एक असम के संरक्षणवादी ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त हाई‑पावरड कमेटी से चार कैप्टिव हाथियों के तमिलनाडु स्थानांतरण को रोकने और पाँचवीं हाथी दुर्गा की स्थिति की जांच करने का आग्रह किया। यह कदम असम में बढ़ते हाथी व्यापार और अनियंत्रित ट्रांसफ़र को रोकने के लिए उठाया गया है।
- रहित्य चौधरी ने हाई‑पावरड कमेटी को चार हाथियों के स्थानांतरण को रोकने का लिखित अनुरोध किया।
- दुर्गा नामक पाँच‑साल की हाथी पहले ही मदुरै में मीनाक्षी मंदिर में पहुँच गई है।
- हाथी व्यापार के पीछे छिपी अनियमित बिक्री को उजागर करने के लिए व्यापक जांच की माँग की गई।
गुवाहाटी (द हिन्दू) – असम के एक प्रमुख संरक्षणवादी रोहित चौधरी ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई‑पावरड कमेटी को एक पत्र लिखकर चार कैप्टिव हाथियों को असम से तमिलनाडु में स्थानांतरित करने को रोकने का आग्रह किया। यह अनुरोध 11 सितंबर 2026 को कमेटी के चेयरपर्सन को भेजा गया।
स्थानांतरित किए जा रहे चार हाथियों के नाम हिरालाल (8 वर्ष), शिवा (6 वर्ष), रूपसिंग (13 वर्ष) और बिज़ुली (5 वर्ष) हैं। हिरालाल और शिवा को तिरुवनमलाई के अरुल्मिगु अरुणाचलेश्वर मंदिर में, रूपसिंग को नागपट्टिनाम के वैथेेश्वरन कोइल में स्थित श्री वैद्यनाथ स्वामी मंदिर में और बिज़ुली को कंचीपुरम के श्री कांची कामाकोटी गजाशाला में भेजा जाना है।
पहले ही पाँच‑साल की महिला हाथी दुर्गा को मदुरै के मीनाक्षी अम्मन मंदिर में स्थानांतरित किया जा चुका है। चौधरी ने इस कदम को असम में हाथी संरक्षण के नियमों की उपेक्षा और संभावित बिक्री के रूप में देख कर गहरी चिंता जताई।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
असम में 750 से अधिक हाथियों के निजी मालिक हैं, जिनमें से 300 से अधिक के पास आधिकारिक स्वामित्व प्रमाणपत्र नहीं है। पिछले दशकों में असम से अन्य राज्यों में कई हाथियों का अनियमित ट्रांसफ़र हुआ है, जिसे अक्सर ‘ट्रांसफ़र’ के नाम पर बिक्री माना जाता है। इस प्रवृत्ति को नियंत्रित करने के लिए त्रिपुरा हाई कोर्ट ने हाई‑पावरड कमेटी को अधिकार दिए थे, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने विस्तारित किया।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that unchecked inter‑state transfers threaten not only the welfare of individual elephants but also the broader ecological balance in Assam, where human‑elephant conflict is already a critical issue. A transparent investigation could set a precedent for stricter wildlife trade regulations across India.
"हाथियों की असली कीमत उनकी जीवंतता में है, न कि उनके व्यापार में," कहा गया है एक प्रमुख वन्यजीव विशेषज्ञ ने।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या असम में सभी हाथियों के पास वैध स्वामित्व दस्तावेज़ हैं?
उत्तर: नहीं, लगभग 40% हाथियों के पास आधिकारिक प्रमाणपत्र नहीं हैं, जिससे उनका लेन‑देन अवैध बन सकता है।
प्रश्न 2: हाई‑पावरड कमेटी को इस मामले में क्या कदम उठाने चाहिए?
उत्तर: कमेटी को स्थानांतरण की वैधता, हाथियों की उत्पत्ति और उनके भविष्य के कल्याण की पूरी जाँच करनी चाहिए।