केंद्र सरकार ने पश्चिमी घाट के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ESA) को लेकर सातवीं बार नया ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। राज्यों और केंद्र के बीच गांवों के सीमांकन और विकास कार्यों पर असर को लेकर चल रहे गतिरोध के कारण यह विवाद गहरा गया है।
मुख्य बिंदु
- केंद्र ने पश्चिमी घाट के लिए सातवीं बार इको-सेंसिटिव ज़ोन (ESA) का मसौदा जारी किया।
- गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के बीच गांवों के सीमांकन पर विवाद जारी है।
- नया ड्राफ्ट 60 दिनों तक सार्वजनिक आपत्तियों के लिए खुला रहेगा।
- ESA के भीतर खनन, थर्मल पावर प्लांट और बड़े निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध लग सकता है।
नई दिल्ली: केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने पश्चिमी घाट के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ESA) के लिए अपना मसौदा अधिसूचना सातवीं बार फिर से जारी कर दी है। यह कदम तब उठाया गया है जब पिछला ड्राफ्ट 27 जुलाई को अंतिम रूप दिए बिना ही समाप्त हो गया था।
राज्यों और केंद्र के बीच गतिरोध
केंद्र सरकार और पश्चिमी घाट के छह राज्यों—गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु—के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद अभी भी अनसुलझा है। मुख्य विवाद इस बात पर है कि किन गांवों और क्षेत्रों को इस संवेदनशील क्षेत्र के दायरे में शामिल किया जाना चाहिए। राज्य सरकारों को डर है कि इस अधिसूचना से कृषि, बुनियादी ढांचे और अन्य विकास गतिविधियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
क्यों यह महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल पर्यावरण संरक्षण का नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका और क्षेत्रीय विकास का भी है। यदि यह अधिसूचना लागू होती है, तो इस क्षेत्र में खनन, उत्खनन, रेत खनन, नए थर्मल पावर प्लांट और बड़े निर्माण परियोजनाओं पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाएंगे।
पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय विकास के बीच संतुलन बनाना भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पश्चिमी घाट के संरक्षण का विवाद 2011 में शुरू हुआ था, जब माधव गाडगिल की अध्यक्षता वाली समिति ने पूरे 1,29,000 वर्ग किमी क्षेत्र को संवेदनशील घोषित करने की सिफारिश की थी। इसके बाद, के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाले समूह ने लगभग 37% क्षेत्र को सुरक्षित रखने का सुझाव दिया। वर्तमान ड्राफ्ट में प्रस्तावित ESA का कुल क्षेत्रफल 56,825.7 वर्ग किमी है।
| राज्य | प्रस्तावित ESA क्षेत्र (वर्ग किमी) |
|---|---|
| कर्नाटक | 20,668 |
| महाराष्ट्र | 17,340 |
| केरल | 9,993.7 |
| तमिलनाडु | 6,914 |
| गोवा | 1,461 |
| गुजरात | 449 |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. राज्यों की मुख्य चिंता क्या है?
राज्य सरकारें कृषि, बागवानी और बुनियादी ढांचे के विकास पर पड़ने वाले प्रतिबंधों को लेकर चिंतित हैं।
2. इस नए ड्राफ्ट पर क्या प्रक्रिया होगी?
जनता के पास अपनी आपत्तियां दर्ज करने के लिए 60 दिनों का समय है, जिसके बाद केंद्र अंतिम निर्णय लेगा।