सलेम जिला प्रशासन ने 10 दिनों के दौरान येरकुड में सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने के लिए 'येरकुड नाम यूयर्काडू' कार्यक्रम शुरू किया। कार्यक्रम के दौरान 120 स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर जनता को पर्यावरणीय नुकसान के बारे में जागरूक किया गया।

  • सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध के लिए 10-दिवसीय कार्यक्रम
  • 120 स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम
  • पर्यावरणीय नुकसान पर जोर और वैकल्पिक उत्पादों का प्रचार

सलेम जिला प्रशासन ने येरकुड में 10-दिवसीय ‘येरकुड नाम यूयर्काडू’ कार्यक्रम के तहत सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के विरुद्ध जागरूकता फैलाने का निर्णय लिया है। इस पहल का उद्देश्य पर्यावरणीय क्षति के प्रति लोगों की संवेदनशीलता बढ़ाना और प्लास्टिक के विकल्प के रूप में कपड़े के बैग जैसे पर्यावरण‑अनुकूल विकल्पों को प्रोत्साहित करना है।

कार्यक्रम के अंतर्गत 120 स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, पम्फलेट वितरण और स्थानीय व्यापारियों के साथ संवाद आयोजित किया गया। डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर के. एलंबहवाथ ने बताया कि यह पहल 20 सितंबर को समाप्त होगी और यह येरकुड की प्राकृतिक सुंदरता को सुरक्षित रखने का एक महत्वपूर्ण कदम है।

येरकुड के पंजीकरण में, अधिकारियों ने पर्यटक आगंतुकों को भी प्लास्टिक से बचने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि पर्यटन स्थल के रूप में येरकुड का महत्व देखते हुए, न केवल स्थानीय लोग बल्कि पर्यटक भी इस प्रयास में शामिल होने चाहिए।

संगठनों, रेस्तरां, कैफ़े और बेकरी जैसे व्यवसायों की जाँच की गई और मालिकों को प्लास्टिक उपयोग के हानिकारक प्रभावों के बारे में सूचित किया गया। कार्यक्रम के दौरान पम्फलेट्स वितरित कर लोगों को सिंगल-यूज़ प्लास्टिक से बचने के लिए प्रेरित किया गया।

यह पहल सलेम की सतत विकास की दिशा में एक कदम है, जो पर्यटन और पर्यावरण दोनों को संतुलित रखने का प्रयास करती है। यह दिखाती है कि स्थानीय प्रशासन कैसे बड़े पर्यावरणीय मुद्दों के प्रति जागरूकता बढ़ा सकता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि येरकुड जैसी पर्यटक-प्रधान जगहों पर प्लास्टिक का उपयोग पर्यावरणीय क्षति का प्रमुख स्रोत है। यह अभियान न केवल स्थानीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाता है बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी प्लास्टिक उपयोग में कटौती के लिए एक मिसाल स्थापित करता है।

"येरकुड में यह पहल पर्यावरणीय संरक्षण और सतत पर्यटन दोनों को एक साथ जोड़ती है, जो भविष्य के लिए एक मॉडल साबित हो सकता है।"
Did You Know?: भारत में 1 किलोग्राम प्लास्टिक उत्पादन के लिए लगभग 1.5 किलोग्राम जीवाश्म ईंधन का उपयोग होता है।

Frequently Asked Questions

  • सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर यह अभियान किस अवधि तक चलेगा?
  • येरकुड में कौन-कौन से वैकल्पिक उत्पादों को प्रोत्साहित किया जा रहा है?