क्रोनिक ट्रॉमैटिक एन्सेफैलोपैथी (CTE) केवल पेशेवर एथलीटों तक सीमित नहीं है। डॉन हॉर्टन की कहानी बताती है कि कैसे यह अदृश्य बीमारी एक हंसते-खेलते परिवार को तबाह कर सकती है।

  • CTE केवल NFL खिलाड़ियों को ही नहीं, बल्कि कॉलेज स्तर के एथलीटों को भी प्रभावित करता है।
  • इसके लक्षण अक्सर पार्किंसंस या अन्य न्यूरोलॉजिकल विकारों जैसे लगते हैं, जिससे गलत निदान की संभावना बढ़ जाती है।
  • मस्तिष्क की क्षति के कारण व्यवहार में बदलाव, मतिभ्रम और याददाश्त की हानि जैसे गंभीर लक्षण उभरते हैं।

खेल की दुनिया में अक्सर ग्लैमर और जीत की चर्चा होती है, लेकिन डॉन हॉर्टन और उनके परिवार की कहानी उस अंधेरे पक्ष को उजागर करती है जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। डॉन, जो विटनबर्ग यूनिवर्सिटी में एक ऑफेंसिव लाइनमैन थे और बाद में बोस्टन कॉलेज और एनसी स्टेट जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कोच रहे, एक ऐसी बीमारी का शिकार हुए जिसने उनकी पहचान और उनके परिवार की खुशियों को छीन लिया।

क्रोनिक ट्रॉमैटिक एन्सेफैलोपैथी (CTE) एक मस्तिष्क विकार है जो बार-बार सिर में चोट लगने के कारण होता है। यह अक्सर उन लोगों में देखा जाता है जो फुटबॉल जैसे संपर्क खेलों (contact sports) में शामिल होते हैं। डॉन के मामले में, शुरुआत में उन्हें पार्किंसंस रोग का निदान दिया गया था, लेकिन उनके लक्षण बहुत तेजी से और असामान्य तरीके से बिगड़ने लगे।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि समाज में CTE को केवल 'NFL स्टार्स' की समस्या माना जाता है, जबकि वास्तविकता यह है कि कॉलेज और हाई स्कूल स्तर के खिलाड़ी भी समान जोखिम में हैं। जब तक निदान मृत्यु के बाद (postmortem) नहीं होता, तब तक परिवार केवल लक्षणों से लड़ते रहते हैं, जिससे सही समय पर सहायता मिलना असंभव हो जाता है।

CTE केवल एक चिकित्सा निदान नहीं है, बल्कि यह एक पारिवारिक त्रासदी है जो जीवित बचे लोगों को एक 'मानसिक भूकंप' की स्थिति में छोड़ देती है।

डॉन की पत्नी, मौरा हॉर्टन, ने अपने पति के गिरते स्वास्थ्य को करीब से देखा। मूड स्विंग्स, पैरानोइया और मतिभ्रम (hallucinations) ने उनके वैवाहिक जीवन को बदल दिया। डॉन के लिए यह स्वीकार करना कठिन था कि जिस खेल ने उन्हें जीवन में उद्देश्य और पहचान दी, वही उनकी मृत्यु का कारण बन रहा था। अंततः, उन्होंने विज्ञान की मदद के लिए अपने मस्तिष्क को दान करने का निर्णय लिया।

इस त्रासदी का प्रभाव उनकी बेटियों, हैडली और लिब्बी पर भी गहरा पड़ा। एक पिता का शारीरिक रूप से उपस्थित होना लेकिन मानसिक रूप से गायब हो जाना, बच्चों के लिए एक असहनीय दर्द होता है। हैडली ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए TED Talk का सहारा लिया, जो यह दर्शाता है कि CTE का प्रभाव केवल रोगी तक सीमित नहीं रहता।

क्या आप जानते हैं?: शोध बताते हैं कि 2016 से 2021 के बीच मरने वाले लगभग 1 में से 4 पूर्व NFL खिलाड़ियों के मस्तिष्क में CTE पाया गया था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: क्या CTE का इलाज संभव है?
वर्तमान में, CTE का निश्चित निदान केवल मृत्यु के बाद मस्तिष्क के ऊतकों के विश्लेषण से ही संभव है, और इसका कोई ज्ञात इलाज नहीं है।

प्रश्न 2: क्या केवल फुटबॉल खेलने वालों को ही यह खतरा है?
नहीं, कोई भी व्यक्ति जिसे बार-बार सिर में चोट लगती है (जैसे मुक्केबाजी, रग्बी या गंभीर दुर्घटनाएं), वह CTE के जोखिम में हो सकता है।