आंध्र प्रदेश इंटरमीडिएट शिक्षा बोर्ड (BIEAP) ने छात्रों को रटंत विद्या से मुक्त कर उनकी रचनात्मकता और समस्या-समाधान कौशल विकसित करने के लिए एक व्यापक प्रशिक्षण कार्यशाला शुरू की है। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप मूल्यांकन प्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन लाएगी।
- BIEAP ने विजयवाड़ा के आंध्र लोयोला कॉलेज में चार दिवसीय आवासीय कार्यशाला का आयोजन किया।
- परीक्षा पत्रों का स्वरूप अब रटने के बजाय विश्लेषणात्मक सोच और रचनात्मकता पर आधारित होगा।
- NCERT के PARAKH टैक्सोनॉमी और ITMS के माध्यम से एक योग्यता-आधारित प्रश्न बैंक विकसित किया जाएगा।
आंध्र प्रदेश इंटरमीडिएट शिक्षा बोर्ड (BIEAP) के परीक्षा नियंत्रक ए. साइमन विक्टर ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि राज्य की इंटरमीडिएट परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं। विजयवाड़ा के आंध्र लोयोला कॉलेज में आयोजित चार दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यशाला के उद्घाटन सत्र के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि ये बदलाव उभरती हुई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप होंगे।
इस कार्यशाला का मुख्य केंद्र 'HPC सेकेंडरी स्टेज, PARAKH टैक्सोनॉमी और ITMS (इंटीग्रेटेड टाइम मैनेजमेंट सिस्टम) योग्यता-आधारित प्रश्न बैंक का विकास' है। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र PARAKH (NCERT) के सहयोग से संचालित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता के मानकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाना है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि भारतीय शिक्षा प्रणाली लंबे समय से 'मेमोराइजेशन' (रटने) के जाल में फंसी रही है। BIEAP का यह कदम केवल परीक्षा पैटर्न बदलना नहीं है, बल्कि यह छात्रों की मानसिक क्षमता को विकसित करने की एक रणनीतिक कोशिश है। जब प्रश्न पत्र विश्लेषणात्मक होंगे, तो छात्र केवल किताबों को रटने के बजाय अवधारणाओं (Concepts) को समझने पर जोर देंगे, जिससे उनकी भविष्य की व्यावसायिक सफलता सुनिश्चित होगी।
"शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य सूचना का संग्रहण नहीं, बल्कि उस सूचना का विश्लेषण कर समस्या का समाधान खोजना है।"
कार्यशाला में दिल्ली से आए NCERT प्रतिनिधियों, अमनदीप और डॉ. उदय, द्वारा राज्य के विभिन्न जिलों से चयनित लगभग 100 अनुभवी इंटरमीडिएट व्याख्याताओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण विशेष रूप से PARAKH टैक्सोनॉमी और पाठ्यक्रम-आधारित मूल्यांकन पद्धतियों पर केंद्रित है, ताकि आंध्र प्रदेश के बोर्ड के मानक राष्ट्रीय स्तर के बोर्डों के समकक्ष आ सकें।
इस अवसर पर आरजेडीआईई (RJDIE) के शेखर बाबू, पी. रेखा रानी, प्रोफेसर जी. नरसिम्हा राव और आंध्र लोयोला कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. चाणक्य सहित कई शिक्षाविद् और बोर्ड अधिकारी उपस्थित थे। यह सामूहिक प्रयास राज्य में शैक्षणिक उत्कृष्टता के एक नए युग की शुरुआत का संकेत है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को रटंत विद्या से दूर ले जाकर उनमें विश्लेषणात्मक सोच, रचनात्मकता और समस्या-समाधान कौशल विकसित करना है।
प्रश्न 2: ITMS का इस बदलाव में क्या रोल है?
उत्तर: ITMS (इंटीग्रेटेड टाइम मैनेजमेंट सिस्टम) का उपयोग एक योग्यता-आधारित प्रश्न बैंक (Competency-Based Question Bank) विकसित करने के लिए किया जा रहा है।