ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने एक विशेष साक्षात्कार में मोजतबा खामेनेई की स्थिति पर चल रही अटकलों को खारिज करते हुए भारत और ईरान के बीच मजबूत होते रिश्तों पर चर्चा की।

  • राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने पुष्टि की कि मोजतबा खामेनेई जीवित हैं और अपना कार्य कर रहे हैं।
  • उन्होंने खामेनेई के बारे में फैली अफवाहों को अमेरिका द्वारा प्रायोजित 'दुष्प्रचार' बताया।
  • भारत और ईरान के बीच सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों को और मजबूत करने पर जोर।
  • तेहरान का मानना है कि नई दिल्ली के साथ सहयोग वैश्विक 'तानाशाही' का मुकाबला करने में सहायक होगा।

ईरान के सर्वोच्च नेता के बेटे मोजतबा खामेनेई के भविष्य और उनकी स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने एक बड़ा बयान दिया है। आजतक की ग्रुप एडिटर (फॉरेन अफेयर्स) गीता मोहन के साथ एक विशेष बातचीत में पेजेश्कियान ने स्पष्ट किया कि मोजतबा खामेनेई पूरी तरह स्वस्थ हैं और अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं।

राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने अमेरिका पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि वाशिंगटन ने ईरान के कई शीर्ष नेताओं को निशाना बनाया है, लेकिन वे मोजतबा खामेनेई का पता लगाने या उन्हें प्रभावित करने में विफल रहे हैं। उनके अनुसार, इसी विफलता को छिपाने के लिए अमेरिका द्वारा इस तरह के झूठे नैरेटिव और दुष्प्रचार फैलाए जा रहे हैं ताकि ईरानी नेतृत्व में भ्रम पैदा किया जा सके।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह बयान केवल एक व्यक्ति की स्थिति स्पष्ट करने के लिए नहीं है, बल्कि यह दुनिया को यह संदेश देने की कोशिश है कि ईरान का आंतरिक नेतृत्व ढांचा स्थिर है। उत्तराधिकार की दौड़ में मोजतबा खामेनेई का नाम प्रमुखता से लिया जाता है, इसलिए उनकी उपस्थिति की पुष्टि करना शासन की निरंतरता को दर्शाना है।

साक्षात्कार के दौरान राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ अपनी हालिया मुलाकात और वायरल तस्वीर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मोदी के साथ हाथ में हाथ डालकर चलना केवल एक तस्वीर नहीं, बल्कि भारत और ईरान के बीच बढ़ते विश्वास और रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब से उन्होंने कार्यभार संभाला है, दोनों देशों के संबंध नई ऊंचाइयों पर पहुंचे हैं।

भारत और ईरान के बीच प्राचीन सांस्कृतिक संबंध किसी भी आधुनिक राजनीतिक तनाव से कहीं अधिक गहरे और स्थायी हैं।

पेजेश्कियान ने भारत के साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि यह एक ऐसा बंधन है जिसे समय के साथ बदला नहीं जा सकता। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि तेहरान और नई दिल्ली का मजबूत सहयोग दुनिया में बढ़ते "तानाशाही रवैये" (विशेषकर अमेरिकी विदेश नीति) का मुकाबला करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

ऐतिहासिक रूप से, ईरान और भारत ने व्यापार और ऊर्जा के क्षेत्र में गहरे संबंध रखे हैं। चाबहार पोर्ट जैसे प्रोजेक्ट्स इस बात का प्रमाण हैं कि दोनों देश भौगोलिक बाधाओं के बावजूद एक-दूसरे के करीब आना चाहते हैं। पेजेश्कियान का यह दृष्टिकोण दर्शाता है कि ईरान अब पश्चिम के बजाय पूर्व की ओर अपने राजनयिक झुकाव को और बढ़ा रहा है।

क्या आप जानते हैं?: भारत और फारस (ईरान) के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान इतना गहरा है कि उर्दू भाषा और मुगल वास्तुकला पर फारसी संस्कृति का स्पष्ट प्रभाव देखा जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने मोजतबा खामेनेई के बारे में क्या कहा?
उन्होंने स्पष्ट किया कि मोजतबा खामेनेई जीवित हैं और सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं, और उनके बारे में अफवाहें अमेरिकी दुष्प्रचार का हिस्सा हैं।

प्रश्न 2: भारत और ईरान के संबंधों पर ईरानी राष्ट्रपति का क्या नजरिया है?
वे भारत को एक भरोसेमंद सांस्कृतिक और रणनीतिक साझेदार मानते हैं और पीएम मोदी के साथ संबंधों को और मजबूत करना चाहते हैं।