होम ऑफिस के ताजा आंकड़ों से पता चला है कि आश्रितों (dependants) पर लगे प्रतिबंधों और पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा की अनिश्चितता के कारण यूके में छात्र वीजा आवेदनों में भारी कमी आई है। भारतीय छात्र अब यूके के बजाय अन्य विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।

  • अगस्त 2026 को समाप्त वर्ष में छात्र वीजा आवेदनों में 16% की गिरावट आई।
  • जनवरी 2024 के प्रतिबंधों के बाद डिपेंडेंट वीजा आवेदनों में 88% की भारी कमी।
  • जून 2026 तक भारतीय छात्रों को मिलने वाले वीजा में 16% की वार्षिक गिरावट।
  • ग्रेजुएट रूट वीजा की अवधि कम करने के प्रस्तावों ने छात्रों में अनिश्चितता बढ़ाई है।

उच्च शिक्षा के वैश्विक केंद्र के रूप में पहचाने जाने वाले यूनाइटेड किंगडम (UK) के आकर्षण में भारी कमी देखी जा रही है। होम ऑफिस द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 को समाप्त वर्ष में प्रायोजित अध्ययन वीजा आवेदनों में 16% की गिरावट आई है। आंकड़ों से पता चलता है कि मुख्य आवेदकों की संख्या 360,700 रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम है।

सबसे अधिक गिरावट 'डिपेंडेंट वीजा' (आश्रित वीजा) में देखी गई है। 2022-23 में यह संख्या 156,400 थी, जो 2025-26 में गिरकर मात्र 17,000 रह गई। यह गिरावट सीधे तौर पर 1 जनवरी, 2024 को लागू किए गए आव्रजन नियमों का परिणाम है, जिसके तहत अधिकांश अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अपने परिवार के सदस्यों को साथ लाने से रोक दिया गया है। केवल कुछ शोध पाठ्यक्रमों (research courses) के छात्रों को ही इससे छूट दी गई है।

यह महत्वपूर्ण क्यों है?

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यूके वर्तमान में एक नीतिगत विरोधाभास में फंसा है: एक तरफ वह खुद को शीर्ष शिक्षा गंतव्य बनाए रखना चाहता है, वहीं दूसरी ओर वह नेट माइग्रेशन (शुद्ध प्रवासन) को कम करने के लिए सख्त कदम उठा रहा है। 'फैमिली यूनिट' पर प्रतिबंध और ग्रेजुएट रूट को दो साल से घटाकर 18 महीने करने की योजना यह संकेत देती है कि यूके अब अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाओं के लिए उतना स्वागत योग्य नहीं रहा।

"यूके अल्पकालिक प्रवासन लक्ष्यों को प्राथमिकता देकर अपनी वैश्विक शैक्षिक प्रतिस्पर्धात्मकता को जोखिम में डाल रहा है।"

इसका सबसे गहरा प्रभाव भारतीय छात्रों पर पड़ा है, जो ऐतिहासिक रूप से यूके के अंतरराष्ट्रीय छात्र समुदाय की रीढ़ रहे हैं। हालांकि 2025 में भारतीय छात्र सबसे बड़े समूह थे, लेकिन जून 2026 के आंकड़ों ने 16% की गिरावट दर्ज की है। इसके पीछे रहने की उच्च लागत, सुरक्षा संबंधी चिंताएं और नौकरी के सीमित अवसर मुख्य कारण बताए जा रहे हैं।

ऐतिहासिक रूप से, यूके 'ग्रेजुएट रूट' के माध्यम से छात्रों को आकर्षित करता था, जो उन्हें पढ़ाई के बाद नौकरी खोजने का मौका देता था। हालांकि, अब इस मार्ग में अनिश्चितता के कारण छात्र कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी जैसे देशों की ओर रुख कर रहे हैं, जहां आव्रजन नीतियां अधिक पारदर्शी और सहायक मानी जाती हैं।

वीजा श्रेणी 2022-23 के आंकड़े 2025-26 के आंकड़े रुझान
मुख्य आवेदक ~423,600 360,700 घट रहा है
आश्रित (Dependants) 156,400 17,000 भारी गिरावट
क्या आप जानते हैं?: अगस्त का महीना यूके छात्र वीजा आवेदनों के लिए साल का सबसे व्यस्त महीना होता है क्योंकि ब्रिटिश विश्वविद्यालयों में सितंबर से नया शैक्षणिक सत्र शुरू होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. यूके में डिपेंडेंट वीजा क्यों कम हो रहे हैं?
यूके सरकार ने 1 जनवरी, 2024 से नियम बदले हैं, जिससे अधिकांश अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अपने परिवार को साथ लाने की अनुमति नहीं है।

2. भारतीय छात्र बाजार की क्या प्रतिक्रिया रही है?
डिपेंडेंट प्रतिबंधों और ग्रेजुएट रूट वीजा की अनिश्चितता के कारण भारतीय छात्रों के वीजा अनुदान में 16% की गिरावट आई है।