भारत बायोटेक के कार्यकारी अध्यक्ष कृष्णा एला ने ओस्मानिया विश्वविद्यालय के 85वें दीक्षांत समारोह में स्नातकों को नवाचार और उद्यमिता के लिए प्रेरित किया। उन्होंने जोर दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सही उपयोग साधारण व्यक्ति को भी असाधारण बना सकता है।

  • AI का उपयोग करने वाली कंपनियां ही भविष्य में जीवित रहेंगी।
  • नवाचार के लिए ज्ञान, कौशल और कल्पना शक्ति अनिवार्य है।
  • युवाओं को सोशल मीडिया के बजाय समस्या-समाधान और उद्यमिता पर ध्यान देना चाहिए।

हैदराबाद स्थित ओस्मानिया विश्वविद्यालय के 85वें दीक्षांत समारोह में भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड के कार्यकारी अध्यक्ष कृष्णा एला ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने देश के युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का विकास और भविष्य पूरी तरह से उसकी युवा आबादी के हाथों में है। उन्होंने आह्वान किया कि युवाओं को केवल नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि नवाचार और राष्ट्रीय परिवर्तन का नेतृत्व करने वाला उद्यमी बनना चाहिए।

शिक्षा के प्रति भारतीय समाज के गहरे सम्मान का उल्लेख करते हुए श्री एला ने कहा कि भारत में माता-पिता अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए अपनी जमीन और गहने तक बेचने को तैयार रहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि नवाचार के तीन मुख्य स्तंभ हैं: ज्ञान, कौशल और कल्पना। उनके अनुसार, एक सफल उद्यमी वही है जो अपने काम के प्रति जुनूनी हो और समाज की वास्तविक समस्याओं को हल करने पर ध्यान केंद्रित करे।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the integration of AI in specialized fields like healthcare and quality control is democratizing expertise. When a village doctor can perform tasks equivalent to a specialist using AI, it bridges the urban-rural healthcare divide, fundamentally altering the socio-economic landscape of India.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रभाव पर चर्चा करते हुए कृष्णा एला ने एक चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने कहा, "भविष्य में केवल दो तरह की कंपनियां बचेंगी—एक वे जो AI बनाती हैं और दूसरी वे जो AI का उपयोग करती हैं।" उन्होंने साझा किया कि भारत बायोटेक ने अपनी क्वालिटी एश्योरेंस (QA) और क्वालिटी कंट्रोल (QC) प्रक्रियाओं में AI को अपनाया है, जिससे कर्मचारियों की कार्यक्षमता और बुद्धिमत्ता में वृद्धि हुई है।

AI एक साधारण व्यक्ति को असाधारण बना सकता है; यह एक ग्रामीण एमबीबीएस डॉक्टर को रेडियोलॉजिस्ट या ऑर्थोपेडिक सर्जन के समान सक्षम बना सकता है।

उन्होंने युवाओं को चेतावनी दी कि वे सोशल मीडिया पर अपना समय बर्बाद करने के बजाय AI का उपयोग नए विचार खोजने और सवाल पूछने के लिए करें। साथ ही, उन्होंने 'जेन जेड' (Gen Z) और 'अल्फा' (Alpha) जैसे लेबलों के आधार पर समाज को विभाजित करने के खिलाफ आगाह किया, क्योंकि भारतीय समाज में पहले से ही पर्याप्त विभाजन मौजूद हैं।

इस अवसर पर राज्यपाल और विश्वविद्यालय के कुलाधिपति शिव प्रताप शुक्ला ने भी स्नातकों को संबोधित किया। उन्होंने युवाओं से आत्मनिर्भर बनने और देश को नशीली दवाओं के दुरुपयोग से मुक्त करने में योगदान देने का आग्रह किया। समारोह के दौरान 640 पीएचडी डिग्रियां और 71 स्वर्ण पदक वितरित किए गए, जिनमें अंग्रेजी विभाग की माकला डी. को सर्वश्रेष्ठ पीएचडी शोध के लिए राज्यपाल स्वर्ण पदक मिला।

क्या आप जानते हैं?: ओस्मानिया विश्वविद्यालय भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में से एक है, जिसने कई वैश्विक नेताओं और वैज्ञानिकों को जन्म दिया है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: कृष्णा एला के अनुसार AI का सबसे बड़ा लाभ क्या है?
उत्तर: उनके अनुसार AI साधारण व्यक्ति की क्षमताओं को बढ़ाकर उसे असाधारण बनाता है, जिससे विशेषज्ञता का लोकतंत्रीकरण होता है।

प्रश्न 2: दीक्षांत समारोह में कुल कितने पदक और डिग्रियां प्रदान की गईं?
उत्तर: समारोह में 640 पीएचडी डिग्रियां और 71 स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।