कर्नाटक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बेंगलुरु में पीओपी से बनी 3,000 से अधिक गणेश मूर्तियों को जब्त किया है, लेकिन उनके सुरक्षित निपटान को लेकर अधिकारियों के पास कोई ठोस योजना नहीं है।
- बेंगलुरु में 3,000 से अधिक प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) की मूर्तियाँ जब्त की गईं।
- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (KSPCB) मूर्तियों के सुरक्षित निपटान की योजना बनाने में विफल रहा है।
- विशेषज्ञों के अनुसार, मूर्तियों पर इस्तेमाल किया जाने वाला जहरीला पेंट जल निकायों के लिए सबसे बड़ा खतरा है।
बेंगलुरु: कर्नाटक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (KSPCB) ने नगर पालिका अधिकारियों और पुलिस के साथ मिलकर एक बड़े अभियान के तहत प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) से बनी 3,000 से अधिक गणेश मूर्तियों को जब्त किया है। हालांकि, इस बड़ी सफलता के बाद अब एक नई चुनौती सामने आई है—इन हजारों मूर्तियों का क्या किया जाए?
KSPCB के सदस्य सचिव, आर. गोकुल ने स्वीकार किया कि विभाग अभी भी इन मूर्तियों के निपटान के लिए कोई योजना बनाने में असमर्थ है। उन्होंने बताया कि जिन गोदामों में बड़ी संख्या में मूर्तियाँ पाई गईं, उन्हें पूरी तरह से सील कर दिया गया है। अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ये मूर्तियाँ विक्रेताओं तक न पहुँचें, जिससे बाजार में इनकी मांग कम हो सके।
क्यों यह महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल कचरा प्रबंधन का मुद्दा नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। कर्नाटक में अधिकांश मूर्तियाँ महाराष्ट्र, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश से आती हैं। यदि प्रशासन इन मूर्तियों को सही ढंग से प्रबंधित नहीं करता है, तो यह अभियान अपने ही उद्देश्य में विफल हो सकता है और पर्यावरण के लिए एक नया संकट पैदा कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पीओपी से अधिक खतरनाक वह जहरीला पेंट है जो इन मूर्तियों को सजाने के लिए उपयोग किया जाता है।
पर्यावरणविद् और 'फ्रेंड्स ऑफ लेक्स' के सह-संस्थापक वी. रामप्रसाद ने सुझाव दिया है कि इन मूर्तियों को पुनर्चक्रित (recycle) किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि पीओपी को पाउडर के रूप में उपयोग किया जा सकता है, जो कि जिप्सम के समान है और मिट्टी के पोषण में मदद कर सकता है। हालांकि, सबसे बड़ी चुनौती मूर्तियों पर लगे रासायनिक रंगों को अलग करना है, जो पानी में मिलकर जलीय जीवन को नष्ट कर देते हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
वर्षों से, गणेश चतुर्थी के दौरान जल निकायों में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे थे। पिछले वर्षों में ध्यान केवल लोगों को मिट्टी की मूर्तियों के उपयोग के लिए प्रेरित करने पर था, लेकिन इस वर्ष प्रशासन ने सीधे आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) पर प्रहार किया है, जिससे मूर्तियों की भारी जब्ती हुई है।
Frequently Asked Questions
1. पीओपी मूर्तियाँ पर्यावरण के लिए क्यों हानिकारक हैं?
पीओपी पानी में घुलता नहीं है और मूर्तियों पर लगा रासायनिक पेंट जहरीला होता है, जो पानी की गुणवत्ता और मछलियों को नुकसान पहुँचाता है।
2. क्या जब्त की गई मूर्तियों का पुन: उपयोग किया जा सकता है?
हाँ, विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि पीओपी को जिप्सम के रूप में मिट्टी के लिए उपयोग किया जा सकता है, बशर्ते पेंट को सावधानी से हटाया जाए।