लद्दाख में पिछले एक दशक में त्सो कार झील के आकार में 70% की भारी कमी आई है। प्रशासन अब रुपशो खार्नाक ग्लेशियर के पानी को गुरुत्वाकर्षण के माध्यम से झील तक पहुँचाने की योजना बना रहा है।

  • लद्दाख की त्सो कार झील पिछले 10 वर्षों में 70% तक सिकुड़ गई है।
  • प्रशासन रुपशो खार्नाक ग्लेशियर के पानी का उपयोग करने की योजना बना रहा है।
  • पानी को गुरुत्वाकर्षण और प्राकृतिक ढलानों का उपयोग करके झील तक पहुँचाया जाएगा।

लद्दाख के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक चिंताजनक संकेत के बीच, प्रशासन ने क्षेत्र की महत्वपूर्ण झील, त्सो कार (Tso Kar), को पुनर्जीवित करने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। पिछले एक दशक में, जलवायु परिवर्तन और जल स्रोतों के सूखने के कारण इस झील के जल स्तर में लगभग 70% की भारी गिरावट देखी गई है, जिससे स्थानीय जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन पर संकट मंडरा रहा है।

इस संकट का समाधान करने के लिए, अधिकारियों ने एक ऐसे जल स्रोत की पहचान की है जिसका अब तक उपयोग नहीं किया गया है। यह स्रोत रुपशो खार्नाक (Rupsho Kharnak) ग्लेशियर की धारा है, जो समुद्र तल से लगभग 18,045 फीट की अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित है। इस ग्लेशियर से निकलने वाले पानी को झील की ओर मोड़ने के लिए एक जटिल इंजीनियरिंग दृष्टिकोण अपनाया जाएगा।

तकनीकी दृष्टिकोण और योजना

प्रस्तावित योजना के तहत, पानी को झील तक पहुँचाने के लिए भारी मशीनरी या पंपों के बजाय गुरुत्वाकर्षण (Gravity) का उपयोग किया जाएगा। पानी को प्राकृतिक गड्ढों और ढलानों की एक श्रृंखला के माध्यम से निर्देशित किया जाएगा, जिससे ऊर्जा की खपत न्यूनतम होगी और प्राकृतिक प्रवाह बना रहेगा। यह प्रक्रिया अत्यधिक ऊंचाई और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण चुनौतीपूर्ण है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि लद्दाख जैसे संवेदनशील उच्च-ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जल संकट केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय खाद्य सुरक्षा और पर्यटन अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ा खतरा है। यदि त्सो कार जैसी महत्वपूर्ण झीलों का अस्तित्व समाप्त हो जाता है, तो इससे पूरे क्षेत्र का सूक्ष्म जलवायु (micro-climate) बदल सकता है।

ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना और झीलों का सिकुड़ना हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक 'रेड अलर्ट' है।

ऐतिहासिक संदर्भ: लद्दाख की झीलें सदियों से स्थानीय समुदायों और प्रवासी पक्षियों के लिए जीवन रेखा रही हैं। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में बढ़ते तापमान के कारण ग्लेशियरों के पीछे हटने की गति तेज हुई है, जिससे जल निकायों के पुनर्भरण (recharge) की क्षमता कम हो गई है।

Did You Know?: त्सो कार झील लद्दाख की सबसे बड़ी नमक वाली झील है, जो अपने विशिष्ट पारिस्थितिकी तंत्र के लिए जानी जाती है।

Frequently Asked Questions

1. त्सो कार झील क्यों सिकुड़ रही है?
मुख्य रूप से जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने के कारण जल स्रोतों में कमी आ रही है।

2. नया पानी कहाँ से आएगा?
प्रशासन 18,045 फीट की ऊंचाई पर स्थित रुपशो खार्नाक ग्लेशियर की धारा का उपयोग करेगा।