हैदराबाद उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक प्रीमियम इलेक्ट्रिक SUV में बार-बार आने वाली तकनीकी खामियों के बाद ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाया है। डीलर को वाहन की कीमत का रिफंड और मुआवजे सहित कुल 24.63 लाख रुपये देने का आदेश दिया गया है।
- हैदराबाद उपभोक्ता आयोग ने दोषपूर्ण इलेक्ट्रिक SUV के लिए ₹24.63 लाख के भुगतान का आदेश दिया।
- वाहन में स्मार्ट-की, सेंट्रल लॉकिंग और अचानक बंद होने जैसी गंभीर समस्याएं थीं।
- सेवा रिकॉर्ड ने साबित किया कि बार-बार मरम्मत के बावजूद समस्या 'पुरानी' बनी रही।
हैदराबाद के एक व्यवसायी ने अगस्त 2025 में एक प्रतिष्ठित भारतीय ऑटोमेकर से 27.98 लाख रुपये की एक प्रीमियम इलेक्ट्रिक SUV खरीदी थी। हालांकि, डिलीवरी के कुछ ही दिनों के भीतर वाहन ने काम करना बंद कर दिया। उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग-I ने पाया कि वाहन में स्मार्ट-की आउट-ऑफ-रेंज और सेंट्रल लॉकिंग सिस्टम की खराबी जैसी गंभीर समस्याएं थीं, जिसके कारण ग्राहक कई बार सड़क के बीच में फंस गया।
मामले की सुनवाई के दौरान, आयोग की अध्यक्ष बी उमा वेंकट सुब्बा लक्ष्मी और सदस्यों सी लक्ष्मी प्रसन्ना और बी राजी रेड्डी ने पाया कि डीलर द्वारा प्रस्तुत सर्विस रिकॉर्ड्स ने खुद ही शिकायतकर्ता के दावों की पुष्टि कर दी। जॉब कार्ड्स में स्पष्ट रूप से उल्लेख था कि ये 'पुरानी समस्याएं' (old issues) हैं, जिसका अर्थ है कि बार-बार मरम्मत के प्रयासों के बावजूद दोष दूर नहीं हुए।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह फैसला भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के बढ़ते बाजार में गुणवत्ता नियंत्रण (Quality Control) पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। जब कंपनियां 'सॉफ्टवेयर ग्लिच' के नाम पर गंभीर हार्डवेयर या सिस्टम विफलताओं को छिपाने की कोशिश करती हैं, तो उपभोक्ता कानून उन्हें जवाबदेह ठहराते हैं। यह मामला अन्य EV खरीदारों के लिए एक मिसाल है कि वे केवल मौखिक आश्वासनों पर भरोसा न करें।
"उपभोक्ता संरक्षण कानून अब केवल वारंटी तक सीमित नहीं हैं; यदि कोई उत्पाद अपनी बुनियादी उपयोगिता खो देता है, तो ग्राहक पूर्ण रिफंड का हकदार है।"
डीलर ने तर्क दिया था कि विनिर्माण दोष (manufacturing defect) साबित करने के लिए कोई विशेषज्ञ रिपोर्ट पेश नहीं की गई थी। हालांकि, आयोग ने माना कि बार-बार होने वाली खराबी और सर्विस रिकॉर्ड्स ही सेवा में कमी (deficiency in service) को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं।
| विवरण | दावा की गई राशि | आयोग द्वारा स्वीकृत राशि |
|---|---|---|
| वाहन रिफंड (मूल्य घटा मूल्यह्रास) | ₹29,29,395 | ₹23,98,000 (लगभग) |
| मुआवजा और लागत | ₹20,00,000 | ₹65,000 |
| कुल भुगतान | ₹49,29,395 | ₹24,63,000 |
आयोग ने डीलर को निर्देश दिया कि वह 10% मूल्यह्रास (depreciation) काटकर रिफंड प्रदान करे। यह निर्णय उन ग्राहकों के लिए एक चेतावनी है जो अपनी शिकायतों का दस्तावेजीकरण नहीं करते हैं। इस मामले में, सर्विस रिकॉर्ड्स और जॉब कार्ड्स ने निर्णायक भूमिका निभाई।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या केवल सॉफ्टवेयर ग्लिच के आधार पर रिफंड मांगा जा सकता है?
उत्तर: यदि सॉफ्टवेयर ग्लिच वाहन की सुरक्षा या बुनियादी कार्यक्षमता को प्रभावित करता है और बार-बार मरम्मत के बाद भी ठीक नहीं होता, तो इसे 'सेवा में कमी' माना जा सकता है।
प्रश्न 2: उपभोक्ता फोरम में केस जीतने के लिए क्या जरूरी है?
उत्तर: सर्विस रिकॉर्ड, जॉब कार्ड, ईमेल और लिखित शिकायतों का पूरा रिकॉर्ड रखना सबसे महत्वपूर्ण है।