चार प्रमुख अंतरराष्ट्रीय कार्डियक संगठनों ने 'मायोकार्डियल इन्फार्क्शन' (MI) की पांचवीं सार्वभौमिक परिभाषा पेश की है। यह नया बदलाव निदान और उपचार को अधिक सटीक बनाएगा, खासकर महिलाओं के लिए जिन्हें अक्सर गैर-पारंपरिक लक्षण होते हैं।

  • हार्ट अटैक को अब तीन श्रेणियों में बांटा गया है: प्राइमरी, सेकेंडरी और प्रोसीजर-रिलेटेड।
  • नया सिस्टम जटिल संख्यात्मक वर्गीकरण के बजाय 'कारण-आधारित' दृष्टिकोण पर केंद्रित है।
  • महिलाओं में SCAD जैसे कम पहचाने जाने वाले हार्ट अटैक के प्रकार अधिक पाए जाते हैं।
  • महिला रोगियों के लिए गैर-पारंपरिक लक्षणों की जल्द पहचान करना जीवनरक्षक हो सकता है।

कार्डियोवैस्कुलर मेडिसिन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव करते हुए, दुनिया के चार सबसे प्रतिष्ठित संगठनों—यूरोपीय सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी, अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी, अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन और वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन—ने संयुक्त रूप से 'मायोकार्डियल इन्फार्क्शन' (MI) की पांचवीं सार्वभौमिक परिभाषा पेश की है। इस नए ढांचे का उद्देश्य इस बात को सरल बनाना है कि डॉक्टर हार्ट अटैक का निदान कैसे करते हैं और मरीजों के साथ संवाद कैसे करते हैं।

ऐतिहासिक रूप से, चिकित्सा जगत में हार्ट अटैक को मुख्य रूप से धमनी में रुकावट (ब्लॉकेज) के रूप में देखा जाता था। हालांकि, एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के प्रोफेसर निकोलस मिल्स का कहना है कि इसके कारण कहीं अधिक विविध हैं। नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, हार्ट अटैक को तीन नैदानिक सेटिंग्स में वर्गीकृत किया गया है: प्राइमरी MI, जो धमनी में अचानक समस्या (जैसे प्लाक फटना या ऐंठन) के कारण होता है; सेकेंडरी MI, जो रक्तचाप में भारी उतार-चढ़ाव या तेज धड़कन जैसे अन्य कारणों से ऑक्सीजन की कमी के कारण होता है; और प्रोसीजर-रिलेटेड MI, जो किसी कार्डियक सर्जरी या स्टेंटिंग के 30 दिनों के भीतर होता है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह बदलाव केवल शब्दों का नहीं, बल्कि क्लिनिकल उपचार का है। 'क्या हुआ' के बजाय 'क्यों हुआ' पर ध्यान केंद्रित करके, डॉक्टर चोट के विशिष्ट तंत्र के अनुसार उपचार कर सकते हैं। दशकों से, निदान के तरीके मुख्य रूप से पुरुषों की शारीरिक संरचना पर आधारित थे, जिससे अक्सर महिलाओं के उपचार में कमियां रह जाती थीं।

"अधिक सटीक वर्गीकरण से डॉक्टरों को इन मामलों की उचित तरीके से जांच करने में मदद मिलेगी, बजाय इसके कि वे सभी रोगियों को एक ही डायग्नोस्टिक पाथवे में फिट करने की कोशिश करें।"

महिलाओं के लिए इसके निहितार्थ विशेष रूप से गहरे हैं। कई महिलाएं स्पोंटेनियस कोरोनरी आर्टरी डिसेक्शन (SCAD), कोरोनरी आर्टरी स्पैज्म या एम्बोलिज्म के कारण हार्ट अटैक का अनुभव करती हैं, जिनमें हमेशा धमनी में गंभीर रुकावट नहीं होती है। SCAD विशेष रूप से महिलाओं से जुड़ा है और गर्भावस्था के दौरान या उसके आसपास हो सकता है। पुराने सिस्टम के तहत, इन मामलों को अक्सर कम पहचाना जाता था या उन्हें उतनी गंभीरता नहीं दी जाती थी।

डॉ. परिन संगोई और डॉ. पुण्य प्रताप कुजूर जैसे विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि हालांकि यह नहीं कहा जा सकता कि महिलाओं के साथ 'अन्याय' हुआ, लेकिन वर्गीकरण की कमी के कारण उनके विशिष्ट लक्षणों को नजरअंदाज कर दिया जाता था। नए दिशा-निर्देश निदान और देखभाल के लिए अधिक व्यक्तिगत दृष्टिकोण को अनिवार्य बनाते हैं।

वर्गीकरण मुख्य कारण उदाहरण/संदर्भ
प्राइमरी MI कोरोनरी धमनी की तीव्र समस्या प्लाक फटना, SCAD या स्पैज्म
सेकेंडरी MI ऑक्सीजन आपूर्ति/मांग में असंतुलन गंभीर उच्च रक्तचाप या टैचीकार्डिया
प्रोसीजर-रिलेटेड सर्जरी के बाद की जटिलता स्टेंटिंग/CABG के 30 दिनों के भीतर

इसके अलावा, चिकित्सा समुदाय महिलाओं से आग्रह कर रहा है कि वे यह समझें कि हार्ट अटैक के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। छाती में तेज दर्द के अलावा, अत्यधिक थकान, मतली, चक्कर आना, या जबड़े, पीठ और कंधों में बेचैनी जैसे लक्षण भी हो सकते हैं। इन 'असामान्य' लक्षणों को गंभीरता से लेना ही बचने का पहला कदम है।

क्या आप जानते हैं?: स्पोंटेनियस कोरोनरी आर्टरी डिसेक्शन (SCAD) एक दुर्लभ स्थिति है जहाँ कोरोनरी धमनी में अचानक दरार आ जाती है, और यह उन महिलाओं में अधिक आम है जिनमें हृदय रोग का कोई पारंपरिक जोखिम कारक नहीं होता।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: क्या इसका मतलब है कि मेरा पिछला हार्ट अटैक डायग्नोसिस गलत था?
जरूरी नहीं। नए दिशा-निर्देश बेहतर उपचार और शोध के लिए केवल वर्गीकरण को परिष्कृत करते हैं; वे इस तथ्य को नहीं बदलते कि हृदय की मांसपेशियों को चोट पहुंची थी।

प्रश्न 2: प्रोसीजर-रिलेटेड MI के लिए 30 दिनों की समय सीमा क्यों महत्वपूर्ण है?
यह समय सीमा डॉक्टरों को यह समझने में मदद करती है कि घटना अचानक हुई है या यह हाल ही में की गई चिकित्सा प्रक्रिया की एक जटिलता है, जिसके लिए अलग प्रबंधन रणनीति की आवश्यकता होती है।