किंग्स कॉलेज लंदन के एक नए अध्ययन के अनुसार, मौजूदा स्वास्थ्य समस्याओं के साथ गर्भधारण करने वाली महिलाओं में गर्भपात का जोखिम 20% अधिक हो सकता है। शोध में मानसिक स्वास्थ्य और अन्य जटिलताओं पर भी गंभीर चेतावनी दी गई है।
- पुरानी बीमारियों के साथ गर्भावस्था शुरू करने से गर्भपात का जोखिम 20% बढ़ जाता है।
- दो या अधिक बीमारियों वाली महिलाओं में चिंता और अवसाद का खतरा चार गुना अधिक होता है।
- गंभीर मतली और उल्टी (Hyperemesis) का जोखिम 69% तक बढ़ सकता है।
- अध्ययन में 2.2 मिलियन से अधिक गर्भावस्था मामलों का विश्लेषण किया गया।
हाल ही में द लैंसेट पब्लिक हेल्थ (The Lancet Public Health) में प्रकाशित एक व्यापक अध्ययन ने मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में चिंताजनक निष्कर्ष प्रस्तुत किए हैं। किंग्स कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन से पता चलता है कि यदि कोई महिला पहले से मौजूद किसी लंबी अवधि की शारीरिक या मानसिक बीमारी के साथ गर्भवती होती है, तो उसे गर्भपात (Miscarriage) का 20% अधिक जोखिम होता है।
यह शोध केवल एक बीमारी तक सीमित नहीं है; शोधकर्ताओं ने पाया कि जैसे-जैसे बीमारियों की संख्या बढ़ती है, जटिलताओं का खतरा भी तेजी से बढ़ता है। उदाहरण के लिए, तीन या अधिक पुरानी स्थितियों वाली महिलाओं में वेनस थ्रोम्बोएम्बोलिज्म (रक्त के थक्के जमना) का जोखिम उन महिलाओं की तुलना में साढ़े तीन गुना से अधिक होता है जिन्हें कोई पुरानी बीमारी नहीं है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह शोध स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी है। यह केवल चिकित्सा डेटा नहीं है, बल्कि यह इंगित करता है कि प्रसवपूर्व देखभाल (Antenatal care) को अधिक एकीकृत और व्यक्तिगत बनाने की तत्काल आवश्यकता है। मौजूदा स्वास्थ्य स्थितियों को केवल एक बीमारी के रूप में नहीं, बल्कि प्रसव के दौरान समग्र जोखिम के संकेतक के रूप में देखा जाना चाहिए।
पुरानी बीमारियों का समूह प्रसवपूर्व जोखिम के एक स्वतंत्र संकेतक के रूप में पहचाना जाना चाहिए, जिससे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य सेवाओं को एक साथ जोड़ा जा सके।
अध्ययन के अनुसार, जिन महिलाओं में दो या अधिक पूर्व-मौजूद स्थितियां होती हैं, उनमें चिंता (Anxiety) और अवसाद (Depression) का खतरा चार गुना अधिक पाया गया है। इसके अतिरिक्त, गंभीर मतली और उल्टी (Hyperemesis) का जोखिम 69% तक बढ़ जाता है। शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि प्रसवपूर्व मानसिक स्वास्थ्य सहायता को एक प्राथमिकता बनाना अनिवार्य है।
यह अध्ययन 2000 से 2022 के बीच इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड के पांच डेटासेट में दर्ज 2.2 मिलियन से अधिक गर्भधारण और जन्म घटनाओं का विश्लेषण करके तैयार किया गया है। डेटा की विशालता इस निष्कर्ष को वैज्ञानिक रूप से अत्यंत विश्वसनीय बनाती है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: किन महिलाओं को अधिक जोखिम है?
उत्तर: वे महिलाएं जो पहले से मौजूद शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों (जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप या मानसिक स्वास्थ्य विकार) के साथ गर्भवती होती हैं।
प्रश्न 2: इस अध्ययन का मुख्य सुझाव क्या है?
उत्तर: शोध का सुझाव है कि प्रसवपूर्व देखभाल के दौरान शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों की जांच एक साथ की जानी चाहिए और सेवाओं को एकीकृत किया जाना चाहिए।