कोयंबटूर की एक कंपनी ने जल निकायों को नुकसान पहुँचाने वाली जलकुंभी को उपयोगी मल्चिंग सामग्री और मूल्यवर्धित उत्पादों में बदलने के लिए एक अभिनव परीक्षण परियोजना शुरू की है।
मुख्य बातें
- कोयंबटूर स्थित Recompose Recycling ने जलकुंभी को मल्चिंग सामग्री में बदलने का परीक्षण शुरू किया।
- यह पहल WWF-India और Noyyalaaru Trust के सहयोग से सुलूर बिग टैंक में की गई।
- श्रेड किया हुआ जलकुंभी नारियल किसानों के लिए सिंचाई लागत कम करने में मददगार होगा।
- एक मशीन प्रतिदिन 5 से 8 टन जलकुंभी को प्रोसेस कर सकती है।
कोयंबटूर स्थित एक कचरा प्रबंधन और रीसाइक्लिंग विशेषज्ञ कंपनी ने जल निकायों के लिए खतरा बनी जलकुंभी (Water Hyacinth) को उपयोगी बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। Recompose Recycling Private Limited ने एक परीक्षण परियोजना शुरू की है, जिसके तहत इस आक्रामक पौधे को मशीन द्वारा श्रेडिड (shredded) करके मल्चिंग सामग्री में बदला जा रहा है।
इस महत्वपूर्ण पहल का परीक्षण शनिवार को सुलूर बिग टैंक में किया गया। इस दौरान WWF-India और Noyyalaaru Trust ने भी इस अभियान में हाथ मिलाया। कार्यक्रम के दौरान सुलूर के विधायक एन.एम. सुकुमार भी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस नवाचार की सराहना की।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जलकुंभी का प्रबंधन वर्तमान में सरकारों के लिए एक बड़ी आर्थिक चुनौती है। आमतौर पर, सरकारें इसे हटाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करती हैं और फिर इसे खाली जमीन पर फेंक देती हैं। लेकिन यह नया तरीका कचरे को संसाधन में बदल रहा है।
Recompose Recycling के संस्थापक सी. प्रशांत के अनुसार, श्रेडिड की गई जलकुंभी नारियल के किसानों के लिए उत्कृष्ट मल्चिंग सामग्री साबित हो सकती है, जो मिट्टी की नमी बनाए रखकर सिंचाई की आवश्यकता को कम करेगी। इसके अलावा, राजमार्ग विभाग भी सड़क किनारे लगे पौधों के लिए इसका उपयोग कर सकता है।
जलकुंभी को केवल कचरा मानकर फेंकने के बजाय, इसे जैविक खाद और मल्चिंग में बदलना पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए गेम-चेंजर है।
कंपनी की योजना भविष्य में जलकुंभी से ब्रिकेट (briquettes) बनाने की भी है। वर्तमान में, तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय में इसके प्रभाव की जांच के लिए प्रयोगशाला परीक्षण किए जा रहे हैं ताकि इसकी प्रभावशीलता को प्रमाणित किया जा सके।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
जलकुंभी एक आक्रामक प्रजाति है जो पानी की सतह को पूरी तरह ढक लेती है, जिससे ऑक्सीजन का स्तर गिर जाता है और जलीय जीवन खतरे में पड़ जाता है। दशकों से, इसके नियंत्रण के लिए केवल यांत्रिक निष्कासन पर निर्भरता रही है, जो अत्यधिक खर्चीला है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: जलकुंभी को मल्च के रूप में उपयोग करने का क्या लाभ है?
उत्तर: यह मिट्टी की नमी बनाए रखता है, जिससे सिंचाई के खर्च में कमी आती है और धीरे-धीरे यह जैविक खाद में बदल जाता है।
प्रश्न 2: एक मशीन एक दिन में कितनी जलकुंभी संसाधित कर सकती है?
उत्तर: एक एकल श्रेडर मशीन प्रतिदिन लगभग पांच से आठ टन जलकुंभी को प्रोसेस करने में सक्षम है।