कोयंबटूर नगर निगम ने वेल्लोर डंपयार्ड में कचरे के भीतर छिपी गर्मी का पता लगाने के लिए साप्ताहिक थर्मल ड्रोन निगरानी शुरू करने का निर्णय लिया है। यह कदम कचरे में लगने वाली भीषण आग को रोकने के लिए एक निवारक उपाय के रूप में देखा जा रहा है।
- वेल्लोर डंपयार्ड में कचरे के भीतर छिपी गर्मी (heat pockets) का पता लगाने के लिए थर्मल ड्रोन का उपयोग किया जाएगा।
- यह निगरानी साप्ताहिक आधार पर की जाएगी ताकि आग लगने से पहले ही उसे रोका जा सके।
- यदि तापमान 75°C तक पहुँचता है, तो उस क्षेत्र को 'जोखिम क्षेत्र' घोषित कर खुदाई और पानी का छिड़काव किया जाएगा।
कोयंबटूर के वेल्लोर डंपयार्ड में कचरे के ढेर से उठने वाली आग एक गंभीर समस्या बनी हुई है। इस समस्या से निपटने के लिए, कोयंबटूर नगर निगम ने अब अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लेने का निर्णय लिया है। निगम अब डंपयार्ड में साप्ताहिक थर्मल ड्रोन निगरानी (Thermal Drone Monitoring) आयोजित करने की योजना बना रहा है। इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य कचरे के ढेर के भीतर छिपे 'हीट पॉकेट्स' या गर्मी के केंद्रों की पहचान करना है, जो भविष्य में भीषण आग का कारण बन सकते हैं।
नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, इस साल मार्च, अप्रैल और मई के दौरान, जब तापमान काफी अधिक था, एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में थर्मल इमेजिंग सेंसर से लैस ड्रोन का उपयोग किया गया था। इस परीक्षण के दौरान, ड्रोन ने डंपयार्ड के उन विशिष्ट हिस्सों की पहचान करने में मदद की जहाँ तापमान असामान्य रूप से अधिक था। प्राप्त डेटा के आधार पर, निगम ने तुरंत मिट्टी खोदने वाली मशीनों (earthmovers) को तैनात किया और तापमान कम करने के लिए पानी का छिड़काव किया।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि शहरी ठोस कचरा प्रबंधन में थर्मल निगरानी एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है। वेल्लोर डंपयार्ड में कचरे के ढेर लगभग 15 से 20 फीट गहरे हैं, जहाँ गर्मी आसानी से फंस जाती है। बिना उचित निगरानी के, ये आंतरिक ताप बिंदु अचानक भीषण आग का रूप ले लेते हैं, जैसा कि 23 अगस्त को हुआ था, जब डंपयार्ड में लगी आग दो दिनों तक सुलगती रही।
थर्मल निगरानी कचरे के ढेर के अंदर गर्मी को आग के रूप में दिखने से पहले ही पकड़ने में मदद करती है।
सिमैटिक्स (Cymatics) के सीईओ एल. गोपीनाथ ने बताया कि यह प्रणाली थर्मल डेटा उत्पन्न करेगी और भौगोलिक निर्देशांकों (geographical coordinates) का उपयोग करके डैशबोर्ड पर हॉटस्पॉट के स्थानों को रिकॉर्ड करेगी। इससे अधिकारियों को यह भी पता चलेगा कि क्या कोई हॉटस्पॉट नया है या किसी ऐसे स्थान पर बार-बार हो रहा है जहाँ पहले भी तापमान अधिक पाया गया था।
यह तकनीक एक 'अर्ली-वार्निंग सिस्टम' के रूप में कार्य करेगी। जब भी तापमान 75°C के करीब पहुँचेगा, उस क्षेत्र को संभावित अग्नि-जोखिम क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया जाएगा। इसके बाद, लक्षित निवारक कार्रवाई के तहत जल टैंकरों और अग्निशमन उपकरणों को तुरंत तैनात किया जाएगा।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: थर्मल ड्रोन का उपयोग क्यों किया जा रहा है?
उत्तर: कचरे के ढेर के भीतर छिपी गर्मी का पता लगाने के लिए ताकि आग लगने से पहले ही उसे रोका जा सके।
प्रश्न 2: किस तापमान पर अलर्ट जारी किया जाएगा?
उत्तर: यदि कचरे के भीतर का तापमान 75°C के करीब पहुँचता है, तो उसे जोखिम क्षेत्र माना जाएगा।