ओडिशा के विक्रमदेव महापात्रा ने 14 साल के आईटी करियर को छोड़कर मशरूम की खेती में कदम रखा और अब वे हर महीने 10 लाख रुपये से अधिक कमा रहे हैं।

  • बीटेक इंजीनियर विक्रमदेव ने आईटी क्षेत्र के 14 साल का सफल करियर छोड़ दिया।
  • ओडिशा के नबरंगपुर में 'गंगा भूमि मशरूम' की स्थापना की।
  • वर्तमान में महीने की शुद्ध आय 10 लाख रुपये से अधिक है।
  • यह उद्यम 24 कर्मचारियों को रोजगार प्रदान कर रहा है, जिनमें अधिकांश महिलाएं हैं।

ओडिशा के विक्रमदेव महापात्रा की कहानी उन लाखों इंजीनियरिंग स्नातकों के लिए एक प्रेरणा है जो केवल कॉर्पोरेट नौकरियों को ही सफलता का एकमात्र पैमाना मानते हैं। बीजू पटनायक विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद, विक्रमदेव ने आईटी क्षेत्र में एक शानदार करियर बनाया। उन्होंने Mindtree और LTIMindtree जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में 14 वर्षों तक काम किया, लेकिन उनके भीतर कुछ अलग करने की चाहत हमेशा बनी रही।

एक साहसी बदलाव की शुरुआत

अपने कॉर्पोरेट जीवन के चरम पर रहते हुए, विक्रमदेव ने एक बड़ा जोखिम लेने का फैसला किया। उन्होंने अपनी सुरक्षित आईटी नौकरी को अलविदा कहा और अपने गृहनगर नबरंगपुर लौटने का निर्णय लिया। वहां उन्होंने कृषि और कृषि-व्यवसाय की संभावनाओं को तलाशना शुरू किया। इसी विजन के साथ उन्होंने 'गंगा भूमि मशरूम' (Ganga Bhumi Mushrooms) की नींव रखी, जो आज एक विशाल वाणिज्यिक उत्पादन और प्रसंस्करण इकाई बन चुकी है।

विक्रमदेव का यह बदलाव केवल करियर का बदलाव नहीं था, बल्कि यह आधुनिक तकनीक और पारंपरिक कृषि के संगम का एक उत्कृष्ट उदाहरण था। उन्होंने दिखाया कि कैसे एक तकनीकी विशेषज्ञ अपने कौशल का उपयोग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कर सकता है।

क्यों यह खबर महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में कृषि-व्यवसाय (Agribusiness) अब केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं है। विक्रमदेव जैसे उद्यमी यह साबित कर रहे हैं कि यदि सही तकनीक और बाजार की समझ हो, तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर मुनाफा कमाया जा सकता है। मशरूम की खेती कम जगह में अधिक उत्पादन देने वाली तकनीक है, जो इसे एक उच्च-लाभ वाला व्यवसाय बनाती है।

कृषि में तकनीक का समावेश ही ग्रामीण भारत के आर्थिक कायाकल्प की असली कुंजी है।

वर्तमान में, उनकी इकाई प्रतिदिन लगभग 500-600 किलोग्राम मशरूम का उत्पादन करती है, जिसका अर्थ है कि वे प्रति माह लगभग 15-18 टन मशरूम तैयार करते हैं। इस उत्पाद को भुवनेश्वर और बेहरामपुर जैसे बड़े बाजारों में बेचा जाता है। सभी खर्चों को निकालने के बाद, उनका व्यवसाय हर महीने ₹10 लाख से अधिक का शुद्ध लाभ कमा रहा है।

सामाजिक प्रभाव और रोजगार

विक्रमदेव की सफलता केवल व्यक्तिगत लाभ तक सीमित नहीं है। उनके इस उद्यम ने स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं। वर्तमान में, उनके पास 24 कर्मचारी हैं, जिनमें 18 महिलाएं और 6 पुरुष शामिल हैं। यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बना रहा है।

Did You Know?: मशरूम की खेती के लिए बहुत कम पानी और नियंत्रित वातावरण की आवश्यकता होती है, जो इसे जलवायु परिवर्तन के दौर में एक टिकाऊ विकल्प बनाता है।

Frequently Asked Questions

1. विक्रमदेव महापात्रा ने कौन सी कंपनियां छोड़ी थीं?
उन्होंने Mindtree और LTIMindtree जैसी प्रमुख आईटी कंपनियों में 14 साल काम करने के बाद अपना करियर बदला।

2. गंगा भूमि मशरूम का मासिक उत्पादन कितना है?
यह इकाई प्रति माह लगभग 15 से 18 टन मशरूम का उत्पादन करती है।