तिरुपुर के उद्योगपतियों द्वारा संचालित 'वेत्री ट्रस्ट' ने ओराथुपलयम जलाशय बेसिन में 15,000 सूखा-प्रतिरोधी पौधों का रोपण किया है। यह पहल औद्योगिक प्रदूषण से हुए नुकसान की भरपाई और पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करने का एक बड़ा प्रयास है।
- ओराथुपलयम जलाशय बेसिन में 15,000 नए सूखा-प्रतिरोधी देशी प्रजातियों के पौधे लगाए गए।
- 'वनथुक्कुल तिरुपुर प्रोजेक्ट' के तहत अब तक 25 लाख पेड़ लगाए जा चुके हैं।
- यह पहल डाईंग और ब्लीचिंग इकाइयों द्वारा किए गए प्रदूषण की भरपाई का एक प्रयास है।
- TDS स्तर 6,000 से घटकर 1,500 पर आ गया है, जिससे कृषि में सुधार हुआ है।
तमिलनाडु के तिरुपुर जिले में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। 'वेत्री ट्रस्ट' के तत्वावधान में संचालित 'वनथुक्कुल तिरुपुर प्रोजेक्ट' के तहत, शनिवार को ओराथुपलयम जलाशय बेसिन में 15,000 नए पौधे लगाए गए। यह वृक्षारोपण अभियान 100 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसे पहले हानिकारक प्रोसोपिस जूलिफ्लोरा (Prosopis juliflora) से मुक्त किया गया था।
यह परियोजना केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तिरुपुर के प्रसिद्ध कपड़ा उद्योग द्वारा अतीत में किए गए पर्यावरणीय नुकसान की एक 'प्रायश्चित' (reparation) भी है। उद्योगपतियों का मानना है कि जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) प्रणाली लागू होने से पहले, डाईंग और ब्लीचिंग इकाइयों ने ओराथुपलयम बांध के पानी को गंभीर रूप से प्रदूषित किया था।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह पहल औद्योगिक विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाने का एक वैश्विक मॉडल बन सकती है। जलाशय में पानी की गुणवत्ता में सुधार न केवल जैव विविधता को बहाल कर रहा है, बल्कि स्थानीय किसानों की आजीविका को भी सुरक्षित कर रहा है।
प्रदूषण से प्रभावित किसानों के संघ के अध्यक्ष के.सी. कुलंदास्वामी के अनुसार, TDS स्तर में 6,000 से 1,500 तक की गिरावट कृषि के लिए एक वरदान साबित हुई है।
इस अभियान में स्थानीय समुदायों और युवाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही है। कांगयम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, कुमारगुरु संस्थानों और तिरुपुर जयभाभाई सरकारी स्कूल के सैकड़ों छात्रों ने स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर इस कार्य में योगदान दिया। पौधों का चयन SACON (सालिम अली सेंटर फॉर ऑर्निथोलॉजी एंड नेचुरल हिस्ट्री) द्वारा निर्धारित 50 सूखा-प्रतिरोधी और जल-अनुकूल देशी प्रजातियों की सूची से किया गया है।
परियोजना का उद्देश्य न केवल हरियाली बढ़ाना है, बल्कि कार्बन पृथक्करण (Carbon Sequestration) के माध्यम से तिरुपुर को एक हरित शहर के रूप में स्थापित करना है। वन्यजीव संरक्षणवादी के. कालीदासन ने इस अवसर पर पश्चिमी घाट के क्षेत्रों को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील घोषित करने की मांग भी उठाई।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: इस वृक्षारोपण अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका उद्देश्य ओराथुपलयम जलाशय के पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करना, स्थानीय जैव विविधता को बढ़ाना और औद्योगिक प्रदूषण के प्रभावों को कम करना है।
प्रश्न 2: कौन सी प्रजातियों के पौधे लगाए जा रहे हैं?
उत्तर: केवल वही 50 देशी प्रजातियां चुनी गई हैं जो सूखे को झेलने में सक्षम हैं और स्थानीय पक्षियों की आबादी को बढ़ाने में मदद करती हैं।