भारत में बढ़ती मोटापे की समस्या को देखते हुए, सरकार से उच्च वसा, चीनी और नमक वाले खाद्य पदार्थों पर 'हेल्थ टैक्स' लगाने की मांग की जा रही है। विशेषज्ञों ने पैकेज्ड फूड पर सख्त लेबलिंग और विज्ञापनों पर नियंत्रण का सुझाव दिया है।
मुख्य बातें
- भारत में कुपोषण के साथ-साथ मोटापे और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।
- संसदीय समिति ने पैकेज्ड फूड पर 'फ्रंट-ऑफ-पैक' पोषण लेबलिंग की सिफारिश की है।
- ICMR-NIN ने सरकार से उच्च वसा, चीनी और नमक वाले खाद्य पदार्थों पर स्वास्थ्य कर लगाने का सुझाव दिया है।
- कोलंबिया जैसे कई देशों ने पहले ही जंक फूड पर प्रभावी टैक्स लागू कर दिए हैं।
भारत वर्तमान में एक दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है। एक ओर जहां देश अभी भी कुपोषण और स्टंटिंग (नाटापन) से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर बदलती जीवनशैली के कारण मोटापे और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों (Non-communicable diseases) का ग्राफ तेजी से ऊपर जा रहा है। हालिया राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़े बताते हैं कि वयस्कों में अधिक वजन और मेटाबॉलिक स्थितियों में भारी वृद्धि हुई है।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, दो महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए हैं। पहला, संसदीय स्थायी समिति ने पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर अनिवार्य 'फ्रंट-ऑफ-पैक' पोषण लेबलिंग की सिफारिश की है, ताकि उपभोक्ता तुरंत देख सकें कि उत्पाद में कितनी चीनी या नमक है। दूसरा, 'लेट्स फिक्स आवर फूड' नामक एक राष्ट्रीय संघ ने सरकार से उच्च वसा, नमक और चीनी वाले खाद्य पदार्थों पर 'हेल्थ टैक्स' लगाने और उनके विज्ञापनों पर सख्त नियम बनाने का आग्रह किया है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में मोटापे का संकट केवल सौंदर्य का विषय नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल है। ICMR-NIN की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में 1.7 करोड़ से अधिक बच्चे और किशोर मोटापे से प्रभावित हैं, और 2030 तक यह संख्या 2.7 करोड़ तक पहुंच सकती है। यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली पर बोझ असहनीय हो जाएगा।
खाद्य पदार्थों पर टैक्स लगाना केवल राजस्व जुटाने का साधन नहीं है, बल्कि यह उपभोक्ताओं के व्यवहार को स्वस्थ दिशा में मोड़ने का एक सशक्त उपकरण है।
वैश्विक स्तर पर भी यह एक सफल मॉडल साबित हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 2017 के बाद से कम से कम 133 देशों ने नए स्वास्थ्य कर लागू किए हैं। उदाहरण के लिए, कोलंबिया ने 2023 में 'जंक फूड कानून' लागू किया, जहां टैक्स की दर 10% से बढ़कर 20% तक पहुंच गई। नॉर्वे, हंगरी और डेनमार्क जैसे देशों ने भी अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों पर कड़े कदम उठाए हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ
ऐतिहासिक रूप से, भारत का ध्यान मुख्य रूप से कैलोरी की कमी (कुपोषण) को दूर करने पर रहा है। हालांकि, पिछले दो दशकों में शहरीकरण और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों (Processed Foods) की आसान उपलब्धता ने पोषण संबंधी संक्रमण (Nutritional Transition) को जन्म दिया है, जिससे अब हम 'अति-पोषण' (Overnutrition) के युग में प्रवेश कर चुके हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. 'हेल्थ टैक्स' क्या है?
यह उन खाद्य पदार्थों पर लगाया जाने वाला अतिरिक्त कर है जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माने जाते हैं, जैसे अत्यधिक चीनी या नमक वाले स्नैक्स।
2. फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग से क्या फायदा होगा?
इससे उपभोक्ताओं को पैकेट के सामने ही तुरंत पता चल जाएगा कि भोजन कितना स्वस्थ या अस्वास्थ्यकर है, जिससे वे बेहतर चुनाव कर सकेंगे।