केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुपप्रिया पटेल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भारत की विशाल जनसंख्या और भौगोलिक चुनौतियों का समाधान कर स्वास्थ्य समानता ला सकता है। उन्होंने भारत को केवल 'दुनिया की फार्मेसी' से बदलकर 'दुनिया की प्रयोगशाला' बनाने का लक्ष्य रखा है।
- AI स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और दवा की खोज में क्रांतिकारी बदलाव लाने में सक्षम है।
- भारत का लक्ष्य केवल जेनेरिक दवाएं बनाना नहीं, बल्कि 'दुनिया की प्रयोगशाला' बनना है।
- सरकार 5,000 करोड़ रुपये की PRIP योजना के माध्यम से अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा दे रही है।
- AI का उपयोग मानव डॉक्टरों के पूरक के रूप में होना चाहिए, न कि उनकी जगह लेने के लिए।
अहमदाबाद में आयोजित IIMA हेल्थकेयर समिट 2026 में मुख्य भाषण देते हुए, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने स्वास्थ्य सेवा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की अपार संभावनाओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विविध और विशाल जनसंख्या वाले देश में, जहाँ भौगोलिक जटिलताओं के कारण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच एक बड़ी चुनौती है, AI एक 'फोर्स मल्टीप्लायर' के रूप में काम कर सकता है।
स्वास्थ्य समानता और पहुँच का विस्तार
मंत्री पटेल ने स्पष्ट किया कि AI का उद्देश्य केवल तकनीकी प्रगति नहीं, बल्कि स्वास्थ्य समानता (Health Equity) प्राप्त करना होना चाहिए। उन्होंने कहा, "हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि AI का उपयोग उन वंचित और दूरदराज के क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं को पहुँचाने के लिए किया जाए, जहाँ अब तक पहुँच सुनिश्चित करना कठिन रहा है।"
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत की भौगोलिक विविधता और आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity) को देखते हुए, व्यक्तिगत उपचार (Personalized Treatment) के लिए AI एक अनिवार्य उपकरण बन जाएगा। एक ही उपचार हर मरीज पर समान रूप से काम नहीं कर सकता, और AI इन जटिल पैटर्न को समझने में मदद करेगा।
AI को स्वास्थ्य पेशेवरों की क्षमता बढ़ाने के लिए एक सहायक के रूप में उपयोग किया जाना चाहिए, न कि मानवीय जवाबदेही को समाप्त करने के लिए।
'दुनिया की फार्मेसी' से 'दुनिया की प्रयोगशाला' तक का सफर
भारत के फार्मास्युटिकल क्षेत्र के भविष्य पर बात करते हुए, मंत्री ने एक महत्वाकांक्षी विजन साझा किया। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल जेनेरिक दवाओं और टीकों के निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहता। उन्होंने कहा, "हम केवल 'दुनिया की फार्मेसी' के टैग से संतुष्ट नहीं होंगे; हम 'दुनिया की प्रयोगशाला' बनना चाहते हैं। इसके लिए हमें दवा की खोज (Drug Discovery) में AI का व्यापक उपयोग करना होगा।"
इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, सरकार PRIP (Pharma-Medtech Sector Promotion of Research and Innovation) योजना के माध्यम से 5,000 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है। इसका उद्देश्य अनुसंधान को मजबूत करना और नवाचार-आधारित विकास को बढ़ावा देना है।
सुरक्षा और जवाबदेही के मानक
तकनीकी विकास के साथ-साथ, मंत्री ने डेटा गोपनीयता और सुरक्षा पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने जोर दिया कि AI का विकास सुरक्षित, जिम्मेदार और मानव-केंद्रित होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी तकनीकी समाधान को मानवीय निर्णय और जवाबदेही की जगह नहीं लेनी चाहिए।
Why This Matters
भारत के लिए AI का एकीकरण केवल एक तकनीकी अपग्रेड नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य सेवा के लोकतंत्रीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। यदि भारत सफलतापूर्वक AI को अपनी स्वास्थ्य प्रणाली में शामिल करता है, तो यह वैश्विक दक्षिण (Global South) के लिए एक मॉडल बन सकता है।
Frequently Asked Questions
1. भारत AI का उपयोग स्वास्थ्य सेवा में कैसे करेगा?
भारत AI का उपयोग दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचाने, नई दवाओं की खोज करने और जटिल बीमारियों के पैटर्न को समझने के लिए करेगा।
2. PRIP योजना क्या है?
PRIP एक 5,000 करोड़ रुपये की योजना है जिसका उद्देश्य फार्मा और मेडटेक क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और शिक्षा को उद्योग से जोड़ना है।