मुल्लापेरियार बांध का जल स्तर इस जुलाई में पिछले साल की तुलना में 18.5 फीट घट गया है, जिससे केरल और पड़ोसी तमिलनाडु के किसानों की फसलें खतरे में हैं। निरंतर घटते स्तर से थेक्कडी के पेरियार टाइगर रिज़र्व में पर्यटन और कु्मिली‑चक्कुपल्लोम पंचायती क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति भी बाधित हो सकती है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • मुल्लापेरियार जलाशय का जल स्तर साल-दर-साल 18.5 फीट गिरा
  • केरल‑तमिलनाडु के कृषि क्षेत्र में गंभीर असर
  • पर्यटन और पीने के पानी की आपूर्ति भी जोखिम में

मुल्लापेरियार बांध ने जुलाई के मध्य में रिकॉर्ड स्तर के नीचे जल संग्रहण दिखाया – 112.9 फीट, जबकि पिछले वर्ष इसी दिन 131.4 फीट था। यह गिरावट न केवल केरल, बल्कि तमिलनाडु के सीमा‑पड़ोसी जिलों में भी कृषि‑आधारित जीवन को प्रभावित कर रही है।

स्थिति का विवरण

बांध के आस‑पास स्थित पेरियार टाइगर रिज़र्व (PTR) के एएफडी आर. लक्ष्मी ने बताया कि वर्तमान में थेक्कडी में नौका‑सवारी और अन्य पर्यटन गतिविधियाँ चल रही हैं, पर जल स्तर 110 फीट से नीचे गिरने पर ये बंद हो सकती हैं। जल की कमी लगातार बढ़ने से पर्यटन आय में गिरावट और स्थानीय रोजगार पर असर पड़ने की संभावना है।

कृषि पर प्रभाव

लगभग 1.5 लाख एकड़ खेत मुल्लापेरियार जल पर निर्भर हैं, जिसमें थेनि जिले के 14,700 हेक्टेयर प्रमुख हैं। जल की कमी के कारण इन फसलों में अभी सूखा है। तमिलनाडु के गुदालूर में धान खेती करने वाले मनोहरन ने बताया कि किसान दो बारी धान की खेती सामान्यतः वर्षा और बांध के जल से करते हैं, पर इस साल जल की अनुपस्थिति से बीज का विकास बिगड़ रहा है और लगभग ₹20,000 प्रति एकड़ खर्च किए हुए भी खेती शुरू नहीं हो पा रही है।

पर्यटन और जल आपूर्ति जोखिम

जैसे-जैसे जल स्तर घटता है, थेक्कडी के पेरियार टाइगर रिज़र्व में नौका‑सवारी, बोटिंग और अन्य इको‑टूरिज़्म गतिविधियों पर प्रतिबंध लग सकता है। साथ ही कु्मिली और चक्कुपल्लोम पंचायती क्षेत्रों में पीने के पानी की आपूर्ति भी खतरे में है, क्योंकि ये क्षेत्र मुख्य रूप से इस जलाशय पर निर्भर हैं।

राज्य‑स्तरीय प्रतिक्रियाएँ

तमिलनाडु में जल निकासी का अधिकार जून के पहले हफ़्ते से 120 दिनों के लिए है, लेकिन जल स्तर 118 फीट से नीचे न गिरने पर ही वह शुरू होता है। इस संकट के समाधान हेतु, विभिन्न धर्मों के पुजारीयों ने बंध के सामने इंटर‑फ़ेथ प्रार्थना सभा आयोजित की, जिससे बरसात की प्रार्थना की गई। 2019 में समान स्थिति में भी अंतर‑राज्यीय प्रार्थना सभा आयोजित की गई थी, लेकिन तब भी पर्याप्त वर्षा नहीं आई।