छात्रों को बड़ी राहत देते हुए दिल्ली सरकार ने उस नियम को वापस ले लिया है जिसके तहत तीसरी भाषा (R3) में फेल होने पर छात्रों को कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा देने से रोक दिया जाता था। शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि अब इस मामले में सीबीएसई (CBSE) के दिशानिर्देश ही मान्य होंगे।
- दिल्ली सरकार ने तीसरी भाषा (R3) में पास होने की अनिवार्यता को कक्षा 10 की बोर्ड पात्रता से अलग कर दिया है।
- अब इस संबंध में सीबीएसई (CBSE) के दिशानिर्देश लागू होंगे, जिसके तहत R3 केवल एक आंतरिक मूल्यांकन विषय है।
- कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में व्यावसायिक शिक्षा को अनिवार्य किया गया है और एआई (AI) मॉड्यूल भी शामिल किए गए हैं।
दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय (DoE) ने कक्षा 9 की संशोधित परीक्षा और प्रोन्नति नीति से एक विवादित प्रावधान को आधिकारिक तौर पर वापस ले लिया है। इस प्रावधान के तहत यदि कोई छात्र कक्षा 9 या 10 में अपनी चुनी हुई तीसरी भाषा (R3) परीक्षा पास करने में असमर्थ रहता था, तो उसे कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में बैठने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाता था। इस फैसले के बाद अब दिल्ली की नीति सीधे केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के नियमों के अनुरूप हो गई है।
इससे पहले, शिक्षा निदेशालय ने कहा था कि जो छात्र कक्षा 9 में तीसरी भाषा में अनुत्तीर्ण हो जाते हैं, उन्हें अगली कक्षा में तो भेज दिया जाएगा, लेकिन बोर्ड परीक्षा में बैठने के लिए उन्हें कक्षा 10 में पढ़ाई के दौरान इस विषय को पास करना अनिवार्य होगा। मंगलवार को जारी एक शुद्धिपत्र (corrigendum) में स्पष्ट किया गया कि भ्रम की स्थिति को दूर करने के लिए इस नियम को पूरी तरह वापस ले लिया गया है और अब सीबीएसई के नियम ही सर्वोपरि होंगे।
इस निर्णय से यह सुनिश्चित हो गया है कि दिल्ली के स्कूलों में सीबीएसई की त्रि-भाषा नीति ही प्रभावी रहेगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE) 2023 के तहत लागू इस नीति में कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य है, जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए।
Why This Matters
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि नीतियों का यह एकीकरण माध्यमिक स्तर के छात्रों में अनावश्यक मानसिक तनाव और पढ़ाई छोड़ने (ड्रॉपआउट) की दर को रोकेगा। बोर्ड परीक्षा की पात्रता को तीसरी भाषा से जोड़ना, जो कि मुख्य रूप से सांस्कृतिक जुड़ाव के लिए है न कि कड़े शैक्षणिक मूल्यांकन के लिए, छात्रों पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा था।
सीबीएसई के दिशानिर्देशों के अनुसार, तीसरी भाषा (R3) का मूल्यांकन पूरी तरह से स्कूल-स्तरीय आंतरिक मूल्यांकन के माध्यम से किया जाता है। इसके लिए कोई अलग से बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं की जाती है। हालांकि R3 के अंक अंतिम सीबीएसई प्रमाण पत्र पर दिखाई देंगे, लेकिन इसका छात्र की बोर्ड परीक्षा पात्रता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
"राज्य के प्रोन्नति मानदंडों को सीबीएसई के राष्ट्रीय ढांचे के साथ जोड़ना एक स्वागत योग्य कदम है। यह छात्रों को बिना किसी अतिरिक्त तनाव के मुख्य विषयों पर ध्यान केंद्रित करने की अनुमति देता है।" — वरिष्ठ शिक्षाविद्
भाषा नीति के अलावा, दिल्ली सरकार के संशोधित पाठ्यक्रम में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कई बड़े बदलाव किए गए हैं। कक्षा 9 के छात्रों के लिए भाषा-1, भाषा-2, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के साथ व्यावसायिक शिक्षा (कौशल विकास) को भी एक अनिवार्य विषय बना दिया गया है। इसके अलावा, कक्षा 9 के लिए गणित बेसिक और गणित स्टैंडर्ड की दोहरी प्रणाली को समाप्त कर दिया गया है।
नए पाठ्यक्रम में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को 2026-27 के दौरान मॉड्यूल के रूप में पेश किया जाएगा और 2027-28 से यह एक अनिवार्य विषय बन जाएगा। इसके अलावा कला शिक्षा, शारीरिक शिक्षा और कल्याण (Well-being) को भी आंतरिक मूल्यांकन के तहत अनिवार्य किया गया है।
| विशेषता | पुरानी दिल्ली नीति (वापस ली गई) | सीबीएसई के अनुरूप नई नीति |
|---|---|---|
| तीसरी भाषा (R3) का प्रभाव | R3 में फेल होने पर छात्र कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा नहीं दे सकते थे। | केवल आंतरिक मूल्यांकन; बोर्ड परीक्षा पात्रता पर कोई असर नहीं। |
| गणित संरचना (कक्षा 9) | गणित बेसिक और स्टैंडर्ड में विभाजित था। | दोहरी प्रणाली समाप्त; एकीकृत गणित पाठ्यक्रम लागू। |
| व्यावसायिक शिक्षा | वैकल्पिक विषय था। | कौशल विकास के रूप में अनिवार्य विषय। |
Frequently Asked Questions
Q1: क्या तीसरी भाषा (R3) के अंक अंतिम मार्कशीट में दिखेंगे?
हाँ, तीसरी भाषा में प्राप्त अंक या ग्रेड अंतिम सीबीएसई प्रमाण पत्र पर दर्ज होंगे, लेकिन इससे बोर्ड परीक्षा देने की पात्रता प्रभावित नहीं होगी।
Q2: क्या दिल्ली के स्कूलों में कक्षा 9 के लिए व्यावसायिक शिक्षा अनिवार्य है?
हाँ, संशोधित योजना के तहत शैक्षणिक उन्नति के लिए व्यावसायिक शिक्षा (कौशल विकास) को अब एक अनिवार्य विषय बना दिया गया है।