पुडुचेरी की दूसरी सबसे बड़ी मीठे पानी की झील, बहुर झील, अवैध अतिक्रमण और बंद फीडर चैनलों के कारण तेजी से सिकुड़ रही है। किसानों और पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो क्षेत्र का जल स्तर और कृषि संकट में पड़ सकती है।

  • बहार झील का जल क्षेत्र अतिक्रमण और कृषि गतिविधियों के कारण तेजी से घट रहा है।
  • फीडर चैनलों में गाद (silt) जमा होने और खरपतवार बढ़ने से पानी का प्रवाह बाधित हो गया है।
  • राजस्व विभागों द्वारा झील के भीतर ही पट्टे जारी करने के गंभीर आरोप लगे हैं।
  • स्थानीय समुदायों द्वारा झील के विकेंद्रीकृत प्रबंधन की मांग की जा रही है।

पुडुचेरी की दूसरी सबसे बड़ी मीठे पानी की झील, बहार झील, वर्तमान में अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। लगभग 1,765 एकड़ में फैली यह झील क्षेत्र के लिए सिंचाई का एक प्रमुख स्रोत है, लेकिन अनियंत्रित खेती, अवैध अतिक्रमण और खराब रखरखाव वाले फीडर चैनलों के कारण इसका जल क्षेत्र लगातार कम हो रहा है। स्थानीय किसानों और पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि मानवीय हस्तक्षेप इस प्राकृतिक धरोहर को नष्ट कर रहा है।

जांच में पाया गया है कि झील के जल क्षेत्र के भीतर ही छोटे बांध, रास्ते और अन्य संरचनाएं बनाई गई हैं ताकि कृषि कार्यों को सुगम बनाया जा सके। सबसे गंभीर मुद्दा राजस्व विभागों द्वारा झील के भीतर ही 'पट्टे' (pattas) जारी करने का है। आरोप है कि पुडुचेरी और तमिलनाडु के राजस्व विभागों ने झील के जल क्षेत्र में ही 136 लोगों को खेती करने की अनुमति दे दी है, जिससे झील की जल संचयन क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

बहार झील का इतिहास अत्यंत प्राचीन है, माना जाता है कि यह चोल काल से भी पुरानी है। चोल शासकों के दौरान इस झील को गहरा किया गया था। किंवदंतियों के अनुसार, क्षेत्र में अकाल के दौरान 'बंगाली' नामक एक नर्तकी ने नहर निर्माण का खर्च उठाया था, जबकि उनकी बहन 'सिंगारी' ने तटबंधों (bunds) के निर्माण में मदद की थी। 1970 के दशक में, यह झील 1,740 एकड़ क्षेत्र की सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण थी।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि बहुर झील का क्षरण केवल एक स्थानीय पर्यावरणीय मुद्दा नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र की खाद्य सुरक्षा और भूजल स्तर को प्रभावित करने वाला एक बड़ा संकट है। यदि झील का जल क्षेत्र कम होता है, तो मानसून के दौरान वर्षा जल का संचयन नहीं हो पाएगा, जिससे आसपास के इलाकों में भूजल स्तर तेजी से गिरेगा।

झील के तल में खेती करने से मानसून के वर्षा जल को रोकने की इसकी क्षमता कम हो जाती है, जो सीधे तौर पर भूजल पुनर्भरण को प्रभावित करती है।

किसानों के समूह, 'बंगाली वैकल नीराधारा कूटमईप्पु' के अध्यक्ष वी. चंद्रशेखर के अनुसार, 1980 के बाद से झील की सफाई (desilting) का काम नहीं किया गया है। इसके परिणामस्वरूप, फीडर चैनलों में जलकुंभी (water hyacinth) और गाद जमा हो गई है, जिससे पानी का प्रवाह रुक गया है। इसके अतिरिक्त, अवैध मछली पकड़ने की गतिविधियों ने भी झील की संरचना को नुकसान पहुँचाया है।

विशेषताऐतिहासिक स्थिति (1970 के दशक)वर्तमान स्थिति
सिंचाई क्षेत्र (Ayacut)1,740 एकड़लगातार घट रहा है
रखरखाव प्रणालीसामुदायिक प्रबंधन (कुडीमरामथु)सरकारी उपेक्षा और अतिक्रमण
जल प्रवाहस्वच्छ फीडर चैनलगाद और खरपतवार से बाधित

स्थानीय निकायों ने मांग की है कि पुडुचेरी सरकार को जल निकायों के प्रबंधन का अधिकार स्थानीय टैंक संघों को सौंप देना चाहिए। उन्होंने एक अलग 'जल संसाधन विभाग' के गठन और 'भागीदारी सिंचाई प्रबंधन अधिनियम' लागू करने की भी वकालत की है ताकि भविष्य में ऐसी आपदाओं को रोका जा सके।

Did You Know?: बहुर झील का इतिहास चोल साम्राज्य के गौरवशाली जल प्रबंधन तंत्र से जुड़ा हुआ है।

Frequently Asked Questions

1. बहुर झील के सिकुड़ने का मुख्य कारण क्या है?
इसका मुख्य कारण अवैध अतिक्रमण, झील के भीतर कृषि गतिविधियां और फीडर चैनलों में गाद जमा होना है।

2. स्थानीय लोग सरकार से क्या मांग कर रहे हैं?
स्थानीय लोग जल निकायों के प्रबंधन के लिए एक विकेंद्रीकृत, समुदाय-आधारित प्रणाली और एक अलग जल संसाधन विभाग की मांग कर रहे हैं।