिला और आरोपी का विवाह संपन्न हुआ और उन्होंने शारीरिक संबंध बनाए। इस आधार पर, कोर्ट ने अपहरण और बलात्कार के सभी आरोपों को खारिज कर दिया।
Frequently Asked Questions
1. अदालत ने आरोपी को बरी क्यों किया?
अदालत ने पाया कि महिला और आरोपी के बीच संबंध सहमति से थे और यह साबित नहीं हुआ कि महिला घटना के समय नाबालिग थी।
2. इस मामले में POCSO एक्ट क्यों लगाया गया था?
शुरुआती शिकायत में लड़की की उम्र 17 वर्ष बताई गई थी, जिससे यह मामला POCSO अधिनियम के दायरे में आ गया था।