पेरम्बालुर जिला प्रशासन ने पर्यावरण और भूजल संरक्षण के लिए आक्रामक 'सीमाई करुवेलम' प्रजाति के पेड़ों को हटाने के अभियान में तेजी ला दी है। मद्रास उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद, जल निकायों और सरकारी भूमि से इन पेड़ों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
- मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश के बाद पेरम्बालुर में आक्रामक पेड़ों को हटाने का अभियान शुरू।
- जल निकायों और सरकारी पोरोमबोक भूमि को प्राथमिकता दी जा रही है।
- निजी भूमि पर इन पेड़ों को रखने वाले मालिकों को नोटिस जारी किए जाएंगे।
- अब तक 110 एकड़ से अधिक भूमि से इन पेड़ों को हटाया जा चुका है।
तमिलनाडु के पेरम्बालुर जिले में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, जिला प्रशासन ने आक्रामक और विदेशी प्रजाति के सीमाई करुवेलम (Prosopis juliflora) पेड़ों को हटाने के अभियान को नई गति दी है। यह निर्णय मद्रास उच्च न्यायालय के उस निर्देश के बाद लिया गया है, जिसमें पर्यावरण और भूजल स्तर की सुरक्षा के लिए इन हानिकारक प्रजातियों को हटाने पर जोर दिया गया था।
प्रशासन ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए पेड़ों की गिनती (enumeration) पूरी कर ली है। वर्तमान में, अभियान का प्राथमिक ध्यान जल निकायों (waterbodies) से इन पेड़ों को हटाने पर है, क्योंकि ये पेड़ पानी के स्रोतों को सोख लेते हैं और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुँचाते हैं। जल संसाधन विभाग और ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज विभाग ने अपने संबंधित क्षेत्रों से इन पेड़ों को हटाने का काम शुरू कर दिया है।
अब तक की प्रगति
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस अभियान के तहत महत्वपूर्ण प्रगति देखी गई है। जल संसाधन विभाग ने अब तक अपनी 79 एकड़ भूमि से इन पेड़ों को सफलतापूर्वक हटा दिया है। वहीं, ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज विभाग ने अपनी 32.50 एकड़ भूमि से इस आक्रामक प्रजाति का सफाया किया है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि सीमाई करुवेलम जैसे आक्रामक पौधे स्थानीय वनस्पतियों को खत्म कर देते हैं और भूजल स्तर को गंभीर रूप से कम कर देते हैं।
प्रशासनिक रुख और भविष्य की योजना
पेरम्बालुर की कलेक्टर शरण्या अरी ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन हिंदू धार्मिक और धर्मार्थendowments (HR&CE), ग्रामीण विकास, जल संसाधन और अन्य सरकारी विभागों की भूमि से इन पेड़ों को हटाने को प्राथमिकता दे रहा है। कलेक्टर ने हाल ही में सभी सरकारी विभागों के अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की ताकि इस अभियान को व्यापक बनाया जा सके।
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह कदम केवल वृक्षारोपण के बारे में नहीं है, बल्कि यह जल सुरक्षा के लिए एक रणनीतिक युद्ध है। यदि इन पेड़ों को नहीं हटाया गया, तो क्षेत्र में सूखे की स्थिति और गंभीर हो सकती है।
यह क्यों मायने रखता है
सीमाई करुवेलम या प्रोसोपिस जूलिफ्लोरा एक ऐसी प्रजाति है जो बहुत तेजी से फैलती है और मिट्टी से अत्यधिक मात्रा में पानी खींच लेती है। इससे न केवल स्थानीय पौधों को पोषण नहीं मिल पाता, बल्कि कुओं और तालाबों का जल स्तर भी गिर जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: सीमाई करुवेलम पेड़ पर्यावरण के लिए हानिकारक क्यों हैं?
उत्तर: ये पेड़ अत्यधिक पानी सोखते हैं और स्थानीय जैव विविधता को नष्ट कर देते हैं।
प्रश्न 2: क्या निजी संपत्ति मालिकों पर भी कार्रवाई होगी?
उत्तर: हाँ, जिन निजी जमीनों पर इन पेड़ों की मौजूदगी पाई जाएगी, वहां के मालिकों को उन्हें हटाने के लिए नोटिस जारी किए जाएंगे।