केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 2027 की बोर्ड परीक्षाओं के लिए प्री-एग्जाम प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसका मुख्य उद्देश्य लाखों छात्रों के डेटा को पूरी तरह डिजिटल बनाना और त्रुटियों को समाप्त करना है।
- CBSE ने 2027 की कक्षा 10 और 12 की बोर्ड परीक्षाओं के लिए प्री-एग्जाम गतिविधियाँ शुरू की हैं।
- 'फ्लाइंग स्लिप्स' को स्कैन करने के लिए OCR, ICR और OMR तकनीक का उपयोग करने वाली एजेंसी की नियुक्ति की जाएगी।
- अगले परीक्षा चक्र में लगभग 29.89 लाख छात्रों के शामिल होने की उम्मीद है।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने अगले वर्ष होने वाली कक्षा 10 और 12 की बोर्ड परीक्षाओं के लिए अपनी प्रारंभिक तैयारियों की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बोर्ड ने अब एक ऐसी एजेंसी से निविदाएं (bids) मांगी हैं जो 'फ्लाइंग स्लिप्स' को स्कैन कर सके और उनसे प्राप्त डेटा को अंतिम रूप दे सके।
ये फ्लाइंग स्लिप्स उम्मीदवारों के विवरण जैसे नाम, पहचान संख्या और रोल नंबर ले जाती हैं। चयनित एजेंसी इंटेलिजेंट कैरेक्टर रिकग्निशन (ICR), ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) और ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन (OMR) स्कैनर का उपयोग करके डेटा फाइलें तैयार करेगी, जिन्हें बाद में बोर्ड के मास्टर डेटा से मिलान किया जाएगा।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, जब कक्षा 12 में 18 लाख और कक्षा 10 में 25-26 लाख छात्र हों, तो मैनुअल डेटा प्रोसेसिंग असंभव और जोखिम भरी हो जाती है। डिजिटलीकरण केवल समय बचाने के लिए नहीं, बल्कि मानवीय त्रुटियों को शून्य करने के लिए आवश्यक है। रोल नंबर या विषय कोड में एक छोटी सी गलती छात्र के भविष्य पर असर डाल सकती है, जिसे यह नई तकनीक पूरी तरह समाप्त कर देगी।
OCR/ICR आधारित डेटा पाइपलाइन की ओर बढ़ना राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में उम्मीदवार की पहचान की अखंडता सुनिश्चित करने के लिए एक क्रांतिकारी कदम है।
यह कार्य 24 क्षेत्रीय कार्यालयों में फैला होगा, जिनमें दिल्ली, बेंगलुरु, कोलकाता, चेन्नई और पटना जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं। चयनित एजेंसी को दो साल का अनुबंध दिया जाएगा, जिसके तहत उन्हें स्कैनिंग, डेटा प्रोसेसिंग और त्रुटि सुधार का कार्य करना होगा। इसमें डुप्लिकेट रोल नंबर और गलत विवरणों की एक 'एडिट लिस्ट' तैयार करना भी शामिल है।
ऐतिहासिक रूप से, यह प्रक्रिया स्कूलों द्वारा मैनुअल रूप से की जाती थी, जिसमें काफी समय लगता था और गलतियों की संभावना अधिक रहती थी। पिछले कुछ वर्षों से CBSE ने इसे ऑनलाइन स्थानांतरित किया है, और अब फ्लाइंग स्लिप्स का डिजिटलीकरण इस श्रृंखला की अंतिम कड़ी है।
| विशेषता | पुरानी मैनुअल प्रणाली | नई डिजिटल प्रणाली (2027) |
|---|---|---|
| डेटा प्रविष्टि | स्कूलों द्वारा मैनुअल जमा | ऑनलाइन सबमिशन और OCR स्कैनिंग |
| त्रुटि पहचान | मैनुअल क्रॉस-चेकिंग | मास्टर डेटा के साथ ऑटोमेटेड मिलान |
| प्रसंस्करण गति | धीमी और जटिल | तेज और स्केलेबल डिजिटलीकरण |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: सीबीएसई के संदर्भ में 'फ्लाइंग स्लिप्स' क्या हैं?
फ्लाइंग स्लिप्स वे दस्तावेज़ हैं जिनमें छात्र का नाम, रोल नंबर, केंद्र संख्या और विषय कोड जैसे महत्वपूर्ण विवरण होते हैं, जिनका उपयोग परीक्षा के दौरान सत्यापन के लिए किया जाता है।
प्रश्न 2: 2027 की परीक्षाओं में कितने छात्रों के बैठने की उम्मीद है?
अनुमान है कि कक्षा 10 और 12 को मिलाकर लगभग 29.89 लाख उम्मीदवार परीक्षा में शामिल होंगे।