शिवमोग्गा के त्यावरेकोप्पा टाइगर और लायन सफारी में 17 वर्षीय बाघिन दशमी ने वृद्धावस्था और स्वास्थ्य जटिलताओं के कारण दम तोड़ दिया।

  • 17 वर्षीय बाघिन दशमी का शिवमोग्गा सफारी में निधन।
  • मृत्यु का कारण वृद्धावस्था संबंधी जटिलताएं और पक्षाघात (Paraplegia) बताया गया।
  • दशमी का जन्म 2009 में विजया दशमी के अवसर पर हुआ था।
  • चिड़ियाघर में अब केवल सात बाघ शेष बचे हैं।

कर्नाटक के शिवमोग्गा स्थित त्यावरेकोप्पा टाइगर और लायन सफारी से एक दुखद खबर सामने आई है। सफारी की प्रतिष्ठित बाघिन, दशमी, का रविवार को निधन हो गया। 17 वर्षीय दशमी पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही थी और अंततः वृद्धावस्था से जुड़ी जटिलताओं के कारण उसने अंतिम सांस ली।

चिड़ियाघर के कार्यकारी निदेशक वी.एम. अमरक्षरा द्वारा जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, दशमी की मृत्यु सुबह लगभग 11:25 बजे हुई। विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया कि बाघिन को अचानक पक्षाघात (paraplegia) की समस्या हो गई थी, जो वृद्धावस्था के कारण उत्पन्न हुई थी। पिछले 10 दिनों से उसे गहन चिकित्सा उपचार दिया जा रहा था, लेकिन स्थिति बिगड़ती गई और अंततः मल्टी-ऑर्गन फेलियर के कारण उसकी मृत्यु हो गई।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

दशमी का सफारी के इतिहास में एक विशेष स्थान था। उसका जन्म 19 अक्टूबर 2009 को विजया दशमी के पावन पर्व के अवसर पर हुआ था। वह उसी दिन पैदा हुए दो बाघों में से एक थी। उसका साथी बाघ, विजया, भी फरवरी 2025 में काल के गाल में समा गया था। दशमी का जीवन सफारी के संरक्षण प्रयासों और वन्यजीवों के प्रति जनमानस के जुड़ाव का प्रतीक रहा है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह के प्रतिष्ठित वन्यजीवों का जाना न केवल एक स्थानीय क्षति है, बल्कि यह चिड़ियाघर के प्रजनन और संरक्षण कार्यक्रमों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मोड़ है। बाघों की घटती संख्या सफारी के पारिस्थितिक संतुलन और भविष्य के संरक्षण लक्ष्यों के लिए चिंता का विषय हो सकती है।

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, वृद्ध बाघों में अचानक होने वाला पक्षाघात एक गंभीर स्थिति है जो उनके जीवन के अंतिम चरण को अत्यंत चुनौतीपूर्ण बना देती है।

मृत्यु के कारणों की सटीक पुष्टि के लिए सोमवार को एक विस्तृत पोस्टमार्टम किया जाएगा। इस टीम में शिवमोग्गा पशु चिकित्सा महाविद्यालय, बेंगलुरु के हेब्बल स्थित पशु स्वास्थ्य संस्थान और चिड़ियाघर के पशु चिकित्सा अधिकारियों के विशेषज्ञ शामिल होंगे।

दशमी के जाने के बाद, अब सफारी में केवल सात बाघ बचे हैं, जिनमें पाँच मादा (निवेदिता, पूर्णिमा, सीता, श्रावणी और रोहिणी) और दो नर (भद्रा और विक्रम) शामिल हैं।

Did You Know?: बाघों की आयु प्राकृतिक वातावरण में लगभग 10-15 वर्ष होती है, लेकिन चिड़ियाघर जैसे संरक्षित वातावरण में वे 20 वर्ष तक जीवित रह सकते हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: बाघिन दशमी की मृत्यु का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर: दशमी की मृत्यु वृद्धावस्था से जुड़ी जटिलताओं और अचानक हुए पक्षाघात (Paraplegia) के कारण हुई।

प्रश्न 2: अब शिवमोग्गा सफारी में कितने बाघ बचे हैं?
उत्तर: दशमी के निधन के बाद अब सफारी में कुल सात बाघ शेष हैं।