बेंगलुरु में एक निजी पर्यावरण प्रयोगशाला के औचक निरीक्षण के दौरान डेटा में हेरफेर, अवैध कचरा निपटान और बिना वैध अनुमति के संचालन जैसी गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। कर्नाटक के मंत्री रामलिंग रेड्डी ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।

  • निजी प्रयोगशाला में डेटा और विश्लेषण रिपोर्ट में हेरफेर के सबूत मिले।
  • वैध KSPCB अनुमति के बिना और एक्सपायर्ड परमिट के साथ संचालन जारी।
  • पर्यावरण के अनुकूल कचरा प्रबंधन के बजाय खुले गड्ढों में कचरा फेंका जा रहा था।
  • सैंपल कलेक्शन और टेस्टिंग शुल्क में CPCB के मानकों से भारी अंतर पाया गया।

बेंगलुरु: कर्नाटक के वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्री रामलिंग रेड्डी ने शनिवार को बेंगलुरु की एक निजी पर्यावरण प्रयोगशाला, 'बेंगलुरु एनालिटिक्स एंड रिसर्च लेबोरेटरी प्राइवेट लिमिटेड' में औचक निरीक्षण के दौरान चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। कर्नाटक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (KSPCB) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ किए गए इस निरीक्षण में स्टाफ की कमी, नियामक मंजूरी में खामी और कचरा निपटान में गंभीर लापरवाही सामने आई है।

निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि प्रयोगशाला ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF) से तीन विश्लेषकों (analysts) की तैनाती के आधार पर अनुमति ली थी, लेकिन वास्तव में केवल एक ही विश्लेषक कार्यरत था। अन्य दो विश्लेषक पिछले पांच महीनों से अनुपस्थित थे। इसके अलावा, प्रयोगशाला का 'स्थापना हेतु सहमति' (Consent for Establishment) प्रमाणपत्र 2025 में ही समाप्त हो चुका था, फिर भी यह इकाई अवैध रूप से कार्य कर रही थी।

पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा

जांच में सबसे चिंताजनक पहलू प्रयोगशाला द्वारा कचरा प्रबंधन का तरीका रहा। वैज्ञानिक गतिविधियों से उत्पन्न होने वाले कचरे के लिए कोई उचित व्यवस्था होने के बजाय, उसे कथित तौर पर एक खुले गड्ढे में फेंका जा रहा था। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि स्थानीय पर्यावरण और भूजल के लिए भी एक बड़ा खतरा पैदा कर सकता है।

मंत्री रामलिंग रेड्डी ने स्पष्ट किया कि इस प्रयोगशाला की रिपोर्ट संदिग्ध है और इस मामले की गहन जांच की जाएगी।

BozokMedia विश्लेषण: डेटा और शुल्क में भारी विसंगतियां

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, प्रयोगशाला द्वारा लिए जा रहे शुल्क और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के निर्धारित दरों के बीच एक बड़ा अंतर पाया गया है। उदाहरण के लिए, STP यूनिट के पानी के नमूने के विश्लेषण के लिए CPCB की दर ₹5,000 है, जबकि लैब ने केवल ₹1,000 लिए। इसी तरह, कारखानों से हवा के प्रदूषण के नमूनों के लिए CPCB की दर ₹13,000 है, लेकिन लैब के रिकॉर्ड में यह मात्र ₹650 दर्ज है।

इसके अतिरिक्त, शोर के स्तर (noise-level) के मापन के दौरान एकत्र किए गए फील्ड डेटा और प्रयोगशाला की अंतिम रिपोर्ट के आंकड़ों में भी अंतर पाया गया है। मंत्री रेड्डी ने कहा कि यह निरीक्षण एक 'टेस्ट केस' के रूप में कार्य करेगा और राज्य की अन्य 50 प्रयोगशालाओं के लिए एक चेतावनी होगी।

ऐतिहासिक संदर्भ

भारत में पर्यावरण प्रयोगशालाओं का विनियमन अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इनकी रिपोर्ट औद्योगिक उत्सर्जन और प्रदूषण नियंत्रण के निर्णयों का आधार बनती है। पिछले कुछ वर्षों में, डेटा हेरफेर के मामलों में वृद्धि हुई है, जिससे नियामक संस्थाओं पर सख्त निगरानी का दबाव बढ़ गया है।

क्या आप जानते हैं?: प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा निर्धारित मानक सुनिश्चित करते हैं कि औद्योगिक कचरा और उत्सर्जन पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं।

Frequently Asked Questions

1. मंत्री ने किन अनियमितताओं को उजागर किया?
मंत्री ने अवैध कचरा निपटान, स्टाफ की कमी, एक्सपायर्ड परमिट और डेटा में हेरफेर जैसी अनियमितताओं को उजागर किया है।

2. क्या अन्य प्रयोगशालाओं की भी जांच होगी?
हाँ, मंत्री ने KSPCB को कर्नाटक की अन्य सभी 50 पर्यावरण प्रयोगशालाओं का गहन निरीक्षण करने का निर्देश दिया है।