बेंगलुरु के एवेन्यू रोड पर स्थित 'बालाजी एंटीक्स एंड कलेक्टिबल्स' केवल एक दुकान नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक यात्रा है। यह स्टोर हॉलीवुड फिल्म 'ए पैसेज टू इंडिया' के लिए प्रॉप्स देने और दुर्लभ कलाकृतियों को सहेजने के लिए प्रसिद्ध है।
- बेंगलुरु के एवेन्यू रोड पर स्थित यह स्टोर एक सदी पुराने पारिवारिक व्यवसाय का हिस्सा है।
- प्रसिद्ध फिल्म 'ए पैसेज टू इंडिया' (1984) के लिए यहाँ से विंटेज कारें और अखबार जैसे प्रॉप्स लिए गए थे।
- इसकी शुरुआत 1924 में 'सीथाफोन कंपनी' के रूप में हुई थी, जो ग्रामोफोन और विनाइल रिकॉर्ड बेचती थी।
बेंगलुरु के शोर-शराबे वाले एवेन्यू रोड की गलियों में एक ऐसा स्थान है जहाँ समय जैसे ठहर गया है। 'बालाजी एंटीक्स एंड कलेक्टिबल्स' शहर के सबसे पुराने एंटीक स्टोरों में से एक है, जो अपनी दीवारों और अलमारियों में भारत के विभिन्न कोनों की कहानियाँ समेटे हुए है। वर्तमान मालिक डीजी बालाजी के लिए यह व्यवसाय केवल व्यापार नहीं, बल्कि एक जुनून है जो उन्हें उनके दादा डीएन सीथराम शेट्टी की विरासत से जोड़ता है।
इस स्टोर का इतिहास बेहद दिलचस्प है। इसकी जड़ें 1924 में स्थापित सीथाफोन कंपनी में हैं, जो उस दौर में ग्रामोफोन और विनाइल रिकॉर्ड का केंद्र हुआ करती थी। 1994 में, एंटीक वस्तुओं के प्रति विशेष लगाव के कारण बालाजी एंटीक्स को एक अलग शाखा के रूप में विकसित किया गया। आज जहाँ सीथाफोन कंपनी आधुनिक कला और रिकॉर्ड्स पर केंद्रित है, वहीं बालाजी एंटीक्स दुर्लभ कलाकृतियों का संरक्षण कर रहा है।
सिनेमाई संबंध: डेविड लीन और 'ए पैसेज टू इंडिया'
इस स्टोर की सबसे गौरवशाली यादों में से एक 1980 के दशक की है, जब महान निर्देशक डेविड लीन की फिल्म 'ए पैसेज टू इंडिया' (1984) का निर्माण हो रहा था। फिल्म निर्माण टीम ने फिल्म की ऐतिहासिक प्रामाणिकता को बनाए रखने के लिए इस स्टोर से संपर्क किया। शुरुआत में टीम ने सामान किराए पर लेना चाहा, लेकिन स्टोर प्रबंधन की अनिच्छा के कारण उन्होंने विंटेज कारों से लेकर पुराने अखबारों तक, कई कीमती प्रॉप्स को खरीद लिया।
"इतिहास की हर वस्तु एक मूक गवाह होती है; इन्हें सहेजना केवल व्यापार नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति को जीवित रखना है।"
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, शहरीकरण के इस दौर में जहाँ पुराने घर और सामान नष्ट किए जा रहे हैं, बालाजी एंटीक्स जैसे संस्थान 'लिविंग म्यूजियम' की तरह काम करते हैं। यह स्टोर दर्शाता है कि कैसे पारिवारिक व्यवसाय पीढ़ियों तक अपनी पहचान बनाए रख सकते हैं और वैश्विक सिनेमा जैसे माध्यमों से स्थानीय विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला सकते हैं।
स्टोर के भीतर कदम रखते ही आपको भूत मास्क, मरापची और दशहरा गुड़िया, तथा राजा रवि वर्मा की लिथोग्राफ पेंटिंग्स का अद्भुत संग्रह देखने को मिलता है। डीजी बालाजी बताते हैं कि अब एंटीक वस्तुओं को प्राप्त करना कठिन होता जा रहा है क्योंकि नई पीढ़ी अपनी पुश्तैनी चीजों को सहेज कर रखने लगी है, जो कि सांस्कृतिक दृष्टि से एक सकारात्मक संकेत है।
व्यवसाय का विकास: तब और अब
| विशेषता | सीथाफोन कंपनी (1924) | बालाजी एंटीक्स (वर्तमान) |
|---|---|---|
| मुख्य उत्पाद | ग्रामोफोन और विनाइल रिकॉर्ड | दुर्लभ कलाकृतियाँ और एंटीक फर्नीचर |
| दृष्टिकोण | तकनीकी संगीत उपकरण | सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: बालाजी एंटीक्स में किस तरह की वस्तुएं मिलती हैं?
यहाँ औपनिवेशिक फर्नीचर, प्राचीन मुखौटे, पारंपरिक गुड़िया और दुर्लभ लिथोग्राफ पेंटिंग्स का संग्रह है।
प्रश्न 2: फिल्म 'ए पैसेज टू इंडिया' का इस स्टोर से क्या संबंध है?
फिल्म की प्रोडक्शन टीम ने इस स्टोर से कई ऐतिहासिक प्रॉप्स और विंटेज कारें खरीदी थीं।