नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स 2026 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई, जिसमें वैश्विक दक्षिण (Global South) के हितों और द्विपक्षीय संबंधों के महत्व पर चर्चा की गई।

  • प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच लगभग एक दशक बाद भारत में पहली महत्वपूर्ण मुलाकात।
  • शी जिनपिंग ने भारत-चीन संबंधों को 'रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण' बताया।
  • दोनों नेताओं ने वैश्विक दक्षिण (Global South) के विकास के लिए स्थिर संबंधों पर जोर दिया।

नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स 2026 (BRICS 2026) शिखर सम्मेलन के ऐतिहासिक अवसर पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक संपन्न हुई। यह मुलाकात पिछले लगभग एक दशक में राष्ट्रपति शी की भारत यात्रा के दौरान सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रमों में से एक मानी जा रही है। बैठक के दौरान, दोनों नेताओं ने अपने पिछले संबंधों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।

अपने संबोधन में, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उल्लेख किया कि दोनों नेताओं के बीच अब तक 20 से अधिक बार मुलाकात हो चुकी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बीजिंग भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को केवल क्षेत्रीय स्तर पर नहीं, बल्कि एक व्यापक रणनीतिक महत्व के नजरिए से देखता है। उन्होंने दोनों देशों के बीच आर्थिक उपलब्धियों की सराहना की और कहा कि एक स्थिर और रचनात्मक संबंध बनाए रखना केवल दोनों देशों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे ग्लोबल साउथ (Global South) के देशों के हित में है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह बैठक सीमा विवादों के बाद भारत और चीन के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकती है। यदि दोनों देश उच्च गुणवत्ता वाले विकास और वैश्विक शांति की दिशा में मिलकर काम करते हैं, तो यह एशियाई भू-राजनीति (Geopolitics) के समीकरणों को पूरी तरह से बदल सकता है।

भारत और चीन के बीच का सामंजस्य वैश्विक दक्षिण की आवाज को और अधिक सशक्त बना सकता है।

राष्ट्रपति शी ने दोनों देशों से आग्रह किया कि वे अपनी ऊर्जा को उच्च गुणवत्ता वाले विकास और वैश्विक स्थिरता को बढ़ावा देने में लगाएं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि दोनों महाशक्तियों की सक्रिय भूमिका दुनिया में शांति बनाए रखने के लिए अनिवार्य है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत और चीन के संबंध दशकों से उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। 1962 के युद्ध से लेकर हाल के वर्षों में लद्दाख सीमा विवाद तक, दोनों देशों के बीच तनाव के कई दौर आए हैं। हालांकि, ब्रिक्स जैसे मंचों पर दोनों देशों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि आर्थिक और भू-राजनीतिक कारणों से दोनों एक-दूसरे के साथ संवाद बनाए रखना चाहते हैं।

Did You Know?: भारत और चीन दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाले दो देश हैं, जो मिलकर वैश्विक अर्थव्यवस्था और राजनीति को नियंत्रित करने की क्षमता रखते हैं।

Frequently Asked Questions

1. ब्रिक्स 2026 का आयोजन कहाँ हुआ?
ब्रिक्स 2026 शिखर सम्मेलन का आयोजन भारत की राजधानी नई दिल्ली में किया गया।

2. शी जिनपिंग ने संबंधों के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि भारत-चीन संबंधों का विकास वैश्विक दक्षिण के हितों के लिए महत्वपूर्ण है और इसे रणनीतिक दृष्टि से देखा जाना चाहिए।