ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन (AILU) ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के मामलों के त्वरित निपटान के लिए कोझिकोड में एक समर्पित अदालत की मांग की है।

  • AILU कोझिकोड सिटी कमेटी ने केसों के बैकलॉग को रोकने के लिए समर्पित SC/ST कोर्ट की मांग की।
  • विशेष अदालतों की कमी के कारण हाशिए पर रहने वाले समुदायों को न्याय मिलने में भारी देरी हो रही है।
  • कानूनी वकालत के प्रयासों का नेतृत्व करने के लिए 31 सदस्यीय नई सिटी कमेटी का चुनाव किया गया।

ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन (AILU) की कोझिकोड सिटी कमेटी ने कोझिकोड जिला न्यायालय परिसर में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज मामलों के लिए एक समर्पित अदालत की स्थापना की पुरजोर मांग की है। यह मांग AILU कोझिकोड सिटी कमेटी के यूनिट सम्मेलन के दौरान उठाई गई, जहां वकीलों ने जिला न्यायालय में विशेष अदालत की अनुपस्थिति पर चिंता व्यक्त की।

यूनियन ने उल्लेख किया कि समर्पित अदालत न होने के कारण इन संवेदनशील मामलों के निपटान में अत्यधिक देरी हो रही है। वर्तमान में, ये मामले सामान्य अदालतों में चलते हैं, जिससे न केवल समय की बर्बादी होती है बल्कि पीड़ितों को समय पर न्याय नहीं मिल पाता।

इस सम्मेलन का उद्घाटन कोझिकोड जिला लाइब्रेरी काउंसिल के अध्यक्ष के.एम. राधाकृष्णन ने किया। इस अवसर पर AILU राज्य समिति के सदस्य टॉम के. थॉमस, एम.के. दिनेशान, जोजू सिरियाक, अशोक कुमार और के.एन. जयकुमार के साथ-साथ बार काउंसिल सदस्य एम. जयदीप ने अपने विचार रखे और न्यायिक सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि विशेष अदालतों की मांग केवल प्रशासनिक सुविधा नहीं, बल्कि एक मानवाधिकार आवश्यकता है। जब SC/ST अधिनियम के तहत मामलों में देरी होती है, तो इससे गवाहों को डराने-धमकाने का मौका मिलता है और समाज के कमजोर वर्गों का न्याय प्रणाली से विश्वास उठने लगता है। एक समर्पित अदालत सुनवाई की प्रक्रिया को सरल बनाएगी।

किसी विशेष अधिनियम की प्रभावशीलता इस बात से नहीं मापी जाती कि कितनी FIR दर्ज हुईं, बल्कि इस बात से मापी जाती है कि फैसला कितनी तेजी और निष्पक्षता से आया।

सम्मेलन के दौरान, AILU ने अपनी स्थानीय कार्यकारिणी का पुनर्गठन भी किया और 31 सदस्यीय सिटी कमेटी का चुनाव किया। के.पी. श्रीनिश को अध्यक्ष, के. अद्वैत को सचिव और के. सजिता को कोषाध्यक्ष चुना गया। नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने कहा कि वे वकीलों के अधिकारों की रक्षा करने और न्याय वितरण प्रणाली को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास करेंगे।

ऐतिहासिक रूप से, SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम को त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया था। हालांकि, कई जिलों में बुनियादी ढांचे की कमी और नौकरशाही की देरी के कारण यह उद्देश्य पूरी तरह साकार नहीं हो पाया है, जिससे AILU की यह मांग अत्यंत प्रासंगिक हो जाती है।

क्या आप जानते हैं?: SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम राज्य सरकारों को अपराधों के त्वरित विचारण के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने का अधिकार देता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

SC/ST के लिए समर्पित अदालत क्यों आवश्यक है?
एक समर्पित अदालत यह सुनिश्चित करती है कि मामले सामान्य अदालतों की भीड़ में न फंसें और न्यायाधीश इस विशिष्ट कानून की बारीकियों से अच्छी तरह अवगत हों।

कोझिकोड में इस मांग का नेतृत्व कौन कर रहा है?
इस मांग का नेतृत्व ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन (AILU) की कोझिकोड सिटी कमेटी द्वारा किया जा रहा है।